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Ganesh Chaturthi 2025: गणपति जी की मूर्ति घर लाने से पहले चेहरा क्यों ढकते हैं?
Why cover Ganesh idol face : गणेशोत्सव का पर्व पूरे देश में बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भक्त बप्पा को अपने घर विराजमान करते हैं और दस दिन तक पूजा, भक्ति और अर्चना के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन किया जाता है। इस पूरे आयोजन में कई परंपराएं और नियम जुड़े होते हैं, जिनका पालन भक्त विशेष रूप से करते हैं।
इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा है घर लाने से पहले गणपति जी की प्रतिमा के चेहरे को ढककर रखना। अक्सर लोग सोचते हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है। आइए जानते हैं-

धार्मिक मान्यता
गणपति जी को विघ्नहर्ता और शुभारंभ का देवता माना जाता है। मान्यता है कि जब तक गणेश जी को विधिवत पूजा के साथ आमंत्रित नहीं किया जाता, तब तक उनकी प्रतिमा को किसी को भी नहीं देखना चाहिए। यही कारण है कि प्रतिमा के चेहरे को कपड़े या पर्दे से ढक दिया जाता है।
पवित्रता और आह्वान का महत्व
घर में बप्पा की स्थापना करने से पहले उनका आह्वान और प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया होती है। माना जाता है कि इससे पहले गणपति जी की सजीवता प्रकट नहीं होती। इसलिए मूर्ति का चेहरा ढककर रखा जाता है ताकि उनकी दिव्य शक्ति विधिवत आह्वान के बाद ही प्रकट हो।
उत्सुकता और श्रद्धा का प्रतीक
गणपति जी के आगमन का भक्तों में विशेष उत्साह रहता है। चेहरे को ढककर रखने की परंपरा इस उत्सुकता और भक्ति को और बढ़ा देती है। जैसे ही स्थापना के बाद मूर्ति का चेहरा अनावरण किया जाता है, वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
नज़र और अशुद्धि से बचाव
भारतीय परंपरा में यह भी माना जाता है कि दिव्य मूर्तियों को किसी की नज़र और अशुद्ध वातावरण से बचाकर रखना चाहिए। मूर्ति का चेहरा ढककर रखना इसी मान्यता को दर्शाता है।



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