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महाकुंभ से विदा ले रहे नागा साधु, लौटने से पहले खाते हैं कढ़ी-पकौड़े, जानें इसकी वजह
महाकुंभ के समापन 26 फरवरी को होगा। नागा साधुओं के तीनों अमृत स्नान पूरे हो चुके हैं, जिसके बाद वे अखाड़ों में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। अब कुछ अखाड़ों के नागा साधु प्रस्थान करेंगे, जबकि अन्य 12 फरवरी से निकलेंगे। कुछ अखाड़े बसंत पंचमी स्नान के बाद ही रवाना हो चुके हैं। जाने से पहले नागा साधु दो काम जरूर करते हैं-सबसे पहले अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेते हैं और फिर पूजा-पाठ कर विदाई समारोह में भाग लेते हैं।

विदा लेने से पहले नागा साधु करते हैं ये दो काम
महाकुंभ में 13 जनवरी से डेरा जमाए नागा साधु बसंत पंचमी के स्नान के बाद से प्रस्थान की तैयारी में लगे हुए हैं। अखाड़ों के तीनों शाही स्नान पूरे हो चुके हैं, जिनका सबसे अधिक महत्व होता है। पंच निर्वाणी अखाड़े के नागा संत अंतिम स्नान के अगले ही दिन प्रस्थान कर गए थे। 7 फरवरी को जूना अखाड़े के नागा साधु यहां से विदा होंगे। परंपरा के अनुसार, जाने से पहले वे दो विशेष कार्य करते हैं-पहला, कढ़ी-पकौड़ी का भंडारा आयोजित कर संतों और श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटते हैं, जो सदियों पुरानी परंपरा है। दूसरा, अपने शिविर में लगी धर्म ध्वज की डोर को ढीला कर देते हैं, जो उनके प्रस्थान का प्रतीक माना जाता है।
विदाई भोज का हिस्सा है कढ़ी-पकौड़ी
कढ़ी-पकौड़ी अखाड़े के साधु-संन्यासियों के विदाई भोज का हिस्सा है, जो कुंभ मेले के समापन पर होता है। इस दौरान साधु भावुक हो जाते हैं क्योंकि अगली मुलाकात अनिश्चित होती है। भोज के दौरान वे एक-दूसरे से मिलकर सुख-दुख साझा करते हैं, जिससे अखाड़े का माहौल संवेदनशील और भावनात्मक हो जाता है।
कहां जाएंगे नागा साधु
महाशिवरात्रि निकट होने के कारण महाकुंभ से 13 में से 7 अखाड़े सीधे काशी विश्वनाथ जाएंगे, जहां वे 26 फरवरी तक डेरा जमाएंगे। इसके बाद वे अपने-अपने अखाड़ों में लौटेंगे। संतों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर नागा साधु बनारस में शोभायात्रा निकालेंगे, मसाने की होली खेलेंगे और गंगा स्नान करेंगे, जिससे इस पावन पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।



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