Latest Updates
-
Guru Gochar 2026: 2 जून को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे देवगुरु बृहस्पति, ये 4 राशियां होने वाली हैं अमीर -
क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम -
Healthy Iron Rich Aloo Palak Recipe: लंच के लिए बनाएं आयरन से भरपूर स्वादिष्ट सब्जी -
दिल्ली में फिर फटा AC: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नहीं, ये 4 बड़ी गलतियां एयर कंडीशनर को बना रही हैं ‘बम'! -
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें
Diwali 2023: भारत के इन स्थानों पर क्यों नहीं मनाई जाती दिवाली? दीये तक नहीं जलते
Diwali 2023: वैसे तो रौशनी का पर्व दिवाली देश के लगभग हर हिस्से में मनाया जाता है। असत्य पर सत्य की विजय के पश्चात मर्यादा पुरुषोत्तम राम के घर लौटने की ख़ुशी में घरों को दीयो से सजाने के बाद से ये परंपरा आज भी कायम है।
लक्ष्मी गणेश की पूजा करके घर में सुख समृद्धि के आगमन की कामना की जाती है। लेकिन दिवाली के दिन जहां हर घर जगमग करता है वहीं देश के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां दिवाली बिलकुल नहीं मनाई जाती है, अलबत्ता एक जगह तो दिवाली को मातम के रूप में मनाया जाता है। आइये आपको ऐसी दो जगहों के बारे में बताते हैं।

भारत के इन स्थानों पर नहीं मनाई जाती दिवाली, जानें वजह
कर्नाटक के मेलकोटे नामक जगह में जिस दिन देश के बाकि घर चिरागों से रौशन होते हैं वहीं यहां लोग मातम मनाते हैं। दरअसल यहां के लोगों का कहना है कि टीपू सुलतान के समय इस गाँव में भयानक नरसंहार हुआ था। टीपू सुलतान कन्नड़ भाषा से नफरत करता था और उसने कन्नड़ भाषा को खत्म करने का प्लान बनाया। इसका विरोध करने पर मेलकोटे के ब्राह्मण टीपू सुलतान के दुश्मन बन गए। टीपू सुलतान ने इस गांव के ब्राह्मणों के नरसंहार का आदेश दे दिया। इसके बाद इस गाँव के सैकड़ों ब्राह्मणों की हत्या कर दी गयी थी। औरतों का बलात्कार हुआ और बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया। इसके बाद से अयंगार ब्राह्मणों के बचे हुए लोगो ने फैसला किया कि दिवाली का दिन त्यौहार के रूप में नहीं बल्कि मातम के रूप में मनाया जायेगा ताकि आने वाली पीढियां इस अत्याचार को याद रखे। आज भी मेलकोटे के घर चरागों से रौशन नहीं होते, दिवाली नहीं मनाई जाती है।
दूसरी जगह है केरल। केरल के कोच्ची नामक जगह को छोड़ कर यहां कहीं भी दिवाली नहीं मनाई जाती है। लोगों का कहना है कि एक समय यहां के राजा महाबली थे जिनको विष्णु ने इनसे छीन लिया। आज भी महाबली ओणम के दिन अपनी प्रजा को देखने आते हैं इसलिए ओणम के दिन केरल के लोग त्यौहार के रूप में मनाते हैं। लेकिन केरल के लोग दिवाली नहीं मनाते। इनका मानना है कि इनके राजा महाबली एक राक्षस थे और दिवाली देवताओं का राक्षसों के ऊपर विजय का त्यौहार है इसलिए ये दिवाली अपने राजा के सम्मान में नहीं मनाते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications