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Hartalika Teej Vrat Vidhi: कैसे किया जाता है हरतालिका तीज का व्रत, सामग्री से लेकर देखें पूरी विधि
Hartalika Teej Vrat Vidhi in Hindi: हरतालिका तीज एक महत्वपूर्ण भारतीय त्यौहार है, जो भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त गौरी-शंकर की पूजा करते हैं। यह व्रत हस्त नक्षत्र के दौरान मनाया जाता है और यह केवल अविवाहित लड़कियों और विवाहित महिलाओं के लिए है। पौराणिक शास्त्रों में विधवा महिलाओं को भी यह व्रत रखने की अनुमति दी गई है।
'हरतालिका' शब्द की उत्पत्ति एक मिथक से हुई है, जिसमें पार्वती की सहेली ने उनकी इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह रोकने के लिए उन्हें जंगल में ले जाया था। 'हरत' का अर्थ है अपहरण करना, और 'आलिका' का अर्थ है मित्र या साथी। इस त्यौहार का गहरा सांस्कृतिक महत्व है और इसमें पूजा के लिए विभिन्न अनुष्ठान और सामग्री शामिल होती है।

हरतालिका तीज पूजन सामग्री (Hartalika Teej Puja Samagri)
हरतालिका पूजन के लिए आपको गीली काली मिट्टी या बालू, बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल और फूल, आकंव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनेऊ, नाड़ा, वस्त्र, सभी प्रकार के फल और फूल-पत्तियों की आवश्यकता होती है। साथ ही प्राकृतिक फूलों से सजा हुआ फुलहारा भी इस्तेमाल किया जाता है।
पार्वती मां के लिए बाजार में उपलब्ध वस्तुओं में मेहंदी, चूड़ियाँ, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिन्दूर, कंघी, माहोर और सुहाग पूड़ा शामिल हैं। अन्य आवश्यक वस्तुएं हैं श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन घी-तेल कपूर कुमकुम दीपक घी दही चीनी दूध शहद पंचामृत के लिए।
हरतालिका तीज पूजा समय (Hartalika Teej 2024 Puja Timings)
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 5 सितंबर को दोपहर 12:21 बजे से शुरू होगी। यह तिथि 6 सितंबर को दोपहर 3:21 बजे समाप्त होगी। इसलिए हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:02 बजे से 8:33 बजे तक है।
हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej Vrat Ki Puja Vidhi)
'उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये' मंत्र का संकल्प लेकर आरंभ करें। अपने घर के मंदिर को मंडप के समान सजाएँ और सभी पूजा सामग्री एकत्र करें। पूजा प्रदोष काल में की जाती है। जब दिन और रात का मिलन होता है तब वह समय तीज पूजा के लिए उत्तम माना जाता है।
शाम को स्नान करके स्वच्छ नए कपड़े पहनें। संभव हो तो सोने से पार्वती और शिव की मूर्तियाँ बनाएँ, अन्यथा मिट्टी से। इन मूर्तियों की पूजा विधि-विधान से करें। आप हाथ से बालू या काली मिट्टी से भी शिव-पार्वती और गणेशजी की मूर्तियाँ बना सकते हैं।
भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्तियों को एक आसन पर स्थापित करें। प्रसाद के रूप में फल, फूल, मिठाई, माला, दूर्वा घास और बेलपत्र चढ़ाएँ। देवताओं के सामने धूपबत्ती और दीप जलाएँ।
देवी पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। सच्चे मन से आरती करें और मंत्रों का जाप करें। अनुष्ठान के दौरान हरतालिका तीज व्रत कथा पढ़ें।
अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें और सुख-शांति की कामना करें। भगवान शिव को खीर, फल, मिठाई और अन्य चीजें अर्पित करें।
हरतालिका तीज निर्जला किया जाता है। इस व्रत में रात में सोने की मनाही है इसलिए रात्रि जागरण करें। अगले दिन सुबह स्नान कर शिव पार्वती का पूजन करें और व्रत का पारण करें। पूजा के समय भगवान शिव और माता पार्वती से किसी भी तरह की भूल चूक के लिए माफ़ी जरूर मांगे।
यह त्यौहार न केवल सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करता है बल्कि परिवारों को भक्ति के साथ जोड़ता भी है। माना जाता है कि हरतालिका तीज को समर्पण के साथ मनाने से वैवाहिक सुख और समृद्धि के लिए गौरी-शंकर का आशीर्वाद मिलता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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