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Mangla Gauri Vrat 2023: 25 जुलाई को रखा जाएगा अगला मंगला गौरी व्रत, देखें मुहूर्त और पूजा विधि
Mangala Gauri Vrat 2023: इस साल सावन के बीच अधिकमास लगने से भगवान शिव के साथ माता पार्वती का आशीर्वाद पाने का सुनहरा अवसर भक्तों को प्राप्त हुआ है।
सावन का महीना शिव और पार्वती की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस वर्ष के 59 दिनों के सावन के तीन मंगला गौरी व्रत बीत चुके हैं और चौथा मंगला गौरी व्रत 25 जुलाई को है।

इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ यह व्रत करती हैं। साथ ही कई स्त्रियां संतान सुख पाने के लिए इस व्रत को करती हैं। आइए जानते हैं इस साल का चौथा मंगला गौरी व्रत कब है और इसकी पूजा विधि क्या होगी।
चौथा मंगला गौरी व्रत कब है?
सावन का चौथा और अधिकमास का दूसरा मंगला गौरी व्रत 25 जुलाई, मंगलवार को रखा जाएगा। इसके बाद अगला मंगला गौरी व्रत 1 अगस्त को पड़ेगा।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत करने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठें। स्नानादि से निवृत्त होने के पश्चात शुभ रंग वाले साफ़ वस्त्र पहनें। इसके पश्चात व्रत का संकल्प लें। अब एक चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछा लें। इस पर माता पार्वती और भोलेनाथ की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर लें। पार्वती माता को लाल रंग के वस्त्र और श्रृंगार का समाना अर्पित करें। पूरे विधि विधान से माता की पूजा करें। इस बात का ध्यान रखें कि पूजा में चढ़ाई जाने वाली वस्तुओं की संख्या को 16 में रखें। अब घी का दीपक जलाएं और माता की आरती करें। इसके पश्चात माता मंगला गौरी की व्रत कथा सुनें। मंगला माता से अपनी मनोकामना कहें और उनका आशीर्वाद मांगे।
मंगला गौरी पूजा के मंत्र
सर्वमंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरणनेताम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ।।
ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा ।।
ॐ श्री मंगला गौरी नमः।
ॐ गौरी शंकराय नमः।
ओम गौरी शंकराय नमः।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत वैवाहिक जीवन की समस्याओं और कलह को शांत करता है और सुख समृद्धि लाता है। ऐसी मान्यता है कि मंगला गौरी माता के आशीर्वाद से सूनी गोद भी भर जाती है। साथ ही पति की लंबी आयु के साथ अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। सुहागिन महिलाएं यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए इस व्रत को करती हैं।

मंगला गौरी आरती (Mangala Gauri Vrat Aarti)
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता,
ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल दाता। जय मंगला गौरी..
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता,
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय मंगला गौरी..
सिंह को वाहन साजे कुंडल है,
साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था। जय मंगला गौरी...।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय मंगला गौरी...।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता,
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता। जय मंगला गौरी...।
सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराताए,
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता। जय मंगला गौरी...।
देवन अरज करत हम चित को लाता,
गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय मंगला गौरी...।
मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता, सदा सुख संपति पाता। जय मंगला गौरी ....।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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