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Eid Milad Un Nabi Qawwali Lyrics : ईद मिलाद उन नबी की महफिल पर चार-चांद लगा देंगे ये नात और कव्वाली
Eid Milad Un Nabi Qawwali Lyrics In Hindi and Urdu: ईद मिलाद-उन-नबी (या मिलाद-उल-नबी) इस्लाम के प्यारे पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद के जन्मदिन (12 रबी-उल-अव्वल) के मौक़े पर बड़े एहतराम और मोहब्बत से मनाई जाती है। इस दिन मुसलमान म समुदाय विभिन्न धार्मिक परंपराओं का पालन करता है। मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर जुलूस, विशेष नमाज़, कुरान की तिलावत, कव्वाली और नात शरीफ के कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
नात एक खास तरह की धार्मिक कविता शैली है, जिसमें पैगंबर मुहम्मद के जीवन, उनके उपदेश, गुण और योगदान का गुणगान किया जाता है। नातख्वान अपनी आवाज़ से माहौल को भक्तिमय बना देते हैं और लोग श्रद्धा से इसे सुनते हैं।
सामूहिक नात-पाठ, जलसे और धार्मिक सभाएं इस पर्व की मुख्य विशेषता होती हैं, जो लोगों को आध्यात्मिकता और एकता का संदेश देती हैं। इस स्पेशल मौके पर हम आपके लिए कुछ फेमस और चुनिंदा नात और कव्वाली लेकर आए हैं।

mere sarkar aaye qawwali lyrics (मेरे सरकार आए )
ज़मीं बोली के सरदार ए पयंबर आने वाला है
फ़लक बोला के हक़ का ख़ास दिलबर आने वाला है
मलक बोले के रहमत का समंदर आने वाला है
फिर कहा हूरों ने जग में बंदा परवर आने वाला है
सितारे आचुके अब माह ए अनवर आने वाला है
अभी जिबरील उतरे भी न थे काबे के मिंबर से
के इतने में सदा आई ये अब्दुल्लाह के घर से
बारह रबी उल अव्वल के दिन
अब्र ए बहारां छाए
मेरे सरकार आए
आमना तेरे घर आकर
जिबरील पयाम ये लाए
मेरे सरकार आए
दूर हुआ दुनिया से...
(Jashne Aamade Rasool Allah hi Allah Lyrics / जश्न-ए-आमद-ए-रसूल अल्लाह ही अल्लाह)
खाके तैबा तेरी धूल अल्लाह ही अल्लाह
पाके तैबा तेरी धूल अल्लाह ही अल्लाह
जश्न आ'मद रसूल अल्लाह ही अल्लाह
जश्न आ'मद रसूल अल्लाह ही अल्लाह
बीबी आमना के फूल अल्लाह ही अल्लाह
बीबी आमना के फूल अल्लाह ही अल्लाह
मरहबा या मुस्तफ़ा मरहबा या मुस्तफ़ा
मरहबा या मुस्तफ़ा मरहबा या मुस्तफ़ा
जब सरकार तशरीफ़ लाने लगे
हूर-ओ-ग़िलमां भी ख़ुशियाँ मनाने लगे
हर तरफ़ नूर की रौशनी छा गई
मुस्तफ़ा क्या मिले, ज़िंदगी मिल गई
ऐ हलीमा तेरी गोद में आ गए
दोनों आ'लम के रसूल अल्लाह ही अल्लाह
चेहरा-ए-मुस्तफ़ा जबकि दिखाया गया
छुप गए तारे और चाँद शर्मा गया
आमना देख कर मुस्कुराने लगीं
हव्वा मरियम भी ख़ुशियाँ मनाने लगीं
आमना बीबी सब से ये कहने लगीं
दुआ' हो गई क़बूल अल्लाह ही अल्लाह
शादिये ख़ुशी के बजाए गए
शाद के नग़्मे सब को सुनाए गए
Aye kaash unke dar par yun maut meri aaye Lyrics Naat in Hindi
ऐ काश उनके दर पर यूं मौत मेरी आए
नज़रें झुकी हो मेरी दिल नात गुनगुनाए
मेरे रब मुझे अता हो दर ए मुस्तफा का मंज़र
वो हसीन सब्ज़ गुंबद मेरी आँखों में समाए
मैं चलूँगा झूम कर फिर खुल्दे बरी की तरफ
जो शफी ए रोज़ ए महशर मेरी हर ख़ता मिटाए
आग़ोश खोले जन्नत उसको पुकारती है
जो शख्स अपनी माँ के क़दमों में लेट जाए
मेरी ज़िंदगी का मकसद हो गुलामीए पैंबार
रहे तलाश ये दिल में बस इसी में मौत आए
ये आरज़ू है मेरी ये गुलाम उनके दर पर
रो-रो के उनको अपने हालात ए ग़म सुनाए
ये तमिम की दुआ है हालात ए पुरालम में
मुझ पर करम हो आका रहे रहमतों के साए
Aye kaash unke dar par yun maut meri aaye Lyrics Naat in Urdu
اے کاش ان کے در پر یوں موت میری آئے
نظرے جھکی ہوں میری دل نعت گنگنائے
میرے رب مجھے عطا ہو درِ مصطفیٰ کا منظر
وہ حسین سبز گنبد میری آنکھوں میں سمائے
میں چلوں گا جھوم کر پھر جنت کی طرف
جو شافعِ روزِ محشر میری ہر خطا مٹائے
آغوش کھولے جنت اُس کو پکارتی ہے
جو شخص اپنی ماں کے قدموں میں لیٹ جائے
میری زندگی کا مقصد ہو غلامیٔ پیغمبر
رہے تلاش یہ دل میں بس اسی میں موت آئے
یہ آرزو ہے میری یہ غلام ان کے در پر
رو رو کے ان کو اپنے حالاتِ غم سنائے
یہ تمیم کی دعا ہے حالاتِ پُرا لَم میں
مجھ پر کرم ہو آقا رہے رحمتوں کے سائے
Tu Sham-e-Risalat Hai Aalam Tera Parwana LYRICS NAAT in Hindi
तू शम-ए-रिसालत है आलम तेरा परवाना
तू माह-ए-ुबुव्वत है, ऐ जल्वा-ए-जानाना
जो साकी-ए-कौसर के चेहरेसेनक्ाब उे
हर दिल बने मय-खाना, हर औँख हो पैमाना
दिल अपना चमक उठे ईमान की तल'अत से
कर ऑँखें भी नूरानी, ऐ जल्वा-ए-जानाना!
सरशार 'मुझे कर दे इक जाम-ए-लबालब से
ता-हश्र रहे, साकी आबाद ये मय-ख़ाना
तुम आए छटी बाज़ी, रौनक़ हुई फिर ताज़ी
का'बा हुबा फिर का'बा, कर डाला था बुत-खाना
उस दर की हुजूरी ही इस्यॉ की दवा ठहरी
है ज़हर-ए-म'आसी का तयबा ही शिफफ़़ा-ख़ाना
हर फूल में बू तेरी, हर शम अ में जौ तेरी
बुलबुल है तेरा बुलबुल, परवाना है परवाना
पीते हैं तेरे दर का, खाते हैं तेरे दर का
पानी है तेरा पानी, दाना है तेरा दाना
संग-ए-दर-जानाँ पर करता हूँ जबीं-साई
सज्दा न समझ, नज्दी! सर देता ह नज़राना
गिर पड़ के यहाँ पहुँचा, मर मर के इसे पाया
डछूटेन, डलाही।! अब संग-ए-दर-ए-जानाना
वो कहते न कहते कुछ, वो करते न करते कुछ
ऐ काश।! वो सुन लेते, मुझ से मेरा अफ़साना
ऑरखो मेंमेरेतू आ औरदिल मेंमेरे बस जा
दिल-शाद मुझे फ़रमा, ऐ जल्वा-ए-जानाना'
आबाद इसे फ़रमा, वीरॉँ दिल-ए-नूरी
जल्वे तेरे बस जाएँ, आबाद हो वीराना
सरकार के जल्वों से रौशन है दिल-ए-नूरी
ताहशरहेरीशन नूरी का येकाशाना
Tu Sham-e-Risalat Hai Aalam Tera Parwana LYRICS NAAT in Urdu
تو شمع نبوت ہے عالم تیرا پروانہ
تو ماہ رسالت ہے اے جلوۂ جانانہ
جو ساقیٔ کوثر کے چہرے سے نقاب اٹھے
ہر دل بنے میخانہ ہر آنکھ ہو پیمانہ
دل اپنے چمک اٹھے ایمان کی طلعت سے
کر آنکھیں بھی نورانی اے جلوۂ جانانہ
سرشار مجھے کردے اک جام لبا لب سے
تا حشر رہے ساقی آباد یہ میخانہ
میں شاہ نشیں ٹوٹے دل کو نہ کہوں کیسے
ہے ٹوٹا ہوا دل ہی مولیٰ ترا کاشانہ
سنگِ در جاناں پر کرتا ہوں جبیں سائی
سجدہ نہ سمجھ نوری سر دیتا ہوں نذرانہ
گر پڑ کے یہاں پہنچا مر مر کے اسے پایا
چھوٹے نہ الہی اب سنگ در جانانہ
آباد اسے فرما ویراں ہے دل نوریؔ
جلوے ترے بس جائیں آباد ہو ویرانہ
कुन फ़यकून, कुन फ़यकून, फ़यकून ( Kun fa yakun kun fa yakun in Hindi)
या निज़ामुद्दीन अवलिया, या निज़ामुद्दीन सरकार
क़दम बढ़ा ले, हदों को मिटा ले
आ जा ! ख़ाली पन में, पी का घर तेरा
तेरे बिन ख़ाली, आ जा ! ख़ाली पन में
रंगरेज़ा ! रंगरेज़ा ! रंगरेज़ा ! रंगरेज़ा !
रंगरेज़ा ! रंगरेज़ा ! रंगरेज़ा ! रंगरेज़ा !
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
कुन फ़यकून, कुन फ़यकून, फ़यकून
फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून
जब कहीं पे कुछ नहीं, भी नहीं था
वो ही था, वो ही था, वो ही था, वो ही था
वो जो मुझ में समाया
वो जो तुझ में समाया
मौला वो ही, वो ख़ुदा या
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
कुन फ़यकून, कुन फ़यकून, फ़यकून
फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून
ह़स्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी ग़ैरुल्लाह
नूर-ए-मुह़म्मद स़ल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह
ला इलाहा इल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह
मेरे मौला ! मौला ! मौला !
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
कुन फ़यकून, कुन फ़यकून, फ़यकून
फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून
खुल जाएं दर जन्नत के, दोज़ख़ की सब आग बुझे
दिल से कोई इक बार कहे, ला इलाहा इल्लल्लाह
ला इलाहा इल्लल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाह
मेरे मौला ! मौला ! मौला !
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
कुन फ़यकून, कुन फ़यकून, फ़यकून
फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून
सदक़ल्लाहुल-अ़लीयुल-अ़ज़ीम
सदक़ रसूलहुन्नबीयुल-क़रीम
स़ल्लल्लाहु अ़लयहि व सल्लम
स़ल्लल्लाहु अ़लयहि व सल्लम
मुझ पे करम सरकार ! तेरा
अर्ज़ तुझे, कर दे मुझे
मुझ से ही रिहा
अब मुझ को भी हो दीदार मेरा
कर दे मुझे मुझ से ही रिहा
मुझे दर पे फिर बुलाना, मदनी मदीने वाले !
मय-ए-इश्क़ भी पिलाना, मदनी मदीने वाले !
मुझे जल्वा दिखाना, मदनी मदीने वाले
मुझे सीने से लगाना, मदनी मदीने वाले
मुझे अपना बनाना, मुझे सीने से लगाना
मदनी मदीने वाले, मदनी मदीने वाले
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु अल्लाहु
कुन फ़यकून, कुन फ़यकून, फ़यकून
फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून, फ़यकून
या निजामुद्दीन औलिया
या निजामुद्दीन सरकार
कदम बढ़ा ले , हदों को मिटा ले
आजा खालीपन में पी का घर तेरा
तेरे बिन खाली आजा खालीपन में
तेरे बिन खाली आजा खालीपन में
रंगरेजा , रंगरेजा
रंगरेजा
हो , रंगरेजा , रंगरेजा
कुन फायाकून कुन फायाकून फायाकून
फयकुन फायाकून फायाकून
कुन फायाकून कुन फायाकून फायाकून
फयकुन फायाकून फायाकून
जब कहीं पे कुछ नहीं , भी नहीं था
वही था , वही था , वही था , वही था
जब कहीं पे कुछ नहीं , भी नहीं था
वही था , वही था , वही था , वही था
वो जो मुझमें समाया , वो जो तुझमें समाया
मौला वही - वही माया
वो जो मुझमें समाया , वो जो तुझमें समाया
मौला वही - वही माया
कुन फायाकून कुन फायाकून
सदक़ अल्लाहु अली उल अज़ीम
रंगरेजा रंग मेरा , तन मेरा मन
ले - ले रंगाई चाहे तन चाहे मन
रंगरेजा रंग मेरा , तन मेरा मन
ले - ले रंगाई चाहे तन चाहे मन
सजरा सवेरा मेरे तन बरसे
कजरा अँधेरा तेरी जलती लौ
सजरा सवेरा मेरे तन बरसे
कजरा अँधेरा तेरी जलती लौ
क़तरा मिला जो तेरे दर बरसे
ओ , मौला , मौला
कुन फायाकून कुन फायाकून
कुन फायाकून कुन फायाकून
फयकुन कुन फायाकून फायाकून
फयकुन फायाकून फायाकून
कुन फायाकून कुन फायाकून फायाकून
फयकुन फायाकून फायाकून
जब कहीं पे कुछ नहीं , भी नहीं था
वही था , वही था , वही था , वही था
जब कहीं पे कुछ नहीं , भी नहीं था
वही था , वही था , वही था , वही था
कुन फायाकून कुन फायाकून
सदक़ अल्लाहु अली उल अज़ीम
सदक़ा - रओसूलुह - उल - नबी - उल - करीम
सलल्लाह हु अलैहि वसल्लम
सलल्लाह हु अलैहि वसल्लम
हो मुझपे करम सरकार तेरा
अरज तुझे करदे मुझे , मुझसे ही रिहा
अब मुझको भी हो दीदार मेरा
करदे मुझे मुझसे ही रिहा , मुझसे ही रिहा
मन के मेरे ये भरम
कच्चे मेरे ये करम
लेके चले है कहाँ , मैं तो जानू ही ना
तू है मुझमें समाया , कहाँ लेके मुझे आया
मैं हूँ तुझमें समाया , तेरे पीछे चला आया
तेरा ही मैं इक साया , तूने मुझको बनाया
मैं तो जग को ना भाया , तूने गले से लगाया
हक़ तुही है खुदाया , सच तुही है खुदाया
कुन फायाकून कुन फायाकून
कुन फायाकून कुन फायाकून
फयकुन कुन फायाकून फायाकून
फयकुन फायाकून फायाकून
कुन फायाकून कुन फायाकून फायाकून
फयकुन फायाकून फायाकून
जब कहीं पे कुछ नहीं , भी नहीं था
वही था , वही था , वही था , वही था
जब कहीं पे कुछ नहीं , भी नहीं था
वही था , वही था , वही था , वही था
कुन फायाकून कुन फायाकून
सदक़ अल्लाहु अली उल अज़ीम
सदक़ा - रओसूलुह - उल - नबी - उल - करीम
सलल्लाह हु अलैहि वसल्लम
सलल्लाह हु अलैहि वसल्लम
Eid Milad un Nabi Hai Dil Bada Masroor Hai Lyrics Naat in Hindi
ईद-ए-मीलादुन्नबी है दिल बड़ा मस़रूर है
ईद दीवानों की तो 12 रबीउन्नूर है।
इस तरफ जो नूर है, तो उस तरफ भी नूर है
ज़र्रा-ज़र्रा सब जहाँ का नूर से मामूर है।
जश्न-ए-मीलादुन्नबी है, क्यों न झूमें आज हम
मुस्कुराती हैं बहारें, सब फ़िज़ा पुरनूर है।
हर मलक है शादमाँ, खुश आज हर एक हूर है
हाँ मगर शैतान बहम, रुफ़क़ा बड़ा रंज़ूर है।
आमद-ए-सरकार से, दिल मस्त होई काफ़ूर है
क्या ज़मीन, क्या आसमाँ, हर सम्त छाया नूर है।
ग़म के बादल छट गए, हर ग़म का मारा झूम उठा
आ गया खुशियाँ लिए, माहे रबीउन्नूर है।
आमिना तुझ को मुबारक शाह की मीलाद हो
तेरा आँगन नूर बनके, घर का घर सब नूर है।
बख़्श दे मुझको इलाही, बह्रे मीलादुन्नबी
नामा-ए-आमाल इसया से मेरा भरपूर है।
गुंबद-ए-ख़ज़रा का उसको भी दीदार हो
या इलाही जो मदीने से अभी तक दूर है।
हूँ ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा, अत्तार का दावा है ये
काश आका भी ये फ़रमाएँ, हमें मंज़ूर है।
ईद-ए-मीलादुन्नबी है, दिल बड़ा मस़रूर है
ईद दीवानों की तो 12 रबीउन्नूर है।
Eid Milad un Nabi Hai Dil Bada Masroor Hai Lyrics Naat in Urdu
عید میلاد النبی ہے، دل بڑا مسرور ہے
عید میلاد النبی ہے، دل بڑا مسرور ہے
عید دیوانوں کی تو ۱۲ ربیع النور ہے۔
اس طرف جو نور ہے، تو اس طرف بھی نور ہے
ذرہ ذرہ سب جہاں کا نور سے معمور ہے۔
جشن میلاد النبی ہے، کیوں نہ جھومیں آج ہم
مسکراتی ہیں بہاریں، سب فضا پرنور ہے۔
ہر ملک ہے شادماں، خوش آج ہر ایک حور ہے
ہاں مگر شیطان بہم، رفقا بڑا رنجور ہے۔
آمد سرکار سے، دل مست ہوئی کافور ہے
کیا زمین، کیا آسماں، ہر سمت چھایا نور ہے۔
غم کے بادل چھٹ گئے، ہر غم کا مارا جھوم اٹھا
آ گیا خوشیاں لیے، ماہِ ربیع النور ہے۔
آمنہ تجھ کو مبارک، شاہ کی میلاد ہو
تیرا آنگن نور بن کے، گھر کا گھر سب نور ہے۔
بخش دے مجھ کو الٰہی، بحرِ میلاد النبی
نامۂ اعمال عصیاں سے میرا بھرپور ہے۔
گنبدِ خضرا کا اس کو بھی دیدار ہو
یا الٰہی جو مدینے سے ابھی تک دور ہے۔
ہوں غلامِ مصطفیٰ، عطّار کا دعویٰ ہے یہ
کاش آقا بھی یہ فرمائیں، ہمیں منظور ہے۔
عید میلاد النبی ہے، دل بڑا مسرور ہے
عید دیوانوں کی تو ۱۲ ربیع النور ہے۔
شاعر :محمد الیاس عطار قادری



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