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99% लोगों को नहीं पता होगा शिवरात्रि पर पूजा व जलाभिषेक का शुभ समय, जिससे मिलती है भोलेनाथ की विशेष कृपा
Mahashivratri 2025 Jal Time: सावन का पावन महीना चल रहा है जिसमें भगवान भोले बाबा की पूजा की जाती है। इस महीने में श्रद्धालु शिवजी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। इसके अलावा ये महीना कावड़ के लिए भी जाना जाता है और 23 जुलाई 2025 को महाशिवरात्रि है जब बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवरात्रि पर पूजा का सही समय क्या होता है?
अक्सर लोग दिन में पूजा कर लेते हैं या किसी भी समय अभिषेक कर देते हैं, जबकि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार अगर सही मुहूर्त और समय पर भगवान शिव की पूजा की जाए, तो उसका फल कई गुना अधिक मिलता है। आइए जानते हैं कि वो समय क्या है जब भोले बाबा को शिवरात्रि पर जल चढ़ाने से और विशेष जाप करने से सारे दुख दूर हो जाएंगे और शुभ फल की प्राप्ति होगी।

शिवरात्रि की पूजा का सही समय क्या है?
23 जुलाई 2025 को शिवरात्रि है और इस दिन कावड़ यात्रा संपन्न होगी। भोले के भक्त हरिद्वार और गोमुख से गंगा जल लाकर भगवान का जलाभिषेक करेंगे। अक्सर लोग किसी भी समय भोले बाबा को जल चढ़ा देते हैं और पूजा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवरात्रि पर किस समय जल चढ़ाना सबसे ज्यादा फलदायी होता है और महादेव प्रसन्न होते हैं। दरअसल ये समय है निश्चित काल का समय। ये वही समय है जब शिवलिंग पहली बार प्रकट हुआ था। इस समय महादेव के भक्त सिर्फ 5 मिनट के लिए भी पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हैं तो शिव-शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं और आपको उनके चरणों में जगह मिलती है।
शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त
निश्चित काल के समय भगवान भोले बाबा को जल चढ़ाने से और पूजा करने से सारे दुखों का नाश होता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। 23 जुलाई को ये शुभ योग बन रहा है जो रात को 12 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगा और 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस समय शिव साधना करने से रोग-दोष दूर हो जाते हैं। यदि आप चाहते हैं कि भगवान शिव की पूजा का पूर्ण फल आपको मिले, तो शिवरात्रि के दिन पूजा सही समय यानी रात्रि के तीसरे प्रहर में करें। इस शुभ घड़ी में किया गया अभिषेक और मंत्र जाप भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं।

शिवरात्रि की पूजा से क्या लाभ मिलता है?
जीवन में बाधाएं दूर होती हैं
मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है
वैवाहिक जीवन में सुख और संतुलन आता है
रोग, ऋण और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है
मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है



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