Latest Updates
-
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग -
Shardiya Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
National Boss Day 2026 Wishes: कभी गाइड करते...बॉस डे पर अपने बॉस का दिल से कहें शुक्रिया, भेजें ये खास संदेश -
क्रिएटिनिन क्या होता है? जानें स्वस्थ किडनी के लिए क्रिएटिनिन का नॉर्मल लेवल कितना होना चाहिए -
Durga Puja Pandals in Delhi NCR: ये हैं दिल्ली-एनसीआर के टॉप 10 दुर्गा पूजा पंडाल, इस नवरात्रि जरूर करें दर्शन -
बारिश में बाल झड़ना कैसे रोकें: कारण, देखभाल और जरूरी पोषक तत्व -
Ashtami Navami 2026 Date: अष्टमी और नवमी कब है? जानें सही तिथि, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व
पितृ पक्ष 2025: क्या औरतें कर सकती हैं पितरों का श्राद्ध? जानें क्या कहते हैं धार्मिक नियम
Pitru Paksha 2025: आज से यानी 7 सितंबर 2025 से पितृपक्ष लग रहे हैं जो 21 सितंबर 2025 तक रहेंगे। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व होता है। इस काल में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह समय केवल पितरों के लिए समर्पित होता है और माना जाता है कि इस दौरान किए गए कर्म सीधे पितरों तक पहुंचते हैं। बच्चे अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं और तर्पण करते हैं।
आमतौर पर श्राद्ध कर्म पुरुषों द्वारा किए जाते हैं, लेकिन आज के समय में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या महिलाएं भी श्राद्ध कर सकती हैं? क्या धार्मिक नियम उन्हें इसकी अनुमति देते हैं? इस विषय को लेकर शास्त्रों, परंपराओं और आधुनिक विचारों में अलग-अलग मत देखने को मिलते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि पितृ पक्ष में औरतों के श्राद्ध करने को लेकर धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं।
पितृ पक्ष और श्राद्ध का महत्व
पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर से हो रही है और इसका समापन 21 सितंबर 2025 को होगा। इस दौरान पूर्वजों का तर्पण, पिंडदान और भोजन अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि जो लोग पितरों का श्राद्ध करते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि और संतति का कल्याण होता है। लोग अपने घर में पंडित को बुलाकर पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं। हालांकि कुछ लोग बिना पंडित के भी श्राद्ध करते हैं। आमतौर पर बेटा श्राद्ध करता है।

क्या औरतें कर सकती हैं श्राद्ध?
आज के समय में ये कहा जाता है कि महिलाएं हर वो काम कर सकती हैं जो पुरुष कर सकते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या महिलाएं पितरों का श्राद्ध और तर्पण कर सकती हैं या नहीं? इस बारे में गरुड़ पुराण और धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि श्राद्ध कर्म करने का अधिकार प्रायः पुत्र या पुरुष वंशज को दिया गया है। कहा गया है कि पुत्र पितृगण के उद्धार का कारण बनता है।इसलिए पारंपरिक रूप से स्त्रियों को श्राद्ध करने का अधिकार नहीं दिया गया। मगर किसी का पुत्र न हो तो उस अवस्था में स्त्री भी श्राद्ध कर सकती है लेकिन उसके नियम अलग होते हैं।
स्त्री कैसे करें श्राद्ध?
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि स्त्री भी अपने पितरों का श्राद्ध कर सकती है लेकिन उसके नियम अलग हैं। जहां पुरुष स्वंय श्राद्ध कर सकता है वहीं महिलाएं पंडित के द्वारा श्राद्ध कर सकती हैं। स्त्री श्राद्ध करते हुए पहले संकल्प लेंगी और फिर उसे पंडित को सौंपेगी और वो उनकी जगह श्राद्ध करेंगे। पंडित ही आगे की सारी प्रक्रिया करेंगें।
पितृ पक्ष में औरतें क्या कर सकती हैं?
घर पर दीप जलाना और पितरों का स्मरण करना
अन्नदान और गौ दान करना
किसी ब्राह्मण को भोजन कराना
अपने पितरों के नाम से दान करना।



Click it and Unblock the Notifications
