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Ganesh Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: गणेश जयंती पर इन दिव्य संस्कृत श्लोकों और संदेशों से अपनों को दें बधाई
Ganesh Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: 22 जनवरी 2026, दिन वीरवार को इस बार गणेश जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है। ये पर्व हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। इसलिए ये दिन गणेश जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। बुद्धि, सिद्धि और समृद्धि के प्रदाता भगवान श्री गणेश का जन्मोत्सव, यानी गणेश जयंती हर बार की तरह इस बार भी हमारे जीवन में नई ऊर्जा और शुभता लेकर आया है। ये अज्ञान के अंधकार को मिटाकर विवेक का प्रकाश फैलाने का दिन है।
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में जिनकी प्रथम वंदना की जाती है, उनके जन्मोत्सव पर बधाई संदेश भी खास होने चाहिए। आज के डिजिटल युग में जहां साधारण संदेशों की भरमार है, वहीं संस्कृत के श्लोक और मंत्र आपकी शुभकामनाओं को एक आध्यात्मिक गहराई और गरिमा प्रदान करते हैं। संस्कृत के इन दिव्य मंत्रों का उच्चारण न केवल मन को शांति देता है, बल्कि हमारे आसपास सकारात्मकता का संचार भी करता है।
इस लेख में हम आपके लिए लेकर आए हैं संस्कृत श्लोक और विशेष शुभकामना संदेश, जिनके माध्यम से आप अपने प्रियजनों पर बप्पा का आशीर्वाद बरसा सकते हैं। आइए, इन पवित्र शब्दों के साथ मनाते हैं विघ्नहर्ता का जन्मोत्सव।

गणेश जयंती पर दिव्य संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
(टेढ़ी सूंड वाले, विशाल शरीर वाले और करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले देव,
मेरे सभी कार्य सदा निर्विघ्न पूर्ण करें।)
गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफळसार भक्षितम्।
उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम्॥
(हाथी के मुख वाले, शोक का विनाश करने वाले
माता पार्वती के पुत्र विघ्नेश्वर के चरण कमलों में मैं प्रणाम करता हूं।)
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
(श्वेत वस्त्र धारण करने वाले, चन्द्रमा के समान रंग वाले
प्रसन्न मुख भगवान का ध्यान सभी विघ्नों को दूर करने के लिए करें।)
एकदन्तं महाकायं तप्तकाञ्चनसन्निभम्।
लम्बोदरं विशालाक्षं वन्देऽहं गणनायकम्॥
(एक दांत वाले, तपते हुए सोने जैसी कांति वाले,
विशाल शरीर और बड़े पेट वाले गणनायक की मैं वंदना करता हूँ।)
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥
(हे गौरीपुत्र, विघ्नों के स्वामी, वरदान देने वाले और
देवताओं के प्रिय, आपको बारंबार नमस्कार है।)
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुष्कामार्थसिद्धये॥
(गौरीपुत्र विनायक को सिर झुकाकर प्रणाम करें और अपनी आयु,
कामना तथा अर्थ की सिद्धि के लिए उनका स्मरण करें।)
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥
(प्रथम वक्रतुण्ड, द्वितीय एकदन्त, तृतीय कृष्णपिङ्गाक्ष
और चतुर्थ गजवक्त्र-इन नामों का स्मरण शुभ है।)
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम्॥
(पाँचवें लम्बोदर, छठे विकट,
सातवें विघ्नराज और आठवें धूम्रवर्ण गणेश की जय हो।)
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्॥
(नौवें भालचन्द्र, दसवें विनायक, ग्यारहवें गणपति और बारहवें गजानन को प्रणाम।)
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो॥
(जो इन बारह नामों का तीनों संध्याओं में पाठ करता है,
उसे कभी विघ्न का भय नहीं रहता।)
कार्यं मे सिद्धिमायातु प्रसन्ने त्वयि धातरि।
विघ्नानि नाशमायान्तु सर्वाणि गणनायक॥
(हे गणनायक! आपके प्रसन्न होने पर
मेरे कार्य सिद्ध हों और सभी विघ्नों का नाश हो।)
सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम्।
येषां हृदिस्थो भगवान् मङ्गलायतनं हरिः॥
(जिनके हृदय में भगवान गणेश स्थित हैं,
उनके साथ कभी अमंगल नहीं होता।)
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः॥
(सुमुख, एकदन्त, कपिल, गजकर्णक,
लम्बोदर, विकट-ये नाम बाधाओं का अंत करते हैं।)
विघ्नराजाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्धिप्रदायक।
मदीयं सफलं कार्यं कुरुष्व गणाधिप॥
(सर्वसिद्धि देने वाले विघ्नराज को नमस्कार, मेरे कार्य को सफल करें।)
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥
(गणेश जी के साथ सिद्धि-बुद्धि का वास हमेशा कल्याणकारी होता है।)
अगाजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम्।
अनेकदंतं भक्तानां एकदन्तमुपास्महे॥
(भक्तों को अनेक वरदान देने वाले एकदन्त गजानन की हम उपासना करते हैं।)
विनायकाय श्रेष्ठाय सर्ववन्द्याय ते नमः।
मङ्गलार्थं प्रपन्नोऽस्मि सिद्धिं मे देहि सर्वदा॥
(श्रेष्ठ और वंदनीय विनायक को नमस्कार, मुझे सदा सिद्धि प्रदान करें।)
सिन्दूरारुणवस्त्रं च सिन्दूरतिलकाञ्चितम्।
विघ्ननाशकरं देवं वन्देऽहं गणनायकम्॥
(सिन्दूरी वस्त्र और तिलक वाले विघ्नविनाशक देव की मैं वंदना करता हूँ।)

ओंकाररूपं भगवन्तं देवं विघ्नविनाशकम्।
नमामि गणनायकं सर्वकामफलप्रदम्॥
(ओंकार स्वरूप, सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाले गणनायक को मैं नमन करता हूँ।)
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतुः॥
(शक्ति स्वरूपा गणेश कृपा से ही संसार सम्मोहित और मुक्त होता है।)
गणेश जयंती पर संस्कृत शुभकामना संदेश (Wishes)
श्रीगणेशजयन्त्याः पावनपर्वणि भवते तव परिवाराय च हार्दिकाः शुभाशयाः!
विघ्नहर्ता गणेशः तव जीवनात् सर्वविघ्नान् दूरीकरोतु, सफलतां च ददातु।
भगवतः विनायकस्य अनुग्रहेण तव गृहे सुख-शान्ति-समृद्धिः सदा वर्धताम्।
सिद्धि-बुद्धि-सहितः गणेशः तव हृदये सदा वसतु। शुभा गणेश जयन्ती!
अद्य गणेशजन्मोत्सवः, तव जीवनं मङ्गलं भवतु इति मम प्रार्थना।
रिद्धि-सिद्धिप्रदाता गणेशः तव सर्वेषां मनोरथानां पूरणं करोतु।
गणाधिपतेः प्रसादेन तव व्यवसायः उन्नतिं प्राप्नोतु, स्वास्थ्यं च उत्तमं भवतु।
वक्रतुण्डस्य आशीर्वादेन तव मार्गे आगताः सर्वाः बाधाः विनश्यन्तु।
नूतन-उत्साहेन युक्तं भवतु इदं माघ-शुक्ल-चतुर्थी पर्व।
ज्ञानस्य विवेकस्य च देवता गणेशः त्वां सदा सद्बुद्धिं यच्छतु।
गणेशजयन्त्याः मङ्गलमयाः शुभाशयाः, बप्पा मोरया इति वदन्तु!
सर्वत्र मङ्गलं भवतु, गणेशस्य कृपा सदा भवति।
तव जीवने दीपावली इव प्रकाशः, गणेश इव सुखं च भवतु।
यथा गणेशः प्रथमपूज्यः अस्ति, तथैव त्वं स्वक्षेत्रे प्रथमः भव।
गणेशस्य दिव्य-आशीर्वादाः तव उपरि नित्यं भवन्तु।
विद्यार्थिनां कृते विद्यां, रोगिणां कृते स्वास्थ्यं ददातु गणेशः।
विघ्नेश्वराय नमः, तव जीवने सर्वदा आनन्दः अस्तु।
सफलतायाः द्वारं उद्घाटयतु भगवान् लम्बोदरः।
अद्य पावनं दिनं, गणेशस्य आगमनं, तव गृहं मन्दिरं भवतु।
समस्तविघ्नविनाशाय, सुखसमृद्धिहेतवे, गणेशजयन्त्याः शुभाशयाः!



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