Latest Updates
-
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय -
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट
महाकुंभ से विदा ले रहे नागा साधु, लौटने से पहले खाते हैं कढ़ी-पकौड़े, जानें इसकी वजह
महाकुंभ के समापन 26 फरवरी को होगा। नागा साधुओं के तीनों अमृत स्नान पूरे हो चुके हैं, जिसके बाद वे अखाड़ों में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। अब कुछ अखाड़ों के नागा साधु प्रस्थान करेंगे, जबकि अन्य 12 फरवरी से निकलेंगे। कुछ अखाड़े बसंत पंचमी स्नान के बाद ही रवाना हो चुके हैं। जाने से पहले नागा साधु दो काम जरूर करते हैं-सबसे पहले अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेते हैं और फिर पूजा-पाठ कर विदाई समारोह में भाग लेते हैं।

विदा लेने से पहले नागा साधु करते हैं ये दो काम
महाकुंभ में 13 जनवरी से डेरा जमाए नागा साधु बसंत पंचमी के स्नान के बाद से प्रस्थान की तैयारी में लगे हुए हैं। अखाड़ों के तीनों शाही स्नान पूरे हो चुके हैं, जिनका सबसे अधिक महत्व होता है। पंच निर्वाणी अखाड़े के नागा संत अंतिम स्नान के अगले ही दिन प्रस्थान कर गए थे। 7 फरवरी को जूना अखाड़े के नागा साधु यहां से विदा होंगे। परंपरा के अनुसार, जाने से पहले वे दो विशेष कार्य करते हैं-पहला, कढ़ी-पकौड़ी का भंडारा आयोजित कर संतों और श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटते हैं, जो सदियों पुरानी परंपरा है। दूसरा, अपने शिविर में लगी धर्म ध्वज की डोर को ढीला कर देते हैं, जो उनके प्रस्थान का प्रतीक माना जाता है।
विदाई भोज का हिस्सा है कढ़ी-पकौड़ी
कढ़ी-पकौड़ी अखाड़े के साधु-संन्यासियों के विदाई भोज का हिस्सा है, जो कुंभ मेले के समापन पर होता है। इस दौरान साधु भावुक हो जाते हैं क्योंकि अगली मुलाकात अनिश्चित होती है। भोज के दौरान वे एक-दूसरे से मिलकर सुख-दुख साझा करते हैं, जिससे अखाड़े का माहौल संवेदनशील और भावनात्मक हो जाता है।
कहां जाएंगे नागा साधु
महाशिवरात्रि निकट होने के कारण महाकुंभ से 13 में से 7 अखाड़े सीधे काशी विश्वनाथ जाएंगे, जहां वे 26 फरवरी तक डेरा जमाएंगे। इसके बाद वे अपने-अपने अखाड़ों में लौटेंगे। संतों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर नागा साधु बनारस में शोभायात्रा निकालेंगे, मसाने की होली खेलेंगे और गंगा स्नान करेंगे, जिससे इस पावन पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।



Click it and Unblock the Notifications