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Karwa Chauth 2023: क्यों कुंवारी कन्या से ही कराया जाता है करवाचौथ कथा का पाठ?
Karwa Chauth 2023: करवाचौथ का पर्व भारत में सुहागन महिलाओं द्वारा रखे जाने वाला सबसे प्रचलित व्रत है। ये उपवास वे अपने जीवनसाथी की लम्बी आयु के लिए रखती हैं। इस ख़ास दिन महिलायें पूरा दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत की सफलता करवा चौथ व्रत कथा को सुनकर ही पूरी होती है।
इस वर्ष 1 नवंबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। उत्तर भारत विशेष कर पंजाब, हिमाचल, दिल्ली, हरियाणा के क्षेत्रों में अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन किया जाता है। इस दिन सुहागन महिलाओं के लिए व्रत की कथा एक कुंवारी लड़की द्वारा ही पढ़ी जाती है। जानते हैं क्या हैं इसके कारण और क्या होता है इसका धार्मिक महत्व -

करवा चौथ व्रत में मां पार्वती का महत्व
माता पार्वती को प्रथम सुहागन का दर्जा दिया गया है। इस कारण करवा चौथ के दिन मां पार्वती की ही अराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता अनुसार श्री कृष्ण के कहने पर महाभारत युद्ध में पांडवों के प्राणों की रक्षा के लिए द्रौपदी ने भी इसी व्रत को रखा था और पांडवों को दीर्घायु की प्राप्ति हुई।

क्यों करती हैं कुंवारी लड़कियां कथा का वाचन?
धार्मिक शास्त्रों में कुंवारी कन्या को माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है। इसके पीछे का कारण यह है कि कुंवारी अवस्था में कन्या का मन और शरीर सबसे पवित्र होता है और इस समय उनके द्वारा किये गये हर धार्मिक कार्य सफ़ल होते हैं। इसलिए कन्या पूजन को भी श्रेष्ठ धार्मिक कार्य माना गया है। कुंवारी कन्या से करवा चौथ की कथा पढ़वाने से साक्षात माता पार्वती का आर्शीवाद सुहागनों को मिलता हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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