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Hartalika Teej 2023: जानें सुहागिनों का सबसे बड़ा पर्व हरतालिका तीज कब मनाया जाएगा, नोट करें मुहूर्त
हरितालिका या हरतालिका तीज का पर्व मुख्य तौर पर महिलाएं मनाती हैं और यह पर्व भोले भंडारी शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस पोस्ट में हम आपको बताएंगे की हरितालिका तीज का क्या महत्व है, इस साल व्रत का मुहूर्त कब है और इसकी पूजा विधि क्या है?
शिव और पार्वती को समर्पित इस पर्व के दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख समृद्धि के लिए ये व्रत करती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां सुयोग्य वर के लिए व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान पानी तक नहीं पिया जाता हैं, यह निर्जला व्रत होता है और पूरे तन मन से शिव और पार्वती की पूजा आराधना में समय व्यतीत किया जाता है।

हरितालिका तीज का अर्थ क्या है?
हरतालिका तीज तीन शब्दों से बना है, पहला है हरत जिसका मतलब है हरण, दूसरा शब्द है आलिका जिसका मतलब है सहेलियां और तीसरा शब्द है तीज जिसका मतलब है तृतीय तिथि। हुआ यूं कि पार्वती माता को शिव जी पसंद थे लेकिन उनकी सहेलियों को डर था कि कहीं पार्वती के पिता पार्वती का विवाह विष्णु से ना कर दें इसलिए सहेलियां पार्वती को दूर जंगल में भगा ले गयी थीं, जहां माता पार्वती ने व्रत किया था। अंततोगत्वा माता पार्वती को उनकी इच्छानुसार वर मिला इसलिए ऐसा मानते हैं कि जो कुंवारी लड़की हरतालिका व्रत करेगी उसे भी सुयोग्य वर मिलेगा।
कब है हरितालिका तीज (Haritalika Teej 2023)
हर वर्ष हिन्दू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाया जाता है। इस बार यानी 2023 में हरितालिका तीज 18 सितंबर 2023 दिन सोमवार को है। आपको व्रत का मुहूर्त भी बता देते हैं।

18 सितंबर को हरतालिका तीज की पूजा के लिए 3 शुभ मुहूर्त हैं। सुबह 06 बजकर 07 मिनट से 08 बजकर 34 मिनट तक, 09 बजकर 11 मिनट से सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक है, दोपहर 03 बजकर 19 मिनट से शाम 07 बजकर 51 मिनट तक। इन तीनों मुहूर्त में से किसी भी मुहूर्त पर अपनी सुविधा के अनुसार पूजा की जा सकती है।
हरतालिका तीज की पूजा विधि
इस पूजा में शिव के पूरे परिवार की पूजा करना शुभ माना जाता है। माता पार्वती, शिव, गणेश और कार्तिकेय इन सबकी पूजा की जाती है ताकि सुखमय दांपत्य जीवन की प्राप्ति हो। भगवान् शिव को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है, वहीं माता पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाया जाता है। सामग्री चढ़ाने से पहले अपनी सास का चरण स्पर्श किया जाता है। विधि विधान से फूल, अक्षत, नेवैद्य, पान, कसैली, चन्दन आदि से पूजा के पश्चात व्रत कथा जरुर सुनें। रात्रि में जागरण करना शुभ होता है। सुबह में स्नान ध्यान करके आरती की जाती है, माता पार्वती को हलवा या मिष्टान का भोग लगा कर व्रत तोड़ कर पारण किया जाता है। याद रखें, हरितालिका पूजन प्रदोष काल में करना श्रेयस्कर है।
पूजा के दौरान इन मंत्रो से शिव और पार्वती का ध्यान करें:
उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रत महं करिष्ये।
एक कलश स्थापित करें जिसपर नारियल रखकर कर कलावा बाँध दें और फिर विधिवत पूजन करें। पूजन के दौरान पहले शिव की पूजा करें फिर पार्वती की। अन्य देवताओं का आह्वान करें और षोडशोपचार पूजन करें।
उसके बाद शिव जी की पूजा जी जाती हैं। तत्पश्चात माता गौरी की पूजा की जाती है। उन्हें सम्पूर्ण श्रृंगार चढ़ाया जाता हैं। इसके बाद अन्य देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन किया जाता है।
पूजा समाप्ति के बाद पारण के बाद सभी सामग्री को पवित्र नदी एवं कुण्ड में विसर्जित किया जाता हैं।

माता पार्वती की पूजा के लिए मंत्र:
ॐ उमायै नम:
ॐ पार्वत्यै नम:
ॐ जगद्धात्र्यै नम:
ॐ जगत्प्रतिष्ठयै नम:
ॐ शांतिरूपिण्यै नम:
ॐ शिवायै नम:
भगवान शिव की आराधना के लिए मंत्र:
ॐ हराय नम:
ॐ महेश्वराय नम:
ॐ शम्भवे नम:
ॐ शूलपाणये नम:
ॐ पिनाकवृषे नम:
ॐ शिवाय नम:
ॐ पशुपतये नम:
ॐ महादेवाय नम:
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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