Latest Updates
-
कहीं आप भी तो नहीं पी रहे डिटर्जेंट वाला दूध? FSSAI के बताए इस सिंपल टेस्ट से मिनटों में करें चेक -
Indira Ekadashi 2026: 5 या 6 अक्टूबर, कब है इंदिरा एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
DHT: क्या है डायरेक्ट हेयर ट्रांसप्लांटेशन? जानें बालों की रिग्रोथ के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक -
Captain Smit Machchhar: कैप्टन 'स्मित मच्छर' के सरनेम का क्या है मतलब? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी -
नुसरत भरूचा की रीढ़ की हड्डी में हुआ फ्रैक्चर, एयरलिफ्ट कर बाली से लाई गईं मुंबई, वीडियो देख फैंस हुए परेशान -
Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जानें जरूरी नियम और पारण का समय -
Jitiya Vrat Katha: जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत में जरूर करें इस कथा का पाठ, पूरे साल सुरक्षित रहेगी संतान -
Jitiya Vrat 2026 Wishes: संतान की लंबी उम्र...जितिया व्रत के अवसर पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Lal Bahadur Shastri Jayanti 2026: क्या आप जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री का असली नाम? जानें 10 रोचक तथ्य -
Gandhi Jayanti 2026: गांधी जी को 'बापू' क्यों कहा जाता है? जानें किसने दी थी 'महात्मा' की उपाधि
Jumma Namaz Ki Rakat Aur Tarika: जुम्मे की नमाज़ में होती है कितनी रकात, जानें दुआ का तरीका
Jumma Namaz Ki Rakat Aur Namaz Ka Tarika: इस्लाम में जुम्मा यानी शुक्रवार को बहुत महत्वपूर्ण और विशेष माना जाता है। इस दिन नमाज पढ़ना बहुत जरूरी माना जाता है। आमतौर पर जुमे की नमाज मस्जिद में पढ़ी जाती है।
जुम्मा की नमाज में कितनी रकात है? (Jumma Ki Namaz Ki Rakat)
जुम्मा की नमाज में कुल 14 रकात होती हैं। इसमें सबसे पहले 4 रकात सुन्नत, फिर 2 रकात इमाम के पीछे फर्ज नमाज अदा की जाती है। इसके बाद 4 रकात सुन्नत की रकातें होती हैं। फिर 2 रकात सुन्नत फिर आखिर में 2 रकात नफ्ल नमाज अदा की जाती है।

जुम्मा की 14 रकातों की डिटेल्स (Jumma Ki Namaz Ki 14 Rakat Details in Hindi)
1. 4 रकात सुन्नत: जुम्मा की नमाज़ में सबसे पहले 4 रकात सुन्नत नमाज़ पढ़ी जाती है। यह नमाज़ मस्जिद में तन्हा यानि अकेले पढ़ी जाती है।
2. 2 रकात फ़र्ज़: इसके बाद 2 रकातें फ़र्ज़ होती हैं। यह इमाम के पीछे समूह में यानी जमात के साथ अदा करनी होती हैं।
3. 4 रकात सुन्नत: जुमा फ़र्ज़ नमाज़ के बाद फिर 4 रकात सुन्नत की रकातें होती हैं। इसे इमाम के साथ अदा नहीं की जाती है। इस नमाज़ को अकेले मस्जिद में अदा की जाती है।
4. 2 रकात सुन्नत: चार रकात सुन्नत की नमाज़ पढ़ने के बाद 2 सुन्नत रकातें की जाती हैं।
5. 2 रकात नफिल: जुम्मा की नमाज़ में 2 नफिल रकातें होती हैं, जो कि नफ्ल होती हैं। इसे भी अकेले ही अदा की जाती हैं।

जुम्मा की नमाज की पूरी रकात यह है
सबसे पहले वक्त होने पर 2 रकात दाखिल मस्जिद की नमाज अदा करें।
इसके बाद 4 रकात की सुन्नत मुअक्कदा की नमाज जुम्मा में अदा करें।
फिर आपको 2 रकात की फर्ज नमाज इमाम साहब के पीछे अदा करें।
इसके बाद शहरों में 4 रकात की सुन्नत नमाज अकेले में खुद से पढ़ें।
अगर आप छोटे कस्बों में नमाज ए जुम्मा अदा कर रहे हैं तो वहां आपको इमाम के साथ 4 रकात की जुहर की फर्ज पढ़ाया जाता है।
इसके बाद 2 रकात सुन्नत अकेले में खुद से पढ़ा जाता है फिर आखिर में 2 रकात नफ्ल नमाज अदा की जाती है।
जुम्मा की नमाज़ का समय (Jumma Ki Namaz Kab Padhi Jati Hai)
जुम्मा की नमाज़ के लिए समय निर्धारित रहता है। हर हफ्ते के शुक्रवार यानी जुमा को इसकी नमाज अदा की जाती है। यह नमाज़ दोपहर के वक्त में अदा की जाती है, जब सूर्य की ऊंचाई अपने चरम पर होती है। आमतौर पर, जुम्मा की नमाज़ दोपहर 12:30 बजे से लेकर 2:00 बजे तक पढ़ी जाती है। हालांकि स्थानीय मस्जिदों और इमामों के निर्देशों के अनुसार समय बदला जा सकता है।
क्या औरतें जुमे की नमाज पढ़ सकती है? (Kya Aurat Jumma Ki Namaz Padh Sakti Hai?)
हदीस शरीफ से पता चलता है कि जुमे की नमाज पांच लोगो पर फर्ज नहीं है, और वो हैं गुलाम, मुसाफिर, बच्चा, औरत और बीमार आदमी। इससे साफ़ होता है कि हदीस के मुताबिक़ औरत जुमा की नमाज पढ़ना चाहे तो पढ़ सकती है लेकिन जुमा की नमाज बगैर खुतबा/इमाम के मुकम्मल नहीं होती है। जुम्मा की नमाज केवल मस्जिद में पढ़ी जा सकती है इसलिए औरत को भी जुमा की नमाज पढने के लिए मस्जिद जाना होगा।
जुमे की नमाज़ औरत कैसे पढ़े? (Aurat Jumme Ki Namaz Kaise Padhe?)
जुमे की नमाज मस्जिद में पढ़ी जाती है। औरतों को भी जुमे की नमाज के लिए मस्जिद जाना होगा। यदि किसी मस्जिद में परदे का इंतजाम है और महिलाओं के नमाज पढ़ने के लिए ख़ास इंतजाम हैं तो वो जुमे की नमाज वहां जाकर पढ़ सकती हैं। जुमा की नमाज इमाम की मौजूदगी में औरत भी पढ़ सकती है। जुमा की नमाज औरत पढ़ना चाहे तो पढ़ सकती है लेकिन जो हदीस में बताया गया उसके मुताबिक़ अगर इन्तेजाम हो तो ही नमाज पढ़ी जा सकती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
