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Guru Ravidas Quotes : आज है संत रविदास की जयंती, जीवन की सीख सिखाते है उनके ये अनमोल दोहे
Guru Ravidas Famous Doha in Hindi : हिंदू पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह शुभ पर्व 12 फरवरी को मनाया जा रहा है। संत रविदास का जन्म वाराणसी के पास एक गांव में हुआ था। वे केवल आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि समाज में समानता और प्रेम का संदेश देने वाले महान समाज सुधारक भी थे।
इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। उन्हें गुरु रविदास, रैदास और रोहिदास के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने भक्ति मार्ग को अपनाकर समाज को प्रेम और एकता की सीख दी।

कौन थे संत रविदास?
संत शिरोमणि गुरु रविदास मध्यकाल के प्रसिद्ध कवि, संत और समाज सुधारक थे। उन्हें संत शिरोमणि की उपाधि दी गई थी और उन्होंने रविदासिया पंथ की स्थापना की। उनका जन्म 1450 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। उनका दृष्टिकोण सकारात्मक और समाज में समानता को बढ़ावा देने वाला था। गुरु रविदास का विवाह लोना देवी से हुआ था, और उनके पुत्र का नाम विजयदास था। उनके भक्ति गीतों को सिख धर्म की पवित्र पुस्तक गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है। रविदास जयंती के दिन उनके अनुयायी पवित्र नदी में स्नान करते हैं, कीर्तन और भंडारे का आयोजन करते हैं, जिससे उनके विचार और भक्ति परंपरा का प्रचार किया जा सके।
संत रविदास के अनमोल दोहे
1. "करम बंधन में बन्ध रहियो फल की ना तज्जियो आस
कर्म मानुष का धर्म है सत् भाखै रविदास।।"
अर्थ: संत रविदास के इस दोहे का अर्थ है कि मनुष्य को अपने कर्मों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करना चाहिए, बिना फल की इच्छा किए। अच्छे कर्म करना ही सच्चा धर्म है। फल की प्राप्ति भाग्य और समय पर निर्भर करती है, इसलिए परिणाम की चिंता किए बिना सत्कर्म करते रहना चाहिए। यही जीवन का सही मार्ग है।
2. सौ बरस लौं जगत मंहि जीवत रहि करू काम।
रैदास करम ही धरम है करम करहु निहकाम॥
अर्थ: संत रविदास जी का संदेश है कि चाहे जीवन सौ वर्ष का हो, हमें निरंतर कर्म करना चाहिए, क्योंकि कर्म ही सच्चा धर्म है। निष्काम भाव से कार्य करना ही सफलता की कुंजी है। उनकी यह सीख आज पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है।
3. "कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा।
वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।"
अर्थ: संत रविदास के इस दोहे का अर्थ है कि ईश्वर एक ही है, चाहे उसे कृष्ण, करीम, राम, हरि या राघव किसी भी नाम से पुकारा जाए। विभिन्न धार्मिक ग्रंथ जैसे वेद, कुरान, पुराण या अन्य किसी भी शास्त्र में ईश्वर की एकता को ही दर्शाया गया है। सभी धर्मों का मूल संदेश प्रेम, एकता और सत्य की राह पर चलना है।
4. जात पात के फेर महि, उरझि रहई सब लोग।
मानुष्ता कुं खात हई, रैदास जात कर रोग॥
अर्थ: अधिकतर लोग जात-पात के भेदभाव में उलझे रहते हैं और दूसरों को भी उलझाते हैं। यह संकीर्ण मानसिकता समाज और मानवता के लिए हानिकारक है। जब कोई जाति के आधार पर भेदभाव करता है, तो वह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का नुकसान करता है। इसी तरह, अगर कोई जात-पात के नाम पर दूसरों को भड़काता है, तो वह सामाजिक एकता को तोड़ने का कार्य करता है। हमें जाति से ऊपर उठकर प्रेम, समानता और भाईचारे की भावना अपनानी चाहिए।
5. "ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन
पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन।।"
अर्थ:किसी व्यक्ति का सम्मान केवल उसके जन्म या जाति के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसके गुण, कर्म और चरित्र को देखकर ही उसकी महिमा स्वीकार करनी चाहिए। सच्ची प्रतिष्ठा व्यक्ति के आचरण और योगदान से निर्धारित होती है, न कि उसकी सामाजिक या पारिवारिक पृष्ठभूमि से। यही वास्तविक सम्मान का आधार है।
6 कह रैदास तेरी भगति दूरि है, भाग बड़े सो पावै
तजि अभिमान मेटि आपा पर, पिपिलक हवै चुनि खावै
अर्थ: ईश्वर की भक्ति बड़े सौभाग्य से प्राप्त होती है। यदि मन में अहंकार न हो, तो जीवन सफल रहता है। जैसे विशालकाय हाथी शक्कर के दाने नहीं चुन सकता, लेकिन एक छोटी-सी चींटी आसानी से उन्हें बिन सकती है। इसी तरह, विनम्रता से भक्ति करने पर ईश्वर की कृपा मिलती है।
7. मन चंगा तो कठौती में गंगा'
अर्थ- इस कहावत के माध्यम से संत रविदास मन की शुद्धता का महत्व बताते हैं। वे कहते हैं कि यदि मन निर्मल और भक्तिभाव से पूर्ण हो, तो पवित्रता और आस्था के आगे कुछ भी असंभव नहीं। सच्ची श्रद्धा से बुलाने पर मां गंगा एक छोटी सी कठौती में भी प्रकट हो सकती हैं।
8. मन ही पूजा मन ही धूप,
मन ही सेऊं सहज स्वरूप।।
अर्थ- संत रविदास कहते हैं कि निर्मल मन में ही ईश्वर का वास होता है। यदि मन में बैर, लालच या द्वेष न हो, तो वही भगवान का मंदिर, दीपक और धूप बन जाता है। ऐसे पवित्र मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं।



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