Latest Updates
-
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर इस विधि से पिएं पानी, नहीं टूटेगा आपका व्रत, मिलेगा व्रत का पूर्ण फल -
Garhwali Sweet Rice Arsa Recipe: पारंपरिक तरीके से बनाएं उत्तराखंड की खास मिठाई -
Nirjala Ekadashi Vrat In Periods: क्या पीरियड्स में निर्जला एकादशी का व्रत रख सकते हैं? जानें क्या हैं नियम -
'तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए, वापस आ जाओ', केतन की हत्या के बाद सिया गोयल ने किया ये पोस्ट, अब हो रहा वायरल -
Grandma Comfort Food Vegetable Khichdi Recipe: घर पर बनाएं दादी के हाथों जैसा स्वाद -
Padma Awards 2026: अलका याग्निक-ममूटी को मिला पद्म भूषण, रोहित शर्मा और आर माधवन भी सम्मानित -
Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: निर्जला एकादशी व्रत में जरूर करें इन नियमों का पालन, तभी मिलेगा व्रत का पूरा फल -
Special Healthy Gajar Paratha Recipe: सर्दियों के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Aaj Ka Rashifal 24 June 2026: बुधवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी बुध देव की कृपा, जानें किसे मिलेगा धन लाभ -
Fry Pan Method Fish Masala Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा चटपटा फिश मसाला
Ganga Saptami 2026 Date: गंगा सप्तमी आज, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Ganga Saptami 2026 Kab Hai: हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। पुराणों के अनुसार, इस दिन गंगा जी ने ऋषि जाह्नु के कान से पुर्नजन्म लिया था, इसलिए इसे जाह्नवी जयंती भी कहा जाता है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दी लोग गंगा स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व गए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान, पूजा और दान-पुण्य करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए, जानते हैं इस साल गंगा सप्तमी किस दिन मनाई जाएगी -

गंगा सप्तमी 2026 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 22 अप्रैल 2026, बुधवार को रात 10 बजकर 50 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 23 अप्रैल, 2026, गुरुवार को रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार गंगा सप्तमी का पर्व 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान, व्रत और पूजा-अर्चना करते हैं।
गंगा सप्तमी का महत्व
गंगा सप्तमी का विशेष धार्मिक महत्व मना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से जीवन के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह दिन पितरों की शांति और तर्पण के लिए भी यह दिन विशेष फलदाई माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु मां गंगा की विधि विधान से पूजा करते हैं, दीपदान करते हैं अपने पूर्वजों के लिए तर्पण भी करते हैं। मां गंगा की पूजा से सुख, समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
गंगा सप्तमी की पूजा विधि
गंगा सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा में स्नान करें। गंगा नदी में स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।
यदि गंगा स्नान संभव नहीं है, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
स्नान करने के बाद तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें गंगाजल मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
इसके बाद 'ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिणी नारायणी नमो नमः' मंत्र का जाप करें।
साथ ही, इस दिन जरूरतमंद लोगों को फल या अन्य वस्तुओं का दान जरूर करें। इस दिन दान करने से दोगुना फल प्राप्त होता है।



Click it and Unblock the Notifications