Mahalaxmi Vrat 2026: महालक्ष्मी व्रत आज से शुरू, जानें पूजा विधि, नियम और महत्व

Mahalaxmi Vrat 2026: हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। वैसे तो घरों में रोजाना माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, लेकिन महालक्ष्मी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक चलता है। इस तरह यह व्रत कुल 16 दिनों तक रखा जाता है। इस दौरान महिलाएं परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना से उपवास करती हैं। मान्यता है कि इन दिनों मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन, भाग्य, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति में बढ़ोतरी होती है। आइए, जानते हैं इस साल महालक्ष्मी व्रत की तिथि से लेकर पूजा विधि के बारे में -

Mahalaxmi Vrat 2026

महालक्ष्‍मी व्रत 2026 कब से कब तक है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 19 सितंबर 2026, शनिवार से होगी और इसका समापन 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को किया जाएगा। अष्टमी तिथि की बात करें तो इसकी शुरुआत 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे होगी और यह तिथि 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे समाप्त होगी। महालक्ष्मी व्रत की पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है।

महालक्ष्मी व्रत की पूजा विधि

महालक्ष्मी व्रत 16 दिनों तक रखा जाता है और 16वें दिन इसका उद्यापन किया जाता है। इस व्रत की शुरुआत श्री राधा अष्टमी से होती है।

व्रत रखने वाले व्यक्ति को रोजाना सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और 16 दिनों तक व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति पूरे 16 दिन व्रत नहीं रख सकता है तो शुरुआत के 3 या आखिरी के 3 व्रत भी रख सकता है।

व्रत के पहले दिन स्नान करने के बाद 16 तारों या धागों से एक विशेष डोरा तैयार करें। इसमें 16 गांठें लगाई जाती हैं। पूजा पूरी होने के बाद इस डोरे को कलाई पर बांधने की परंपरा है। व्रत के दौरान 16 गांठों वाला यह डोरा बाएं हाथ में पहनना चाहिए।

महालक्ष्मी की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। ऐसे में शाम को दोबारा स्नान करके लाल रंग के कपड़े पहनें। पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करने के बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।

इसके बाद केसर मिले चंदन से चौकी पर अष्टदल बनाएं और उसके ऊपर अक्षत रखें। फिर पानी से भरा कलश, श्री यंत्र और दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करें।

इसके बाद हल्दी से कमल का आकार बनाकर उस पर हाथी पर विराजमान मां लक्ष्मी की प्रतिमा रखें। इसके बाद माता लक्ष्मी के आठों स्वरूपों की पूजा करें।

मां लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने चांदी के सिक्के और कौड़ियां रखें। इसके बाद कमल के फूल, अक्षत, चंदन, लाल सूत, सुपारी और नारियल आदि से मां लक्ष्मी की पूजा करें।

माता लक्ष्मी को सफेद रंग की चीजों का भोग लगाएं।

पूजा पूरी होने के बाद महालक्ष्मी व्रत की कथा जरूर पढ़ें या सुनें।

इसके बाद गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाकर मां लक्ष्मी की आरती करें। पूरे 16 दिनों तक इसी तरह पूजा करने की परंपरा है।

महालक्ष्मी व्रत के नियम

16 दिनों के दौरान मांस-मदिरा समेत किसी भी तरह की तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
व्रत रखने वाले व्यक्ति को घर की साफ-सफाई और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए।
सुबह और शाम मां लक्ष्मी की पूजा करें।
व्रत के दिनों में बाएं हाथ में 16 गांठों वाला डोरा पहनना चाहिए।
इस दौरान खट्टी चीजों से परहेज किया जाता है।
पूजा के बाद 16 दूर्वा की गांठों को पानी में डुबोकर उस पानी को शरीर पर छिड़कने की परंपरा है।
व्रत में अन्न का त्याग किया जाता है। फल, दूध और मिठाई का सेवन किया जा सकता है।
व्रत पूरा करते समय तारों को अर्घ्य देने की परंपरा है।
तारों को अर्घ्य देने के बाद तारों की छांव में भोजन किया जाता है।

महालक्ष्मी व्रत का महत्व

महालक्ष्मी व्रत धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। इस व्रत में सोलह संख्या का खास महत्व है। 16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत में 16 तर्पण, 16 दीपक, 16 बोल की कहानी, 16 शृंगार, 16 दिन का व्रत, 16 दूर्वा और 16 डुबकी लगाने का विधान बताया गया है। यह व्रत पुत्र और पौत्रों की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना से भी किया जाता है। घर-परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक रहे, सुख-समृद्धि बनी रहे और परिवार की रक्षा हो, इस इच्छा से भी लोग श्रीमहालक्ष्मी व्रत रखते हैं। मान्यता है कि महालक्ष्मी व्रत रखने से घर में धन-धान्य बढ़ता है और परेशानियां दूर होती हैं। माता लक्ष्मी को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से व्यापार में तरक्की होने की भी मान्यता है।

Story first published: Saturday, September 19, 2026, 11:00 [IST]
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