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Pitru Paksha Me Mandir Ja Sakte Hain Ya Nahi: पितृ पक्ष के दौरान घर और मंदिर में पूजा पाठ करें या ना करें?
Pitru Paksha Puja in Temple: पितृ पक्ष के दौरान पितृ लोक के द्वार खुलते हैं और पितर अपने परिजनों से मिलने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं। इन सोलह दिनों में पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किये जाते हैं।
यह समय अपने पूर्वजो को सम्मान देने और उनकी मृत्यु पर शोक मनाने का होता है। इसमें शुभ कार्य करने की मनाही होती है। कोई भी मांगलिक कार्य या कोई बड़े शुभ कार्य को आरंभ करने की मनाही भी होती है।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या पितृ पक्ष के दौरान मंदिर जाना चाहिए? क्योंकि मंदिर जाना भी शुभ कार्य में ही गिना जाता है तो क्या मंदिर में जाकर पूजा पाठ करना पितृ पक्ष में उचित है या नहीं?
पितृ पक्ष में घर में पूजा-पाठ कर सकते हैं या नहीं?
पितृ पक्ष विशेष तौर पर पितरों को प्रसन्न करने और उनकी पूजा करने का समय होता है। इसलिए इस दौरान अपने जीवन शैली, खान पान और यहां तक की वस्त्रों से भी सादगी झलकनी चाहिए ताकि पूर्वजों को सम्मान मिले। अब सवाल उठता है कि देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए या नहीं। तो आपको बता दें की देवी देवताओं का स्थान पितरों से ऊपर होता है। इसलिए इनके पूजा अर्चना में किसी तरह की रुकावट का प्रश्न ही नहीं होता है।

इनकी जैसे पूजा अर्चना आप करते आ रहे हैं वो वैसे ही चलती रहेगी। हम यहां घर में होने वाले पूजा पाठ की बात कर रहे हैं। प्रातः काल की पूजा हो या संध्यावंदन हो, ये नियमित रूप से वैसे ही चलेंगे जैसे आप करते आ रहे हैं। इनसे पितरों को कोई आपत्ति नहीं होती।
पितृ पक्ष में मंदिर जा सकते हैं या नहीं?
अब प्रश्न है मंदिर में जाकर पूजा पाठ करने की तो यहां भी वही तर्क लागू होता है। मंदिर के कपाट पितृ पक्ष में भी खुले रहते हैं। आप बिना किसी दुविधा के मंदिर जाएं और पूजा पाठ करें। बस इस बात का ध्यान रखें की पितृ पक्ष के दौरान कोई बड़ा मांगलिक या धार्मिक कार्य ना करें। यज्ञ हवन इत्यादि करने से बचें।

मंदिर में सादगी पूर्वक जाएं, देवी देवताओं के दर्शन करें उनकी पूजा अर्चना करें इसमें कोई रोक टोक नहीं है। धर्मग्रंथो के अनुसार कहा तो ये भी जाता है कि सुबह में अपने देवी देवताओं की पूजा अर्चना के बाद ही अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण या पिंडदान करें। दोपहर का समय अपने पितरों की पूजा के लिए निकाला जा सकता है और सुबह शाम देवी देवताओं की पूजा की जा सकती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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