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Radha Ashtami 2025: राधा अष्टमी व्रत की कितने बजे होती है पूजा? जानें इस उपवास का महत्व
Radha Ashtami Vrat kaise karen: कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिन बाद राधा अष्टमी आती है जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में कृष्ण अष्टमी की तरह ही राधा अष्टमी का बहुत महत्व माना जाता है। श्रीकृष्ण की प्रेयसी एवं परमभक्त राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाए जाने वाले इस दिन जो व्रत रखते हैं उन्हें सौभाग्य और सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही जो जातक प्रेम के पथ पर हैं उनके लिए भी ये दिन बहुत खास होता है।
वहीं कुंवारी कन्याएं इस व्रत को रखती हैं तो उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। ऐसी भी मान्यता है कि जो लोग श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं उन्हें राधा अष्टमी का व्रत भी जरूर रखना चाहिए तभी उस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कब है राधा अष्टमी और कैसे करें इस दिन व्रत व पूजा साथ में इस खास व्रत का महत्व भी जान लेते हैं।
कब है राधा अष्टमी?
कृष्ण जन्माष्टमी के 15 दिनों बाद राधा अष्टमी मनाई जाती है। 16 अगस्त दिन शनिवार को जन्माष्टमी थी और 31 अगस्त दिन रविवार को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। जो लड़िकियां शादी की उम्र की हैं वो इस व्रत को रखती हैं तो उन्हें सुयोग्य और मनचाहा वर मिलता है।

राधा अष्टमी व्रत का महत्व
राधा अष्टमी का व्रत भगवान कृष्ण और राधा जी की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।
इस दिन का व्रत करने से संपत्ति, सुख, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सौभाग्य बढ़ता है।
विशेष रूप से कृष्ण भक्तों और अविवाहित लोगों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
दोपहर तक के लिए क्यों रखा जाता है ये व्रत?
आमतौर पर अधिकतर व्रत सुबह से लेकर शाम तक के लिए रखा जाता है। लेकिन राधा अष्टमी का व्रत थोड़ा अलग है जो दोपहर तक ही रखा जाता है। इसके पीछे की एक प्रसिद्ध कहानी है कि कृष्ण भगवान के रात को 12 बजे जन्म होने पर राधा दुखी हुईं और उन्होंने ठाकुर जी से बोला कि आपने इतनी रात को जन्म क्यों लिया इससे आपके भक्तों को बहुत कष्ट होता है। उन्हें रात तक भूखा रहना पड़ता है। इस पर कृष्ण ने चंद्र देव को दिए वचन के बारे में बताया तो राधा बोलीं कि मैं तो अपने भक्तों को इतना कष्ट नहीं दूंगी और दोपहर में 12 बजे ही जन्म लुंगी। यही वजह है कि राधा अष्टमी का उपवास दोपहर 12 बजे तक ही किया जाता है।
उपवास के मुख्य नियम
राधा अष्टमी का व्रत पूर्ण दिन निर्जला या फलाहारी रखा जा सकता है।
फलाहारी व्रत में केवल फल, दूध और हल्का भोजन लें।
मांसाहार का सेवन नहीं किया जाता है।
राधा अष्टमी पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले व लाल रंग के साफ वस्त्र पहनें।
भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर को सजाएं।
घर में राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।
फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
राधा स्तोत्र, राधा-सप्तशती या राधा मंत्र का पाठ करें।
पूजा के अंत में सभी प्रसाद बांटें।



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