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Hartalika Teej 2025: आप पहली बार रखने जा रही हैं तीज का व्रत? पहले जान लें क्या करें क्या न करें
Hartalika Teej 2025: हरितालिका तीज का व्रत सुहागिन और अविवाहित दोनों ही महिलाओं के लिए बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर पहली बार तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को इसकी विधि-विधान और परंपराओं के बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा से दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
यदि आप इस बार पहली बार हरितालिका तीज का व्रत रखने जा रही हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। यहां जानें वो 5 अहम बातें, जो आपके व्रत को सफल और फलदायी बनाएंगी।
कब है हरतालिका तीज?
हरतालिका तीज कब है ये भी एक कंफ्यूजन है। दरअसल, हर त्योहार की तरह हरतालिका तीज पर भी दो शुभ योग बन रहा है। बता दें कि कोई भी व्रत उदया तिथि पर रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, 25 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से हरतालिका तीज की तिथि शुरू हो रही है जो 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 26 अगस्त दिन रविवार को हरतालिका तीज मनाई जाएगी।

हरतालिका तीज का पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने निर्जल और बिना कुछ खाए घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। यह तपस्या और समर्पण का दिन ही हरितालिका तीज के रूप में मनाया जाता है। "हरितालिका" दो शब्दों से मिलकर बना है 'हरि' का अर्थ है हरण करना/छिपाना और 'आलिका' का अर्थ है सखी/सहेली। कहा जाता है कि जब माता पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से तय किया गया था, तो उनकी सहेलियां उन्हें वहां से ले जाकर जंगल में छुपा देती हैं ताकि वे भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या कर सकें। उसी घटना की स्मृति में इस व्रत का नाम हरितालिका तीज पड़ा।
हरतालिका तीज पर क्या करें
1. व्रत की तैयारी एक दिन पहले करें
तीज से एक दिन पहले महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और शुभ भोजन (सत्यनारायण प्रसाद या फलाहार) ग्रहण करती हैं। इसे निर्जला व्रत कहा जाता है, इसलिए अगले दिन तक भोजन और जल का सेवन नहीं करना होता। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं इस नियम को अच्छे से समझ लें।
2. पूजा सामग्री पूरी रखें
व्रत के दिन पूजा के लिए पूजा सामग्री पूरी रखें वरना पूजा अधूरी रह जाएगी। आप भगवान शिव और माता पार्वती की फोटो, फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, पान, सुपारी, कलश, दीपक, रोली, चावल, और मिट्टी की प्रतिमा आदि पहले से तैयार रखें। इससे पूजा के समय कोई कमी नहीं रहेगी।
3. माता पार्वती और भगवान शिव की कथा अवश्य सुनें
हरितालिका तीज पर व्रत तभी फलदायी माना जाता है जब महिलाएं व्रत कथा को सुनें या पढ़ें। कथा सुनने के बाद व्रती महिलाएं "जय पार्वती माता" और "हर हर महादेव" का स्मरण करती हैं।
4. श्रृंगार और व्रत विधि का पालन करें
इस दिन महिलाएं हरी चूड़ियां, बिंदी, मेंहदी, सिंदूर, साड़ी और आभूषण पहनती हैं। इसे सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं भी परंपरा के अनुसार श्रृंगार करें और व्रत की विधि का पालन करें।
5. मन और आस्था को पवित्र रखें
तीज का व्रत सिर्फ बाहरी परंपराओं का पालन नहीं है, बल्कि यह आस्था और समर्पण का प्रतीक है। व्रत के दौरान क्रोध, नकारात्मक सोच या गलत विचारों से बचें और पूरे मन से माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करें।
हरतालिका तीज में क्या न करें
भोजन और जल का सेवन न करें
यह निर्जला व्रत होता है, इसलिए व्रती को खाने-पीने से परहेज करना चाहिए।
झगड़ा या कटु वचन न बोलें
इस दिन क्रोध, झगड़ा या अपशब्द बोलना शुभ नहीं माना जाता।
काले और नीले कपड़े न पहनें
व्रत के दिन केवल लाल, पीले, हरे जैसे शुभ रंग पहनें।
झूठ और छल से बचें
इस दिन असत्य बोलना और किसी को धोखा देना अशुभ माना जाता है।
किसी भी जीव-जंतु को कष्ट न दें
विशेषकर गाय, बिल्ली और कुत्ते को न मारें और न ही भगाएं।
सोना या आराम न करें
व्रती महिलाओं को पूरी रात जागरण करके शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए।
भूलकर भी नशा या मांसाहार का सेवन न करें
यह व्रत पूरी तरह सात्विकता का प्रतीक है ऐसे में व्रत के दिन नशा न करें और मांसाहारी भोजन का सेवन न करें।
शिव-पार्वती की पूजा अधूरी न छोड़ें
बिना कथा और पूजा पूरी किए व्रत का समापन न करें। माना जाता है कि बिना व्रत कथा के ये व्रत अधूरा माना जाता है।



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