भगवान और उनकी प्रमुख सवारियां

पशु और पक्षियों को हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली है। पशुओं का प्रतिनिधित्व भगवान गणेश और हनुमान करते हैं। हिंदु धर्म के लोग गाय की पूजा इसलिये करते हैं क्‍योंकि वे उसे माता के रूप में देखते हैं। गाय को अदिती भी बोला जाता है जिसका मतलब होता है, भगवानों की मां। इसलिये गाय बहुत पूज्‍य है और घर घर में इसकी पूजा की जाती है। अगर आप साउथ इंडिया गए होंगे तो आपने हर म‍ंदिर में गडे़ खंभो पर नक्‍काशी देखी होगी जिस पर पशु-पक्षियों के चित्र इंगित हुए होंगे।

आपने देखा भी होगा कि कई तरह के पशु-पक्षी भगवान के वाहन के रूप में कार्य करते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि ये पशु-पक्षी केवल भगवान को ले जाने और लाने का काम भर करते हैं मगर इनके पीछे कुछ महत्‍व भी है, जिसका यह प्रतीक होते हैं। अइये जानते हैं कि हिंदू धर्म के हिसाब से कौन से भगवान की कौन सी सवारी है जो, कि पशु या पक्षी में से एक है।

 चूहा

चूहा

चूहा सर कहें मूषक , भगवान गणेश की सवारी है। शिवपुराण में लिखा है कि गणेश ने चूहे पर सवार होकर ही अपने माता-पिता की परिक्रमा की। भगवान गणेश का वाहन चूहा होने के बारे में अलग-अलग विचार मिलते हैं।

बैल

बैल

शिव भगवान की सवारी एक बैल है जिसका नाम नन्‍दी है। भारत के कई मंदियों के सामने नंदी की मूर्ती आपको देखने को मिल जाएगी ।

शेर

शेर

दुर्गा जी की सवारी शेर है। शेर बेदर्दी, क्रोध और गर्व का प्रतीक है। दुर्गा जी हर बुराइयों का नाश करती हैं जिसमें शेर उनकी मदद करता है।

मोर

मोर

सरसवती जी की सवारी मोर होता है। यह अपने सुंदरता के लिये जाना जाता है। सरसवती जी हमें यह सिखाती हैं कि हमें केवल बाहरी सुंदरता पर ध्‍यान ना दे कर अंदर की भी खूबसूरती पर भी गौर करना चाहिये। और मोर इसी का प्रतीक है।

उल्‍लू

उल्‍लू

यह पक्षी माता लक्ष्‍मी की सवारी है।

हंस

हंस

भगवान ब्रहंमा की सवारी हंस है जिसे बोला जाता है कि इसके अंदर दूध और पानी को अलग करने की शक्‍ति है। यह पक्षी ज्ञान और भेदभाव का प्रतीक है।

 गरुड़

गरुड़

गरुड़ सभी पक्षियों का स्वामी है। गरुड़ बाधाओं और रास्‍ते में आने वाले दुश्मनों को हटाने के लिये जाना जाता है। इसने एक बार चांद को चुरा कर छुपा दिया था, जिससे सभी देवताओं ने इस पर हमला कर दिया। वह विष्णु को छोड़कर बाकी सभी देवताओं से लड़ बैठा और अब वह विष्‍णु की सेवा करता है।

हाथी

हाथी

यह विषाल हाथी भगवान इंद्र का वाहन है जो, कि विश्वसनीयता, गरिमा, शक्ति और गर्व का प्रतीक है।

मगरमछ

मगरमछ

भगवान वरुण, एक मगरमच्छ पर सवारी करते हैं। मगरमच्छ गरिमा, शक्ति, गति, ताकत, चतुराई और बहादुरी का प्रतीक है।

घोड़ा

घोड़ा

सूरज देवता को नौ ग्रहों का राजा माना जाता है जो, कि अपने सात घोडों पर बैठ कर इन नौ ग्रहों के चक्‍कर काटते हैं। रात घोडों का मतलब है इंद्रधनुष के सात रंग।

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