Latest Updates
-
Yoga For Arthritis: गठिया के दर्द से हैं परेशान तो रोज करें ये 5 योगासान, जल्द ही मिलेगी राहत -
फैटी लिवर होने पर भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना झेलने पड़ेंगे गंभीर नुकसान -
March Pradosh Vrat 2026: मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
हाथ से इन 5 चीजों का गिरना है बड़े संकट का संकेत, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? -
School Holiday April 2026: छुट्टियों की भरमार! गुड फ्राइडे से आंबेडकर जयंती तक, देखें अवकाश लिस्ट -
इन 5 तरीकों से मिनटों में पहचानें असली और नकली सरसों का तेल, सेहत से न करें समझौता -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए अरबी की सब्जी, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
महिलाओं की कौन सी आंख फड़कने का क्या है मतलब? जानें बाईं और दाईं आंख के शुभ-अशुभ संकेत -
New Rules From 1 April 2026: दवाइयों से मोबाइल तक, जानें 1 अप्रैल से क्या होगा सस्ता, क्या महंगा? -
Kamada Ekadashi Upay: वैवाहिक कलह और कर्ज के बोझ से हैं परेशान? कामदा एकादशी पर करें ये 3 अचूक उपाय
Ganesh Visarjan 2025 : अनंत चतुर्दशी पर ही क्यों विदा होते हैं बप्पा? महाभारत से जुड़ा है कनेक्शन
Ganesh Visarjan 2025 : भारत में गणेश उत्सव को बड़े धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होकर यह उत्सव दस दिनों तक चलता है। 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी और इसी दिन घर-घर में गणपति बप्पा का आगमन होगा।
दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व का समापन 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी पर ही क्यों होता है और विसर्जन की परंपरा के पीछे क्या कारण है?

गणेशोत्सव का अनंत चतुर्दशी पर समापन
गणेश उत्सव में भक्त गणपति बप्पा की मूर्ति को 3, 5, 7 या 10 दिनों तक अपने घर में स्थापित करते हैं। जो भक्त पूरे दस दिनों तक बप्पा की सेवा करते हैं, वे अनंत चतुर्दशी के दिन उनका विसर्जन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गणपति विसर्जन अनंत चतुर्दशी को करने से जीवन में अनंत सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होता है।
पौराणिक कथा से जुड़ा महत्व
गणेश विसर्जन की परंपरा का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेदव्यास महाभारत की रचना करना चाहते थे। इसके लिए उन्हें एक ऐसे लेखक की आवश्यकता थी, जो उनकी कही हुई बातों को बिना रुके तुरंत लिख सके। तब भगवान गणेश ने इस कार्य को करने की सहमति दी, लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी कि वेदव्यासजी बिना रुके कथा सुनाएंगे। वहीं वेदव्यासजी ने भी शर्त रखी कि गणेशजी जब तक किसी श्लोक का अर्थ पूरी तरह न समझ लें, तब तक वे उसे नहीं लिखेंगे।
गणेशजी ने गणेश चतुर्थी के दिन लेखन कार्य आरंभ किया और लगातार दस दिनों तक बिना थके महाभारत को लिखते रहे। इस दौरान उन्होंने भोजन और विश्राम तक नहीं किया। जब कथा पूर्ण हुई तो गणेशजी अत्यधिक श्रम और तप के कारण थक गए और उनके शरीर का तापमान बहुत अधिक बढ़ गया। यह देखकर महर्षि वेदव्यास ने उन्हें शीतल जल में स्नान करने की सलाह दी। गणेशजी ने जल में डुबकी लगाकर अपने शरीर की थकान और गर्मी को दूर किया। यह दिन अनंत चतुर्दशी का था।
क्यों होता है गणेश विसर्जन
इस घटना के आधार पर ही गणेश विसर्जन की परंपरा शुरू हुई। गणेशजी के जल स्नान का प्रतीक ही आज के समय में प्रतिमा विसर्जन माना जाता है। मूर्ति को जल में विसर्जित करने का अर्थ है कि भगवान को सम्मानपूर्वक उनके लोक में विदा किया जाए, ताकि वे अगले वर्ष पुनः पधारें और भक्तों के जीवन को सुख-समृद्धि से भर दें।
आध्यात्मिक संदेश
गणेश विसर्जन हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में सब कुछ नश्वर है। जैसे मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा जल में विलीन हो जाती है, वैसे ही यह संसार भी अस्थायी है। भगवान गणेश का आगमन और विसर्जन हमें जीवन और मृत्यु के प्राकृतिक चक्र की ओर संकेत करता है। साथ ही यह परंपरा भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम, भक्ति और पुनर्मिलन की आशा का प्रतीक है।



Click it and Unblock the Notifications











