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Magh Purnima 2025 Date: माघ पूर्णिमा का व्रत आज है या कल? स्नान-दान और शुभ मुहूर्त जान लें
Magha Purnima Vrat 2025 : पूर्णिमा का व्रत सभी शास्त्रों में शुभ माना गया है और प्रत्येक माह इसका अलग फल मिलता है। इस बार माघ पूर्णिमा व्रत को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि यह 11 या 12 फरवरी को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा तिथि 11 फरवरी को रात 08:37 बजे से प्रारंभ होकर 12 फरवरी को रात 10:23 बजे तक रहेगी।
ऐसे में माघ पूर्णिमा व्रत 12 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 05:54 बजे रहेगा। इस दिन कुंभ संक्रांति और गुरु रविदास जयंती भी है।

कब करें पूर्णिमा का स्नान
वैदेही पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा का व्रत 11 फरवरी को शाम 6:41 बजे से प्रारंभ होकर 12 फरवरी को शाम 6:53 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि होने पर ही व्रत किया जाता है। इस साल 12 फरवरी को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि आ रही है, इसलिए 12 फरवरी को सूर्योस्त के समय चंद्रदेव को अर्घ देना और व्रत करना उत्तम रहेगा। इसके साथ ही पूर्णिमा स्नान और दान भी 12 फरवरी को ही किया जाएगा।
माघ पूर्णिमा चंद्रोदय का समय
12 फरवरी को माघ पूर्णिमा का चंद्रोदय शाम 6 बजे होगा, जबकि पूर्णिमा तिथि 6:53 बजे तक रहेगी। ऐसे में 6 बजे से 6:53 बजे के बीच चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ समय रहेगा। इस दौरान स्नान, दान और व्रत का विशेष महत्व होगा।
पूजा विधि
माघ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। एक लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर कलावा बांधें। भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक कर उन्हें वस्त्र अर्पित करें और तिलक करें। पूजा में पंचामृत, कसार, केले आदि का प्रसाद अर्पित करें और पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान की आरती कर पूजा संपन्न करें।
माघ पूर्णिमा पर होगा कल्पवास का आखिरी दिन
माघ पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मकर संक्रांति की तरह कुंभ संक्रांति पर भी तिल दान अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि कुंभ शनि की राशि है और इस दौरान सूर्य व शनि की युति विशेष फलदायी होती है। इस दिन संगम पर कल्पवास का अंतिम दिन होता है, जहां पूरे महीने की तपस्या के बाद श्रद्धालु माघ पूर्णिमा के शाही स्नान के साथ कल्पवास पूर्ण करते हैं। इस अवसर पर गंगा-यमुना के तट पर दान, स्नान और पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है।



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