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G 20 Summit: कोणार्क के चक्र से भारत ने दिया G20 देशों को ये महत्वपूर्ण संदेश!
Konark Wheel in G 20 Summit: कई बार महत्वपूर्ण संदेशों को किसी भाषा के माध्यम से नहीं बल्कि प्रतीकात्मक रूप से बयाँ किया जा सकता है.ये प्रतीकात्मक रूप में समाहित सन्देश बहुत प्रभावशाली होते हैं।
ऐसा ही काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई में भारत में हो रहे G20 देशों के सम्मलेन में देखने को मिला। जिस जगह प्रधानमंत्री G20 देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत कर रहे थे उनके पीछे एक बड़े से पहिये की आकृति दिखी। इस पहिये की आकृति कोणार्क के सूर्य मंदिर से ली गयी है।

इस पहिये की G20 देशों के सम्मलेन में क्या प्रासंगिकता हो सकती है?
इस पहिये की प्रासंगिकता बताने से पहले आपको एक बात बता दें कि इसे जिस कोणार्क सूर्य मंदिर से लिया गया है उसकी स्थापत्य कला को देखते हुए रविन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था कि "कोणार्क जहां पत्थरों की भाषा मनुष्य की भाषा से श्रेष्ठतर है।" पत्थरों में तराशी इस रचना में अनगिनत संदेश हैं जो सिर्फ देखने भर से समझ आ जाते है। यह मंदिर स्थापत्य कला में भारत की उन्नति का द्योतक है। कोणार्क का सूर्य मंदिर उड़ीसा के पूरी से 35 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे राजा नरसिम्हा देव ने तेरहवी सदी में बनवाया था। इस सूर्य मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में गर्व से सम्मिलिति किया गया है। यह मंदिर 24 पहियों पर टिका है जिसमें से एक पहिये की आकृति को G20 सम्मलेन के स्वागत स्थल के पृष्ठभूमि के रूप में लगाया गया है।
यह पहिया प्रजातंत्र के निरंतर चलते रहने और उसके परिपक्व होने का सन्देश देता है। भारत विश्व के सबसे बड़े प्रजातांत्रिक देशों में से एक है और पहिये के माध्यम से प्रधानमंत्री यह सन्देश देना चाहते हैं कि हमारे यहाँ भारत में व्यक्ति प्रधान तंत्र नहीं प्रजातंत्र है और यह निरंतर परिपक्व होता जा रहा है जिसके फलस्वरूप समाज की तरक्की हो रही है और और पूरा देश आगे बढ़ रहा है।
यह पहिया भारत के प्राचीन प्रज्ञता का प्रतीक है, उन्नत सभ्यता का प्रतीक है और साथ ही कृषि की महत्ता का प्रतीक है। समाज भोजन पर निर्भर है इसके लिए कृषि को महत्व देना बहुत जरुरी है। बदलता भारत जहां एक तरफ डिजिटल होता जा रहा है, वही यहां के किसान भी कृषि में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर लाभान्वित हो रहे हैं। यह पहिया बदलते भारत की तस्वीर बयां कर रहा है।
यह घूमता पहिया समय का प्रतीक है। समय बदलता है और ऐसे ही भारत भी समय के साथ बदल रहा है। लेकिन पहिया धर्म का प्रतीक भी है और बदलते समय के साथ भारत ने अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को छोड़ा नहीं है। इस पहिये की इतनी महत्ता है और इतने सारे सन्देश छिपे हैं कि भारत ने इसे अपने राष्ट्रीय चिन्ह में भी शामिल कर लिया। तिरंगे में बीच में बना चक्र वास्तव में कोणार्क सूर्य मंदिर के इस पहिये से ही प्रेरित है।
G20 देशों के प्रतिनिधियों को भारत ने स्पष्ट सन्देश दे दिया है कि हम आगे बढ़ रहे हैं लेकिन अपनी प्राचीन विरासत को छोड़ नहीं रहे अपितु उसे और ज्यादा समृद्ध कर रहे हैं क्यूंकि हमारा मानना है "वसुधैव कुटुम्बकम", पूरा विश्व हमारा परिवार है और हम पूरे परिवार की भलाई के लिए कृतसंकल्प हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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