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Exclusive on Rath Yatra: 'जगन्नाथ हर उड़िया परिवार के बड़े सदस्य जैसे', रथ यात्रा पर सुनें लोगों के दिल की बात
Exclusive on Jagannath Rath Yatra: उड़ीसा का सबसे लोकप्रिय त्यौहार और धार्मिक उत्सव माना जाता है रथयात्रा। उड़ीसा के लोग हर साल बहुत बेसब्री से इस यात्रा की प्रतीक्षा करते हैं। जो लोग अपने काम काज और नौकरी या व्यवसाय की वजह से उड़ीसा से बाहर रहते हैं वो भी पूरी कोशिश करते हैं कि रथयात्रा के समय अपने गृह राज्य पहुंच जाएं लेकिन ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो रथयात्रा के दौरान अपने गृह राज्य उड़ीसा नहीं जा पाते हैं।
ऐसे लोगो के लिए रथयात्रा और जगन्नाथ क्या मायने रखता है? आइये जानते हैं उड़ीसा से सैकड़ो किलोमीटर दूर रहने वाले उड़िया लोगो की मन की बात:
जगन्नाथ के अलावा किसी अन्य भगवान की कल्पना कर पाना मुश्किल

प्रीतम मांगराज मूलतः उड़ीसा के राउरकेला के निवासी हैं। ये एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हैं और फिलहाल कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में नौकरी करते हैं। काम की व्यस्तता की वजह से ये इस बार रथयात्रा में शामिल होने उड़ीसा नहीं जा पाए। जब इनसे पूछा गया कि रथयात्रा में अपने गृह राज्य नहीं जाने पर कैसा लग रहा है तो इनका ये जवाब था,
"हम बचपन से ही जगन्नाथ को देखते पूजते और इनके किस्से सुनते बड़े होते हैं। हमारे लिए इनके अलावा और किसी भगवान् की कल्पना करना मुश्किल होता था, जब बड़े हुए तो बाकी देवी देवताओं की भी पूजा करने लगे लेकिन हमारे मन में जगन्नाथ ही सबसे प्रमुख देवता हैं, दरअसल जगन्नाथ हमारे लिए सिर्फ भगवान् ही नहीं हैं, ये हमारे परिवार के सबसे बड़े सदस्य की तरह हैं। इनके रथयात्रा में शामिल होने पर ऐसा लगता है अपने रिश्तेदार से मिलने आये हैं, रथयात्रा में शामिल होना एक अद्भुत अनुभव है जिसे कोई उड़िया मिस नहीं करना चाहता। लेकिन अब चूंकि मैं इस बार उड़ीसा नहीं जा पा रहा हूं तो ऐसा लग रहा है कि कुछ बहुत महत्वपूर्ण चीज मिस कर रहा हूँ। "
पुरी से दूर बैंगलोर की रथयात्रा में शामिल होकर इस उत्सव को मना लेते हैं

बैंगलोर में ही डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल से जुडी हैं मोनालिसा सेनापति। ये भुवनेश्वर की रहने वाली हैं और रथयात्रा में शामिल होने नहीं जा पायी। इनके लिए रथयात्रा नोस्टालजिक करने वाली घटना है। मोनालिसा कहती हैं "जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा तीनों रथ पर बैठ कर अपनी मौसी के यहां घूमने जाते हैं और उनके पीछे पीछे हम सब भक्तों की टोली चलती है। ये इतना प्यारा अनुभव है कि इसको शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। ढोल नगाड़े के धुन पर झूमते हुए लोग और विशालकाय रथों को खींचते हुए लोगों का समन्दर ,बहुत दुर्लभ अनुभव होता है ये देखना, ये एक ऐसी चीज है जिसे मिस करने पर मन उदास हो जाता है। लेकिन हम जैसे लोगों के लिए एक ख़ुशी की बात ये है कि बैंगलोर में भी रथयात्रा निकलती है तो हम जैसे लोग जो घर नहीं जा पाते वो यहाँ की रथयात्रा में शामिल होकर ख़ुशी मना लेते हैं।"
जगन्नाथ रथ यात्रा से मिली म्यूजिकल कंटेंट की प्रेरणा

सौम्य मोहंती पेशे से म्यूजिक प्रोडूसर हैं और फिलहाल गोवा में रहते हैं। रथयात्रा और जगन्नाथ के बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए ये बताते हैं कि "रथयात्रा के दौरान जिस रिदम और ताल से जयकारे लगते हैं और वाद्य यन्त्र बजाये जाते हैं वो अद्भुत है। ये मुझे झूमने पर विवश कर देता है। कई सारे म्यूजिकल कंटेंट की प्रेरणा मुझे रथयात्रा से ही मिलती हैं। रथयात्रा इतना विशाल और इतना कठिन होता है कि अंग्रेजो ने जगन्नाथ से जुड़ा एक शब्द ही ईजाद कर दिया जगरनॉट जिसका मतलब है बहुत बड़ा और कठिन कार्य। जात पात, ऊंच नीच, अमीर गरीब ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलता, जगन्नाथ सबके हैं और सब जगन्नाथ के हैं।"
सबके हैं भगवान जगन्नाथ

मानस रंजन जगन्नाथ के बारे में बताते हुए भाव विभोर हो जाते हैं। इनका कहना है कि बहुत सारे भक्त ऐसे हैं जो दूसरे मजहब को मानते हैं, अब चूँकि पूरी जगननाथ मंदिर में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है इसलिए भगवानाथ जगन्नाथ स्वयं मंदिर से बाहर आ जाते हैं ताकि उनका भक्त कोई भी हो दर्शन का अधिकार सबका है। भाई बहन में सबसे बड़े होने के बावजूद जगन्नाथ का रथ बलराम और सुभद्रा के रथ के पीछे चलता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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