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Bhikhari Paisa Mange To Kya Kare: प्रेमानंद महाराज से जानें भिखारी को पैसा देना सही है या गलत
Bhikhari Paisa Mange To Kya Kare: प्रेमानंद महाराज जी कृष्ण मार्गी शाखा के एक प्रखर प्रवक्ता है। महाराज जी की वाणी अत्यंत ही मनमोहक तथा दिल छू जाने वाली होती है। वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज जी का प्रवचन सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय है। प्रेमानंद महाराज जी और उनका एकांतिक वार्तालाप काफी प्रसिद्ध हो चुका है।
महाराज जी का प्रवचन देश ही नहीं अपितु विदेश के कोने-कोने में सुना जाता है और दर्शन के लिए श्रद्धालु लाखों की संख्या में उनके आश्रम में पहुंचते हैं। वः भक्तों के मन में चल रहे प्रश्नों का बहुत ही सुंदर उत्तर देते हैं। हमने कई बार ऐसा देखा है कि अपना जीवन यापन करने के लिए पैसे माँगते हुए घर के दरवाजे पर भिक्षुक आ जाते हैं। वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज जी ने सत्संग के दौरान बताया कि अगर कोई भिखारी आपके घर के दरवाजे पर आ जाए तो आपको क्या करना चाहिए।
घर के दरवाजे पर भिक्षुक आ जाये तो क्या करना चाहिए?

प्रेमानंद महाराज जी के अनुसार यदि आप गृहस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो आपके दरवाजे पर आए किसी भी भिक्षुक का अपमान या अवहेलना बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। उसे अपशब्द नहीं बोलना चाहिए तथा भगाना नहीं चाहिए।
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि अगर आप किसी भिक्षुक को दुत्कारते हुए भगाते हैं तो उसके सम्पूर्ण दुष्कृत्य वहीं समाप्त हो जाएंगे। इसलिए उससे मृदु वचन में बात करिए तथा सम्मान करिए।
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि अगर आप समर्थ हैं तो एक बार भिक्षुक से मृदु वचन से पूछ कर उसकी राय जान लीजिए कि वह क्या मांग रहा है, उसको किस चीज की जरूरत है। अगर आप सक्षम नहीं हैं तो मृदु वाणी में अपनी बात उनके समक्ष रख देना बहुत ही अच्छा रहेगा। इससे वह भी आपके भाव को समझ जाएगा।
महाराज जी कहते हैं कि अगर आप के अंदर सामर्थ्य नहीं है तो भिखारी से अपनी मीठी जुबान में कहिए कि आप कहीं और देखिए किसी और के दरवाजे पर मांग लीजिए।
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि आपके घर में आए हुए भिक्षुक को आप अपनी स्वेच्छा पूर्ण पानी पिला सकते हैं। इसके साथ ही खाना खिला सकते हैं। अगर आपमें उतना सामर्थ्य नहीं है तो अन्न के थोड़े से दाने उसकी झोली में डाल देना चाहिए। जिससे उसका सहृदय भाव में परिवर्तन हो जाएगा। लेकिन इसके विपरीत उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचना चाहिए तथा उनके प्रति गलत बर्ताव नहीं करना चाहिए और न ही क्रोध में बात करनी चाहिए।
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि आप भिक्षुक से ऐसी बात न बोले जो उनके दिल को ठेस पहुंचाए तथा इन शब्दों का कभी प्रयोग नहीं करना चाहिए जैसे 'ए भिखारी चल भाग यहाँ से'। भिखारी को मान सम्मान देने के लिए उनके समक्ष सीधा भिखारी न बोलकर आप भिक्षुक शब्द का भी उपयोग कर सकते हैं। इससे उनको अत्यंत ही प्रसन्नता महसूस होगी।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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