Hussaini Shayari in Hindi: शहादत-ए-हुसैन की याद में अपनों को भेजें ये दर्द भरी हुसैनी शायरी

10 muharram shayari : मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है, लेकिन यह शुरुआत खुशी की नहीं, बलिदान और सब्र की याद दिलाने वाली होती है। यह वह महीना है जब इमाम हुसैन, इस्लाम के पैगंबर हज़रत मोहम्मद (स.अ.) के नवासे, ज़ुल्म के खिलाफ डटकर खड़े हुए और कर्बला के मैदान में शहादत पाई। इस बलिदान की याद में लोग मुहर्रम के महीने में मजलिसें करते हैं, मातम करते हैं और शायरी के ज़रिए अपने जज़्बात बयां करते हैं।

जब दिल ग़मगीन हो, और अल्फ़ाज़ कम पड़ जाएं, तब शायरी ही होती है जो दिल की आवाज़ बनती है। हुसैनी शायरी न सिर्फ एक साहित्यिक शैली है, बल्कि एक एहसास है, हक़ के लिए दी गई कुर्बानी, सब्र की मिसाल और इंसाफ़ के लिए डटी रही एक पाक रूह।

यहां हम आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं कुछ चुनिंदा 10 मुहर्रम शायरी, जो आप सोशल मीडिया पर साझा कर सकते हैं या मजलिस में पढ़ सकते हैं:

10 muharram shayari

दर्द, वफ़ा और जंग-ए-हक़ शायरी (10 muharram shayari)

यहां प्रस्तुत हैं 10 muharram shayari जो आप अपने सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं या किसी मजलिस में पढ़ सकते हैं।

1. "कफ़न में लिपटी एक चुप्पी, सन्नाटे में गूंजती रही, करबला की सरज़मीं पर हुसैन की तक़दीर बोलती रही।"

2. "न बोली कोई तलवार, न उठी कोई आवाज़, फिर भी हुसैन ने जिता दी इमां की बात।"

3. "नहरें बंद थीं, मगर हौसला समुंदर सा था, हुसैन तेरा सब्र, आज भी लफ़्ज़ों से बड़ा है।"

4. "शहीदों की तहरीर मुहब्बत से लबरेज़ है, करबला का हर कतरा इमाम का पैग़ाम है।"

5. "जिसने मौत को गले लगाया सिर्फ़ हक़ की खातिर, हुसैन का नाम हर दिल की आवाज़ है।"

6. "साजिशें और तलवारें थीं, फौजें भी बेइंतहां थीं, मगर हुसैन अकेले थे-और फिर भी हारा यज़ीद।"

7. "रुख़ हवा का बदल गया था, लेकिन इरादा नहीं, मुहर्रम ने दिखा दिया क्या होता है सब्र।"

8. "लिखा जो लहू से इमाम ने इंकलाब, वो क़लम आज भी चलती है शायरी के जवाब।"

9. "बेटे, भाई, और दोस्त-all कुर्बान कर दिए, जब भी देखो शहादत की मिसाल, हुसैन याद आते हैं।"

10. "ख़ामोशियाँ बोल उठीं थीं उस मैदान में, ये मुहर्रम है साहब, यहां हर कतरा शहादत की दास्तां है।"

11. कर्बला की शहादत इस्लाम बना गयी, खून तो बहा था
लेकिन कुर्बानी हौसलों की उड़ान दिखा गयी।

12. कर्बला की कहानी में कत्लेआम था लेकिन हौसलों के आगे हर कोई गुलाम था,
खुदा के बन्दे ने शहीद की कुर्बानी दी इसलिए उसका नाम पैगाम बना।

13. क्या जलवा कर्बला में दिखाया हुसैन ने, सजदे में जा कर सर कटाया हुसैन ने,
नेजे पे सिर था और जुबां पर अय्यातें, कुरान इस तरह सुनाया हुसैन ने।

14. गुरूर टूट गया कोई मर्तबा ना मिला, सितम के बाद भी कुछ हासिल जफा ना मिला,
सिर-ऐ-हुसैन मिला है यजीद को लेकिन शिकस्त यह है की फिर भी झुका हुआ ना मिला।

Hussaini Shayari in Hind

Hussain Zindabad Shayari quotes (Hussaini Shayari in Hindi)

1. जन्नत की आरजू में कहा जा रहे है लोग, जन्नत तो कर्बला में खरीदी हुसैन ने,
दुनिया-ओ-आखरत में रहना हो चैन सूकून से तो जीना अली से सीखे और मरना हुसैन से।

2. करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने, ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने,
लहू जो बह गया कर्बला में, उनके मकसद को समझा तो कोई बात बने।

3. सिर गैर के आगे न झुकाने वाला और नेजे पर भी कुरान सुनाने वाला, इस्लाम से क्या पूछते हो कौन है हुसैन,
हुसैन है इस्लाम को इस्लाम बनाने वाला।

Imam Hussain Shayari in Hindi

1. सबा भी जो गुजरे कर्बला से तो उसे कहता है अर्थ वाला,
तू धीरे गूजर यहाँ मेरा हुसैन सो रहा है।

2. ना जाने क्यों मेरी आँखों में आ गए आँसू,
सिखा रहा था मैं बच्चे को कर्बला लिखना।

3. पानी का तलब हो तो एक काम किया कर, कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर,
दी मुझको हुसैन इब्न अली ने ये नसीहत, जालिम हो मुकाबिल तो मेरा नाम लिया कर।

Hussaini Shayari in Hindi

इमाम हुसैन शायरी इन हिंदी

1. वो जिसने अपने नाना का वादा वफा कर दिया, घर का घर सुपुर्द-ए-खुदा कर दिया,
नोश कर लिया जिसने शहादत का जाम, उस हुसैन इब्न अली को लाखों सलाम।

2. खून से चराग-ए-दीन जलाया हुसैन ने, रस्म-ए-वफ़ा को खूब निभाया हुसैन ने,
खुद को तो एक बूँद न मिल सका लेकिन करबला को खून पिलाया हुसैन ने।


कर्बला की शायरी (Karbala Shayari)

1. दश्त-ए-बाला को अर्श का जीना बना दिया, जंगल को मुहम्मद का मदीना बना दिया।
हर जर्रे को नजफ का नगीना बना दिया, हुसैन तुमने मरने को जीना बना दिया।

2. न हिला पाया वो रब की मैहर को, भले ही जीत गया वो कायर जंग,
पर जो मौला के डर पर बैखोफ शहीद हुआ, वही था असली और सच्चा पैगंबर।

3. आँखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे, ताबीर में इमाम का जलवा तो दिखायी दे,
ए इब्न-ऐ-मुर्तजा सूरज भी एक छोटा सा जरा दिखायी दे।

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