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Gangaur Bidai Geet Lyrics: इन गीतों के बिना अधूरा है गणगौर पर्व, यहां देखें गंवर माता के विदाई के गीत
Gangaur Bidai Geet Lyrics In Marwari : राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर में गणगौर पर्व का विशेष स्थान है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाए जाने वाले इस पर्व में सुहागिन स्त्रियां और कुंवारी कन्याएं देवी पार्वती (गणगौर) की पूजा कर अखंड सौभाग्य और अच्छे वर की कामना करती हैं। गणगौर की शोभायात्रा, सोलह श्रृंगार में सजी महिलाएं, पारंपरिक लोक नृत्य और विशेष रूप से गाए जाने वाले मारवाड़ी गीत इस पर्व को संपूर्णता प्रदान करते हैं।
गणगौर के अवसर पर विशेष गीत गाए जाते हैं, जिनमें देवी पार्वती के शिव से मिलन, उनकी सवारी और महिलाओं की मनोकामनाओं का वर्णन किया जाता है। आइए जानते हैं कुछ प्रसिद्ध गणगौर गीतों के बारे में-

गणगौर के लोकप्रिय विदाई गीत Gangaur Bidai Geet Lyrics In Marwari
1. गणगौर आई रे, गणगौर आई रे,
गणगौर आई रे, गणगौर आई रे,
म्हारा अंगना गणगौर आई रे।
ईसर आयो घोड़ी रे जीजी,
पाग पीळी पोसी जीजी।
म्हारा अंगना गणगौर आई रे,
सखी सहेलियां म्हारो मन हरखाय रे।
सोने जोड़ा, चांदी रा पटका,
ईसर ल्यायो भेंटां रे मेघो।
घुंघरू बाजे, बाजे रे ढोल,
म्हारी गणगौर री सजी सवारी रे।
म्हारा अंगना गणगौर आई रे,
हरख-हरख सब गावत बधाई रे।
यह गीत गणगौर उत्सव के स्वागत में गाया जाता है। जब महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा करने बैठती हैं, तब यह पारंपरिक गीत गाया जाता है, जिससे पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
2. गोर गोर गोमती, इसर पूजे पार्वती
म्हे पूजा आला गिला, गोर का सोना का टिका
म्हारे है कंकू का टिका
टिका दे टमका दे ,राजा रानी बरत करे
करता करता आस आयो, मास आयो
छटो छ: मास आयो, खेरो खंडो लाडू लायो
लाडू ले बीरा ने दियो , बीरा ले भावज ने दियो
भावज ले गटकायगी, चुन्दडी ओढायगी
चुन्दडी म्हारी हरी भरी, शेर सोन्या जड़ी
शेर मोतिया जड़ी, ओल झोल गेहूं सात
गोर बसे फुला के पास, म्हे बसा बाणया क पास
कीड़ी कीड़ी लो, कीड़ी थारी जात है
जात है गुजरात है, गुजरात का बाणया खाटा खूटी ताणया
गिण मिण सोला, सात कचोला इसर गोरा
गेहूं ग्यारा, म्हारो भाई ऐमल्यो खेमल्यो, लाडू ल्यो , पेडा ल्यो
जोड़ जवार ल्यो, हरी हरी दुब ल्यो, गोर माता पूज ल्यो
यह गीत गणगौर पूजन के दौरान गाया जाता है। इसमें ईसर (भगवान शिव) और गवरजा (पार्वती) के मिलन की खुशी व्यक्त की जाती है। महिलाएं इस गीत को गाते हुए मिट्टी से बनी गणगौर की प्रतिमाओं की पूजा करती हैं।
3.उमड़ घुमड़ आयो रे मेघो,
उमड़ घुमड़ आयो रे मेघो,
ईसर आयो सासरे रे मेघो।
गौर गवरजी खेलण बैठी,
इंदर बगड़ो कियो रे मेघो।
नदी नाळियां उफान भर्या रे,
ईसर आयो पालकी रे मेघो।
सोने जोड़ा, चांदी रा पटका,
ईसर ल्यायो भेंटां रे मेघो।
गौर गवरजी मायरा खावै,
सखी सहेलियां नाचै रे मेघो।
सतरंगी उड़ियो रे नीलगगन में,
ईसर ल्यायो चूनरी रे मेघो।
बाजे ढोल, नगाड़ा घणो रे,
ईसर आयो सासरे रे मेघो।
यह गीत ईसर (भगवान शिव) के मायके से ससुराल लौटने की प्रतीकात्मक यात्रा का वर्णन करता है। यह गीत गणगौर विसर्जन के समय गाया जाता है, जब महिलाएं माता गणगौर को विदाई देती हैं।
4. गणगौर माई री, दूजो सालो आसी जीजी
गणगौर माई री, दूजो सालो आसी जीजी,
साथ जीजी, गणगौर माई री, दूजो सालो आसी जीजी।
ईसर आयो घोड़ी रे जीजी,
पाग पीळी पोसी जीजी।
गणगौर माई री, दूजो सालो आसी जीजी,
साथ जीजी, गणगौर माई री, दूजो सालो आसी जीजी।
सोने रा थालिया, चांदी री रेळ,
गणगौर माई री, रोशण करे मेल।
ईसर ल्यायो झूळो जीजी,
गौर झूळे रसिया जीजी।
गणगौर माई री, दूजो सालो आसी जीजी,
साथ जीजी, गणगौर माई री, दूजो सालो आसी जीजी।
इस गीत में महिलाएं अपनी गणगौर माता से अगले वर्ष फिर से आने की प्रार्थना करती हैं। यह गीत गणगौर विसर्जन के दौरान गाया जाता है, जिससे गणगौर माता को ससुराल विदा करने की भावनात्मक झलक मिलती है।
5. ए गणगौर री माय, तू सासरिए जाजे
ए गणगौर री माय, तू सासरिए जाजे
ए गणगौर री माय, तू सासरिए जाजे,
तूं तो मायके रह मत आसी।
सासरिए जाजे, म्हारा ईसर जी रा संग,
तूं तो मायके रह मत आसी।
सोने री पालकी, चांदी रा थांभला,
ईसर ल्यायो झूळा झूळण रा।
ए गणगौर री माय, तू सासरिए जाजे,
तूं तो मायके रह मत आसी।
घोड़ा चढ़ आयो म्हारो ईसर जी,
पीलो पोसण पाग बांध आयो।
थारी सहेलियां री याद करतां,
तूं तो पधारो फेर दूजा साल।
ए गणगौर री माय, तू सासरिए जाजे,
तूं तो मायके रह मत आसी।
यह गीत गणगौर की विदाई पर गाया जाता है, जिसमें गणगौर माता से अगले साल फिर से आने का आग्रह किया जाता है।
6. बापू जी देवला गाल
बापू जी देवला गाल,
बडोड़ो बीरो बरजेलो जी बरजेलो।
थे मत दयो म्हारी बाई न गाल,
बाई म्हारी चिड़कोली जी चिड़कोली।
बाई म्हारी पीहर सूं आई,
सासरिए जासी जी जासी।
बाई म्हारी नणद रो मान,
सासु रो स्नेह जी स्नेह।
सासरिए में करसी राज,
सासु-ससुर री लाड़ली जी लाड़ली।
यह गीत विशेष रूप से राजस्थानी विवाह परंपराओं में गाया जाता है, जहाँ एक पिता को उसकी बेटी के सम्मान की याद दिलाई जाती है। इसमें यह भी बताया गया है कि बेटी पीहर से ससुराल जा रही है और उसे वहां मान-सम्मान और प्रेम मिलना चाहिए।
गणगौर विदाई का महत्व
गणगौर माता की विदाई राजस्थान में एक भावनात्मक क्षण होता है। महिलाएं गणगौर माता को अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हुए मंगल गीत गाती हैं। इस दौरान वे जलाशयों या नदी किनारे गणगौर प्रतिमाओं का विसर्जन करती हैं और गणगौर माता को पुनः अगले वर्ष आने का आमंत्रण देती हैं।
राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के मारवाड़ी समाज में गणगौर विदाई गीतों की अलग-अलग धुनें प्रचलित हैं, लेकिन भावना एक ही होती है-भक्ति और प्रेम से गणगौर माता की विदाई!



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