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Nirjala Ekadashi Vrat In Periods: क्या पीरियड्स में निर्जला एकादशी का व्रत रख सकते हैं? जानें क्या हैं नियम
Nirjala Ekadashi Vrat In Periods Niyam: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे वर्ष की सबसे पुण्यदायी एकादशियों में से एक माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं तथा भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन कई बार व्रत के दिन या उससे ठीक पहले महिलाओं को मासिक धर्म (पीरियड्स) शुरू हो जाता है, जिससे उनके मन में कई तरह के सवाल और संशय पैदा होने लगता है।

ऐसे में, महिलाएं अक्सर इस असमंजस में रहती हैं कि यदि व्रत के दिन पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो क्या व्रत व्रत रखना चाहिए?, क्या बीच में पीरियड्स आने से व्रत टूट जाता है? और पीरियड्स में बिना पूजा किए व्रत कैसे पूर्ण करें? अगर आपके मन में भी यही सवाल हैं, तो आइए जानते हैं कि पीरियड्स के दौरान व्रत रख सकते हैं या नहीं और पूजा के क्या नियम हैं -
निर्जला एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026, बुधवार को रात 08 बजकर 09 मिनट पर प्रारंभ होगी और 25 जून 2026, गुरुवार को रात 09 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।
क्या पीरियड्स के दौरान निर्जला एकादशी का व्रत रखा जा सकता है?
धार्मिक जानकारों के अनुसार, मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। ऐसे में यदि किसी महिला की इच्छा और स्वास्थ्य अनुमति देता है, तो वह पीरियड्स के दौरान भी एकादशी व्रत रख सकती है। हालांकि निर्जला एकादशी का व्रत काफी कठिन माना जाता है, इसलिए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। यदि कमजोरी, चक्कर या किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी महसूस हो रही हो, तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत करने का निर्णय लेना चाहिए। धर्म में स्वास्थ्य की उपेक्षा करने की सलाह नहीं दी गई है।
पीरियड्स में पूजा-पाठ को लेकर क्या मान्यताएं हैं?
अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में मासिक धर्म के दौरान पूजा को लेकर अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ परिवारों में महिलाओं को मंदिर जाने या पूजा सामग्री को स्पर्श करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है, जबकि कई लोग इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय मानते हैं। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि भगवान की भक्ति केवल बाहरी अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यदि कोई महिला शारीरिक रूप से पूजा न कर सके, तो वह मन ही मन भगवान विष्णु का स्मरण, मंत्र जाप या धार्मिक ग्रंथों का पाठ कर सकती है। हालांकि, मासिक धर्म के दौरान मंदिर जाने और पूजा की सामग्री छूने की मनाही होती है।
क्या निर्जला व्रत सभी लोगों को करना चाहिए?
निर्जला एकादशी का व्रत हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता। बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग या जिनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो, उन्हें स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे लोग भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य, मंत्र जाप और सात्विक जीवनशैली अपनाकर भी इस दिन का धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
क्या पीरियड्स में व्रत का पुण्य फल मिलता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण आधार श्रद्धा और भक्ति है। यदि कोई महिला सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करती है और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत या पूजा करती है, तो उसे धार्मिक लाभ प्राप्त होता है। मासिक धर्म जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया को कई विद्वान व्रत और भक्ति में बाधा नहीं मानते।
व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत का संकल्प लें।
कमजोरी महसूस होने पर स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें।
भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और ध्यान करें।
सकारात्मक सोच और शांत व्यवहार बनाए रखें।
जरूरतमंद लोगों की सहायता और दान-पुण्य करें।
किसी भी धार्मिक नियम को लेकर मन में भ्रम हो तो परिवार के बुजुर्गों या योग्य धार्मिक विद्वान से सलाह लें।



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