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Ashura Ki Namaz And Dua: 10 मुहर्रम की नमाज और दुआ पढ़ने का तरीका, जानें आशूरा की नमाज में कितने रकात होती है
Ashura Ki Namaz And Dua In Hindi: मुहर्रम, इस्लामी हिजरी कैलेंडर का पहला महीना है और इसे बेहद पवित्र महीनों में गिना जाता है। मुहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे यौम-ए-आशूरा कहा जाता है, मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखती है। साल 2026 में आशूरा 26 जून को मनाया जाएगा। इस दिन बड़ी संख्या में लोग रोजा रखते हैं, दुआएं करते हैं और विशेष नफ़्ल नमाज़ अदा करते हैं। 10 मुहर्रम यानी यौम-ए-आशूरा के दिन खासतौर पर दुआ ए आशूरा पढ़ी जाती है। यह दुआ हजरत हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में की जाती है। इस दौरान मुसलमान गम मनाते हैं, मातम करते हैं और इबादत में लीन रहते हैं। यहां आप देखेंगे 10 मुहूर्रम की नमाज में कितनी रकात होती है, नियत और नमाज और दुआ पढ़ने का सही तरीका -

आशूरा का महत्व (Ashura Ka Mahatva)
इस्लामी इतिहास में आशूरा का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इसी दिन हजरत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी कौम को फिरऔन के अत्याचार से निजात मिली थी। वहीं कर्बला की घटना भी इसी तारीख से जुड़ी है, जहां हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य और इंसाफ की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इसलिए यह दिन मुसलमानों को सब्र, कुर्बानी और ईमानदारी का संदेश देता है।
आशूरा की नमाज क्या है? (Ashura Ki Namaz)
आशूरा की नमाज़ एक नफ्ल (स्वैच्छिक) नमाज है, जो अल्लाह की रजा और गुनाहों की माफी के लिए अदा की जाती है। इसमें गुनाहों की माफी, रहमत और बरकत की दुआ की जाती है।

आशूरा की नमाज पढ़ने का तरीका (Ashura Ki Namaz Ka Tarika In Hindi)
आशूरा के दिन कई मुसलमान नफ़्ल इबादत का विशेष एहतिमाम करते हैं। यह नमाज़ अल्लाह की रज़ा हासिल करने और उससे मग़फिरत की दुआ करने की नीयत से अदा की जाती है। व्यक्ति अपनी सुविधा और समय के अनुसार इसे पढ़ सकता है। आम तौर पर यह नमाज़ दो-दो रकात करके अदा की जाती है और हर दो रकात के बाद तस्बीह पढ़ी जाती है।
आशूरा की नमाज की नियत (Ashura Ki Niyat)
2 रकात के लिए नियत: "नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ आशूरा की नफ़्ल वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।"
4 रकात के लिए नियत: "नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ आशूरा की नफ़्ल, वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।"
आशूरा की नमाज में कितनी रकात पढ़ी जाती है? (Ashura Ki Namaz Mein Kitni Rakat Padhi Jati Hai)
यह नमाज़ 2, 4, 6, 8 या 12 रकात तक पढ़ी जा सकती है। हर दो रकात पूरी होने पर सलाम फेरा जाता है। प्रचलित तरीके के अनुसार सूरह फातिहा के बाद तीन बार सूरह इखलास पढ़ी जाती है।
आशूरा की नमाज पढ़ने का तरीका (Ashura Ki Namaz Ka Tarika In Hindi)
पहली रकात
सबसे पहले नियत बांधकर सना (सुब्हानक अल्लाहुम्मा।।।) पढ़ें। इसके बाद अउज़ुबिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम और बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़ें। फिर सूरह फातिहा पढ़ने के बाद तीन बार सूरह इखलास (कुल हुवल्लाहु अहद) पढ़ें।
इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाएं और कम से कम तीन बार "सुब्हान रब्बियाल अज़ीम" पढ़ें। फिर "समीअल्लाहु लिमन हमिदह" कहते हुए खड़े हों और "रब्बना लक़ल हम्द" कहें।
इसके बाद सज्दे में जाएं और तीन बार "सुब्हान रब्बियाल अ'ला" पढ़ें। दोनों सज्दे पूरे करने के बाद दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।
दूसरी रकात
दूसरी रकात में भी पहले की तरह सूरह फातिहा के बाद तीन बार सूरह इखलास पढ़ें।
फिर रुकू और सज्दे उसी क्रम से अदा करें।
दूसरी रकात के अंत में तशह्हुद (अत्तहिय्यात), दुरूद-ए-इब्राहीमी और दुआ-ए-मासूरा पढ़ें।
इसके बाद दाईं और बाईं ओर सलाम फेरकर नमाज़ पूरी करें।
हर दो रकात के बाद तस्बीह
हर दो रकात पूरी होने पर 70 बार विशेष तस्बीह पढ़ी जाती है - "सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर।" इसे अल्लाह की याद और मग़फिरत की दुआ के रूप में पढ़ा जाता है।
9 मुहर्रम की रात की नमाज़
4 रकात एक सलाम के साथ
हर रकात में सूरह फातिहा के बाद:
1 बार आयतुल कुर्सी
3 बार सूरह इखलास
नमाज़ के बाद 100 बार सूरह इखलास पढ़ें।
यह नमाज मगरिब के बाद से लेकर ईशा तक या ईशा के बाद भी अदा की जा सकती है।
आशूरा की नमाज़ का समय (Ashura Namaz Ka Time)
10 मुहर्रम के दिन यह नफ़्ल नमाज़ सूर्योदय के बाद से लेकर असर की नमाज़ से पहले तक पढ़ी जा सकती है। हालांकि सूरज निकलने और डूबने जैसे मकरूह समय में नमाज़ अदा करने से बचना चाहिए।
रात की नफ़्ल इबादत 9 मुहर्रम को मगरिब के बाद शुरू की जा सकती है। कुछ लोग ईशा से पहले और बाद में भी अपनी सुविधा के अनुसार नफ़्ल नमाज़ अदा करते हैं।
आशूरा की दुआ
आशूरा के दिन मुसलमान अपने लिए, परिवार के लिए और पूरी उम्मत की भलाई की दुआ करते हैं। कई लोग दुआ-ए-आशूरा भी पढ़ते हैं और अल्लाह से गुनाहों की माफी, रोजी में बरकत और दुनिया व आखिरत की भलाई की दुआ मांगते हैं।
10 मुहर्रम की दुआ/ दुआ-ए-आशूरा (Ashura ki Dua)
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
या क़ाबिल तौबत-ए-आदम यौम-ए-आशूरा।
या फारिज करबी ज़िन्नूनी यौम-ए-आशूरा।
या जामिअ शमली याकूब यौम-ए-आशूरा।
या सामिअ दावति मूसा व हारून यौम-ए-आशूरा।
या मुगीस इब्राहीम मिनन्नारि यौम-ए-आशूरा।
या राफिअ इदरीस इलस्समाई यौम-ए-आशूरा।
या मुजीब दावति सालिहिन फिन्नाकति यौम-ए-आशूरा।
या नासिर सय्यिदिना मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम यौम-ए-आशूरा।
या रहमानद्दुन्या वल आखिरति व रहीमहुमा, सल्ली अला सय्यिदिना मुहम्मदिन व अला आली सय्यिदिना मुहम्मदिन, व सल्ली अला जमीइल अम्बियाइ वल मुरसलीन, वक़ज़ि हाजातिना फिद्दुन्या वल आखिरह, व अतिल उम्रना फी ताअतिक व महब्बतिक व रिदाक, व अहयिना हयातन तय्यिबतन, व तवफ्फना अलल ईमानि वल इस्लाम बिरहमतिका या अरहमर्राहिमीन। अल्लाहुम्मा बिइज्जिल हसनि व अखीहि व उम्मीहि व अबीहि व जद्दीहि व बनीहि फर्रिज अन्ना मा नह्नु फीहि।
सुब्हानल्लाहि मिलअल मीजानि व मुन्तहल इल्मि व मबलग़र रिदा व ज़िनतल अर्शि। ला मलजा वला मनजा मिनल्लाहि इल्ला इलैहि। सुब्हानल्लाहि अददश्शफइ वल वितरि व अदद कलिमातिल्लाहित्ताम्माति कुल्लिहा। नसअलुकस्सलामता बिरहमतिका या अरहमर्राहिमीन। व हुआ हसबुना व नि'मल वकील। नि'मल मौला व नि'मन नसीर। वला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलीय्यिल अज़ीम। व सल्लल्लाहु तआला अला सय्यिदिना मुहम्मदिन व अला आलिहि व सह्बिहि व अलल मोमिनीन वल मोमिनाति वल मुस्लिमीन वल मुस्लिमाति। वल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन। आमीन, सुम्मा आमीन।



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