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Papmochani Ekadashi: एकादशी व्रत की संपूर्णता के लिए जरूर पढ़ें कथा, मंत्र और आरती
इस साल 18 मार्च को पापमोचनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। यह विष्णु की आराधना में मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा से श्रीहरि विष्णु की अराधना करते हैं और व्रत का पालन कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।
पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से जातक को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख व संपत्ति की प्राप्ति होती है। व्रत की सम्पूर्णता एकादशी व्रत कथा सुनने और विष्णु मन्त्र का गायन करने से ही हो पाती है।

जानते हैं एकादशी व्रत कथा, विष्णु मन्त्र और एकादशी आरती जिससे आपका भी एकादशी व्रत सफ़ल हो सके।
पापमोचनी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन कथा के अनुसार एक बार चित्ररथ नाम के एक वन में मेधावी नामक ऋषि तपस्या में लीन थें। वे भगवान् शिव को ध्यान में रखें हुए थे। तभी कामदेव ने मंजुघोषा नाम कि एक अपसरा को ऋषि मेधावी की तपस्या को भंग करने के लिए भेजा। पहले कुछ प्रयासों में अपसरा असफल रहीं पर कामदेव की सहायता से वे ऋषि को लुभाने में सफ़ल रहें। इसके बाद ऋषि और अपसरा साथ जीवन व्यतीत करने लगें। कई वर्षों बाद ऋषि मेधावी को ज्ञात हुआ कि मंजुघोषा को स्वर्ग से जानबूझकर भेजा गया था और उसके कारण ही ऋषि का तप असफल रहा। उन्होंने मंजुघोषा को श्राप दिया।
मंजुघोषा के माफ़ी याचना के बाद ऋषि ने श्राप से मुक्ति का उपाय बताया। उन्होंने यूज़ पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने का सुझाव दिया जिससे उसके द्वारा अतीत में किये गये पाप मिट जाएंगे।
इसके बाद ऋषि मेधावी और मंजुघोषा दोनों ने ही अपनी अपनी गलतियों और पापों के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा और अपने अपने पापों से मुक्त हुए। मंजुघोषा स्वर्ग वापस लौटीं और ऋषि मेधावी का तेज और तप वापस लौट आया।

विष्णु मन्त्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ विष्णवे नम:।
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
ॐ नारायणाय नम:।
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
ॐ हूं विष्णवे नम:।

एकादशी आरती
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।।
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।।
मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।।
पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।।
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।।
विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।।
चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।।
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।।
योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।।
कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ ।।
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।
पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, पाप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ ।।
देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ॐ ।।
जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ॐ ।।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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