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शीतला अष्टमी पर महिलाएं पीरियड्स में व्रत कर सकती हैं या नहीं, यहां जानें नियम
शीतला माता अष्टमी व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन माता शीतला की पूजा कर रोगों से बचाव और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। लेकिन अगर किसी महिला के पीरियड्स चल रहे हैं, तो वह इस व्रत को कैसे कर सकती है? इस पर कई लोगों की अलग-अलग मान्यताएं हैं।

क्या करें?
मानसिक रूप से व्रत रखें - अगर आप शारीरिक रूप से पूजा करने में असमर्थ हैं, तो मन से शीतला माता का ध्यान करें और श्रद्धा बनाए रखें।
किसी और से पूजा कराएं - परिवार के किसी अन्य सदस्य, जैसे माता, बहन, या पति से पूजा करवा सकती हैं।
स्वच्छता बनाए रखें - पीरियड्स के दौरान विशेष रूप से स्वच्छता का ध्यान रखें और जरूरत महसूस हो तो स्नान कर सकती हैं।
हाथ जोड़कर प्रार्थना करें - अगर प्रतिमा को न छू सकें, तो दूर से ही हाथ जोड़कर माता का स्मरण करें।
नियमों का पालन करें - जो भी नियम पालन कर सकती हैं, उतना करें। अगर संभव न हो, तो अगले दिन पूजा कर लें।
क्या न करें?
मूर्ति को न छुएं - कई परंपराओं में माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान मूर्ति या पूजा के स्थान को न छूना चाहिए।
व्रत जबरदस्ती न करें - अगर तबीयत ठीक न हो, तो खुद को कष्ट न दें और फलाहार ले सकती हैं।
पूजा सामग्री न छेड़ें - अगर परिवार के अन्य लोग पूजा कर रहे हैं, तो पूजा की वस्तुओं को न छुएं।
पीरियड्स के दौरान भी श्रद्धा और आस्था के साथ व्रत रखा जा सकता है। माता शीतला केवल भक्ति की भावना देखती हैं, न कि रीति-रिवाजों की सीमाएं।
शीतलाष्टमी या बसौड़ा की तिथि
शीतला सप्तमी और अष्टमी पर्व चैत्र माह में मनाया जाता है। इसे शीतलाष्टमी या बसौड़ा भी कहते हैं। इस दिन बासी भोजन का भोग लगाकर माता को प्रसन्न किया जाता है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 22 मार्च को सुबह 4:23 बजे से 23 मार्च को 5:23 बजे तक रहेगी।



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