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Diwali Swastik Design Rules: आप तो नहीं बनाते हिटलर वाला उल्टा स्वस्तिक, जानें इसे बनाने के नियम
Diwali Swastik Design Rules: स्वस्तिक शुभता का प्रतीक है। हर पूजा पाठ में इस प्रतीक का उपयोग किया जाता है। ऐसी मान्यता है की स्वस्तिक में देवताओं का निवास होता है। लेकिन स्वस्तिक बनाने की सही विधि मालूम ना हो तो स्वस्तिक का चिन्ह नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है। इसलिए आइये जान लीजिये की स्वस्तिक बनाने की सही विधि और नियम क्या हैं।
स्वस्तिक बनाने की सही विधि

ऐसी मान्यता है कि स्वस्तिक चार वेदों और चार दिशाओं का भी प्रतीक है। इसलिए चार भुजाओं वाले स्वस्तिक बनाने की सही विधि क्रमानुसार इस प्रकार है।
सबसे पहले तीन डॉट बनाएं फिर उसके पैरेलल नीचे तीन डॉट और फिर उसके नीचे तिन डॉट। इस प्रकार कुल नौ डॉट बन गए। अब नीचे से ऊपर की ओर शुरुआत करें। स्वस्तिक ऊपर से नीचे की और नहीं बनाते बल्कि नीचे से ऊपर की और बनाते हैं। ऊपर की ओर जाना प्रगति का द्योतक है। नीचे से ऊपर की तरफ डॉट्स को मिलाना शुरू करें ताकि स्वस्तिक की चार भुजाएं बन जाए। स्वस्तिक की दिशा हमेशा क्लोकवाइज होनी चाहिए।
स्वस्तिक बनाने के लिए रोली, चन्दन, हल्दी, कुमकुम या सिंदूर का इस्तेमाल करें तो शुभ होता है। स्वस्तिक को हमेशा घर की उत्तर पूर्व दिशा में बनाना चाहिए। घर के प्रवेश द्वार पर भी स्वस्तिक बना सकते हैं, पर ध्यान रहे कि इस पर पैर ना पड़े। सबसे शुभ होता है अपनी तिजोरी पर स्वस्तिक बनाना।
इस बात का ध्यान रखें कि अगर भुजाओं की दिशा उलटी है तो फिर यह तांत्रिक स्वस्तिक बन जायेगी जिसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसा कहा जाता है कि जर्मनी के हिटलर ने ऐसा ही उल्टा स्वस्तिक का इस्तेमाल किया था जिससे उसका पतन हो गया। तो इस दिवाली सही से स्वस्तिक बनाएं और शुभता अपने घर लायें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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