Latest Updates
-
नीम करौली बाबा के 3 गुप्त नियम बदल सकते हैं आपकी किस्मत, आज ही जान लें सफल जीवन का रहस्य! -
UP Village Style Besan Cheela Recipe: घर पर बनाएं गांव जैसा पौष्टिक और स्वादिष्ट नाश्ता -
Hindi Journalism Day 2026 Wishes: हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर सभी पत्रकार दोस्तों को ये शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 30 May 2026: शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, शनिदेव की कृपा से होगा धन लाभ -
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय
पितृ पक्ष 2025: क्या औरतें कर सकती हैं पितरों का श्राद्ध? जानें क्या कहते हैं धार्मिक नियम
Pitru Paksha 2025: आज से यानी 7 सितंबर 2025 से पितृपक्ष लग रहे हैं जो 21 सितंबर 2025 तक रहेंगे। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है। इस काल में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह समय केवल पितरों के लिए समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दौरान किए गए कर्म सीधे पितरों तक पहुंचते हैं। बच्चे अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं और तर्पण करते हैं।
आमतौर पर श्राद्ध कर्म पुरुषों द्वारा किए जाते हैं, लेकिन आज के समय में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती हैं? क्या धार्मिक नियम उन्हें इसकी अनुमति देते हैं? इस विषय को लेकर शास्त्रों, परंपराओं और आधुनिक विचारों में अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि पितृ पक्ष में औरतों के श्राद्ध करने को लेकर धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं।
पितृ पक्ष और श्राद्ध का महत्व
पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर से हो रही है और इसका समापन 21 सितंबर 2025 को होगा। इस दौरान पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान और भोजन अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि जो लोग पितरों का श्राद्ध करते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि और संतति का कल्याण होता है। लोग अपने घर में पंडित को बुलाकर पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं। हालांकि कुछ लोग बिना पंडित के भी श्राद्ध करते हैं। आमतौर पर बेटा श्राद्ध करता है।

क्या औरतें कर सकती हैं श्राद्ध?
आज के समय में ये कहा जाता है कि महिलाएं हर वो काम कर सकती हैं जो पुरुष कर सकते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या महिलाएं पितरों का श्राद्ध और तर्पण कर सकती हैं या नहीं? इस बारे में गरुड़ पुराण और धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि श्राद्ध कर्म करने का अधिकार प्रायः पुत्र या पुरुष वंशज को दिया गया है। कहा गया है कि पुत्र पितृगण के उद्धार का कारण बनता है।इसलिए पारंपरिक रूप से स्त्रियों को श्राद्ध करने का अधिकार नहीं दिया गया। मगर किसी का पुत्र न हो तो उस अवस्था में स्त्री भी श्राद्ध कर सकती है लेकिन उसके नियम अलग होते हैं।
स्त्री कैसे करें श्राद्ध?
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि स्त्री भी अपने पितरों का श्राद्ध कर सकती है लेकिन उसके नियम अलग हैं। जहां पुरुष स्वंय श्राद्ध कर सकता है वहीं महिलाएं पंडित के द्वारा श्राद्ध कर सकती हैं। स्त्री श्राद्ध करते हुए पहले संकल्प लेंगी और फिर उसे पंडित को सौंपेगी और वो उनकी जगह श्राद्ध करेंगे। पंडित ही आगे की सारी प्रक्रिया करेंगें।
पितृ पक्ष में औरतें क्या कर सकती हैं?
घर पर दीप जलाना और पितरों का स्मरण करना
अन्नदान और गौ दान करना
किसी ब्राह्मण को भोजन कराना
अपने पितरों के नाम से दान करना।



Click it and Unblock the Notifications