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Raksha Bandhan 2023: मार्केट में धूम मचा रही है बिहार की गोबर राखी, जानें क्या है इसकी वजह
महादेव शिव को समर्पित पवित्र सावन माह अब अपने अंतिम चरणों में है। सावन माह की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पवित्र पर्व मनाया जाता है। यह त्यौहार हिन्दू संस्कृति का बहुत ख़ास हिस्सा माना जाता है जिसमें भाई बहन के पवित्र रिश्ते की खूबसूरती का जश्न मनाया जाता है।
इस विशेष दिन के लिए कई दिन पहले से ही बाज़ार सज कर तैयार हो जाते हैं और रंग बिरंगी व तरह तरह की राखियाँ भाइयों की कलाई की शोभा बढाने को तैयार रहती है।

आजकल कई आकर्षक और हैरान करने वाले डिज़ाइन की राखियाँ बाज़ार में उपलब्ध है। ऐसी ही एक राखी है इको फ्रेंडली व गाय के गोबर से बनी राखी। जी हां, बिहार के औरंगाबाद के बाज़ार में बेचीं जा रही ये राखियाँ कुछ अनोखी हैं। जानते हैं इसके बारे में आगे -
बिहार की इको फ्रेंडली राखियां
इस बार बिहार के औरंगाबाद के बाज़ार में इको फ्रेंडली राखियां प्रचलित हो रही हैं। आम राखियों जैसे ही डिज़ाइन वाली ये राखियां गाय के गोबर से बनी हैं। इनमें किसी पौधे के बीज भी मिले हुए हैं। रक्षाबंधन के कुछ दिनों बाद अक्सर राखी को उतारकर रख दिया जाता है, और वे इधर उधर फ़ेंक दी जाती हैं। इन इको फ्रेंडली राखियों को प्रयोग के बाद उतारकर गमले में डाल दिया जाए तो कुछ दिनों बाद ही आपके घर में एक सुंदर सा पौधा उग जाएगा।
रक्षाबंधन की तारीख?
इस वर्ष पूर्णिमा तिथि को लेकर लोग असमंजस में है इसलिए रक्षाबंधन की भी तारीख ठीक से स्पष्ट नहीं। रक्षाबंधन 30 अगस्त को या 31 अगस्त को लोग इसमें अस्पष्ट हैं। दरअसल पंचांग के अनुसार दोनों ही दिन रक्षाबंधन मनाया जा सकता है। पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10:58 बजे शुरू हो जाएगी और अगले दिन 31 अगस्त को सुबह 07:05 बजे तक रहेगी। हालांकि 30 अगस्त को रात 09:02 भद्रा का साया रहेगा इसलिए राखी बाँधने का मुहूर्त 30 की रात 09:02 बजे रहेगा, वहीं 31 की सुबह 7 बजे से पहले भी राखी बाँधी जा सकती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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