Jagannath Rath Yatra:भाई बहनों के साथ गुंडिचा मंदिर पहुंचे जगन्नाथ, जानें मौसी के घर कैसे बिताते हैं छुट्टियां

भगवान विष्णु के ही रूप हैं श्री जगन्नाथ और इनका ये रूप लोगों को बहुत भाता है। इसका प्रमाण है हर साल ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली भव्य जगन्नाथ यात्रा। इस दौरान हजारों की तादाद में भक्त पुरी पहुंचते हैं और जगन्नाथ जी के मनोरम रूप के दर्शन करते हैं।

माना जाता है कि जिस व्यक्ति को रथ यात्रा में शामिल होने और रस्सी खींचने का सौभाग्य मिलता है वो जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं, उसे सौ यज्ञों के समान पुण्य मिलता है।

know how lord jagannath spent his stay at gundicha temple her aunts place.

बच्चों की तरह भगवान भी जाते हैं मौसी के घर

गर्मी की छुट्टियां आते ही जिस तरह बच्चों में उत्सुकता रहती है, उसी तरह के भाव भगवान जगन्नाथ जी, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा के भी होते हैं। अगर ये कहा जाए कि इस यात्रा को लेकर भगवान जगन्नाथ जी का बचपन लौट आता है तो शायद गलत नहीं होगा। कई महीनों पहले ही उनकी इस यात्रा की तयारी शुरू हो जाता है।

ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर तीनों भाई-बहनों को पूरे विधि विधान से स्नान कराया जाता है। जिसके बाद ठंड लगने से वो बीमार भी हो जाते हैं। कुछ दिन तक दवाएं चलती हैं और आराम करते हैं। जब वो पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं तब निकलते हैं अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर।

know how lord jagannath spent his stay at gundicha temple her aunts place.

रथ यात्रा के आयोजन के पीछे है एक प्यारी सी वजह

भगवान जगनाथ एक बहुत ही अच्छे भाई हैं, इसका प्रमाण भी इस रथ यात्रा से मिल जाता है। प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार देवी सुभद्रा ने अपने भाईयों के समक्ष नगर भ्रमण की इच्छा रखी। छोटी बहन सुभद्रा का बस यह कहना था कि उधर जगन्नाथ जी और बलराम जी दोनों भाईयों ने शाही इंतजाम करवा दिए और अपनी बहन को घुमाने ले गए।

यह परंपरा आज भी बड़े ही शानदार ढंग से निभायी जा रही है। सभी भक्त अपने प्यारे देवी और देवताओं की यात्रा का इंतजाम बड़ी श्रद्धा से करते हैं। भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है।

know how lord jagannath spent his stay at gundicha temple her aunts place.

मौसी के घर पहुंचकर करते हैं ये काम

हम में से आज भी कई लोग हैं जो अपनी छुट्टियां ननिहाल में बिताना पसंद करते हैं। इस दौरान रोजमर्रा के कामों से फुरसत पाकर सुकून के पल तलाशते हैं। भगवान जगन्नाथ भी अपनी मौसी के घर पहुंचकर बहुत खुश हो जाते हैं।

इस दौरान उन्हें तरह तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है ताकि वो और स्वस्थ होकर वापस जा सकें। इस दौरान वो बाग़-बगीचों में घूमते हैं और अपने भाई बलराम तथा बहन सुभद्रा के साथ समय बिताते हैं। मौसी के घर वो आराम करके अपनी थकान मिटाते हैं।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Desktop Bottom Promotion