Mohini Ekadashi Katha: मोहिनी एकादशी की महिमा जानने के लिए जरूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा

Mohini Ekadashi Ki Katha: हिन्दू धार्मिक संस्कृति में एकादशी व्रत का बेहद ख़ास महत्व होता है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की श्रद्धा में रखा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर माह में दो बार एकादशी तिथियाँ आती हैं। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी मनाई जाती है।

मोहिनी एकादशी के व्रत के पालन से भगवान विष्णु पापों और मोह माया के जंजाल से मुक्ति देते हैं और व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष मोहिनी एकादशी 19 मई को मनाई जा रही है। मोहिनी एकादशी रविवार के दिन मनाई जायेगी, और इस दिन श्री हरी विष्णु की सच्चे मन से पूजा की जाती है इस दिन मोहिनी एकादशी व्रत की कथा का पठन या श्रवण के बिना व्रत सफ़ल नहीं होता। पेश है मोहिनी एकादशी व्रत कथा -

Mohini Ekadashi 2024 Vrat Katha Read Vaishakh Ekadashi ki Kahani in Hindi

मोहिनी एकादशी व्रत कथा (Mohini Ekadashi Katha)

सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नाम का राज्य बसा था, जिसपर चंद्रवंशी कुल के राजा द्युतिमान का शासन था। इस भद्रवती राज्य में कई विष्णु भक्त रहते थे। उन्हीं में से एक थे धनपाल नाम का विष्णु भक्त।वह विष्णु पूजा करता था और परोपकार व लोगों के मदद के कई कार्य करता था। उसने उस राज्य में राहगीरों के लिए पीने का पानी का प्रबंध किया और कई सड़कों पर पेड़ लगाएं। धनपाल के 5 पुत्र थे - समुना, सद्बुद्धि, मेधावी, सुकृति और धृष्टबुद्धि। धनपाल का पुत्र ध्रुष्ट्बुद्धि अधर्म के कार्यों में लगा रहता था जिससे तंग आकर धनपाल ने उसे घर से निकाल दिया।

घर से निकल दिए जाने के बाद वह दर दर की ठोकरे खाने के कारण उसने चोरी करना शुरू कर दिया। इस अपराध के लिए राजा के आदेश पर उसे पकड़ा गया। हालांकि उसके पिता धनपाल के अच्छे कर्मों के कारण उसे छोड़ दिया गया। लेकिन इसके बाद भी उसने चोरी करना नहीं छोड़ा और उसे दूसरी बार गिरफ्तार किया गया। सज़ा के तौर पर उसे नगर के बहार जाने का आदेश दे दिया गया।

नगर से निकालने के बाद वो भूख-प्यास से काफी परेशान होने लगा। तभी उसे कौडिन्य ऋषि का आश्रम दिखा और वह वहां पहुंच गया। उस समय वैशाख का महीना चल रहा था और ऋषि गंगा स्नान करके आए थे। तभी उनके द्वारा गंगाजल के कुछ छीटे धृष्टबुद्धि पर पड़ गए। इसके प्रभाव के कारण उसे थोड़ी सदबुद्धि आई। उसने ऋषि के पास जाकर कहा कि जीवन में उसने बहुत पाप किए हैं। अब वह उन पापों से मुक्ति चाहता है, इसके लिए वे उसका मार्गदर्शन करें।

यह सुनकर कौडिन्य ऋषि ने सुझाव दिया कि वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मोहिनी एकादशी का व्रत रखो और विधि विधान से भगवान विष्णु करो। इससे पूर्व के सभी पापों से मुक्ति मिलेगी और पुण्य की प्राप्ति होगी।

उसने ऋषि द्वारा बताई गई विधि से मोहिनी एकादशी का व्रत किया और पुण्य की प्राप्ति की। इससे उसे सभी पापों से मुक्ति मिली और जीवन के अंत में वह गरुड़ पर सवार होकर विष्णुधाम गया जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Sunday, May 19, 2024, 6:10 [IST]
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