Latest Updates
-
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं -
Sawan Somwar Vrat 2026: क्या पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र -
World Lung Cancer Day 2026: स्मोकिंग न करने वालों को भी हो सकता है लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव -
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट -
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव
Pitru Paksha 2025: 7 सितंबर से 21 सितंबर तक है पितृ पक्ष, नोट कर लें श्राद्ध की तिथियां
Pitru Paksha 2025 Calendar: पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर 2025 से हो रही है और इसका समापन 21 सितंबर 2025 को होगा। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना गया है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। ऐसा विश्वास है कि पितृ पक्ष में श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए कर्मकांड से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा धरती पर आती है और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध, दान और तर्पण को स्वीकार करती है। इसलिए इस पखवाड़े में पूर्वजों को प्रसन्न करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विधि-विधान से पूजा-पाठ करना बहुत आवश्यक माना गया है।
इस बार घट रहा है एक श्राद्ध
इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक चलेगा। आमतौर पर श्राद्ध 16 दिन तक होते हैं लेकिन इस बार एक श्राद्ध घट रहा है तो इस बार15 दिनों तक पितृ पक्ष रहेगा। इसलिए जिन जातकों के माता-पिता या अन्य पितृजन का निधन हुआ है, वे अपनी तिथि के अनुसार श्राद्ध करके पूर्वजों को तृप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं पितृ पक्ष 2025 के श्राद्ध की सभी महत्वपूर्ण तिथियां।

पितृ पक्ष 2025 श्राद्ध तिथियां (Shradh Calendar 2025)
7 सितंबर (रविवार) - पूर्णिमा श्राद्ध
8 सितंबर (सोमवार) - प्रतिपदा श्राद्ध
9 सितंबर (मंगलवार) - द्वितीया श्राद्ध
10 सितंबर (बुधवार) - तृतीया श्राद्ध
11 सितंबर (गुरुवार) - चतुर्थी श्राद्ध
12 सितंबर (शुक्रवार) - पंचमी श्राद्ध
13 सितंबर (शनिवार) - षष्ठी श्राद्ध
14 सितंबर (रविवार) - सप्तमी श्राद्ध
15 सितंबर (सोमवार) - अष्टमी श्राद्ध
16 सितंबर (मंगलवार) - नवमी श्राद्ध
17 सितंबर (बुधवार) - दशमी श्राद्ध
18 सितंबर (गुरुवार) - एकादशी श्राद्ध
19 सितंबर (शुक्रवार) - द्वादशी श्राद्ध
20 सितंबर (शनिवार) - त्रयोदशी और चतुर्दशी श्राद्ध
21 सितंबर (रविवार) - सर्वपितृ अमावस्या (सभी पितरों का श्राद्ध)
अमावस्या श्राद्ध का महत्व (सर्वपितृ अमावस्या)
पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या कहलाता है। इसे महालय अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन का महत्व पूरे श्राद्ध पक्ष में सबसे अधिक माना गया है। इसे विशेष माना जाता है, आइए जान लेते हैं इस बारे में विस्तार से।
सभी पितरों के लिए श्राद्ध
- यदि किसी को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो अमावस्या के दिन श्राद्ध करने से सभी पितरों को तृप्ति मिलती है। इसलिए इसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है।
पितरों को मोक्ष का मार्ग
- मान्यता है कि इस दिन किया गया श्राद्ध पितरों को न केवल तृप्त करता है, बल्कि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति भी कराता है।
पूर्वजों का आशीर्वाद
- इस दिन विधिवत तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि, संतान सुख और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।
तिथि भूलने वालों के लिए वरदान
- जिनके पूर्वजों की पिण्डदान तिथि याद नहीं रहती या जिनके परिवार में श्राद्ध कर्म नियमित रूप से संभव नहीं है, वे इस दिन श्राद्ध करके पूर्ण पुण्यफल प्राप्त कर सकते हैं।
दान और पितृ तर्पण का महत्व
- इस दिन दान, दक्षिणा, अन्न और वस्त्र दान का विशेष महत्व होता है। यह पितरों को संतुष्ट करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है।



Click it and Unblock the Notifications