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Roza Rakhne Aur Kholne Ki Dua: रमजान में रोजा रखते और खोलते समय पढ़ें ये दुआ, मिलेगी अल्लाह की रहमत
Ramzan Ki Dua In Hindi: रमजान का मुबारक महीना भारत में 19 फरवरी से शुरू हो रहा है। यह महीना मुसलमानों के लिए रहमतों और बरकतों वाला होता है इस पूरे महीने मुस्लमान उपवास यानी रोजा रखते हैं, पांच वक्त की नमाज पढ़ते हैं, जकात, फितरा देकर मिस्कीनो की मदद करते हैं और दुआएं करते हैं। रोजा रखते और खोलते समय एक खास दुआ की जाती है। आइए जानते हैं इसके बारे में -
रमजान में रोजा रखने का महत्व
रोजा की शुरुआत फ़ज़र की अज़ान से पहले यानी शहरी से होती है, और मगरिब की अज़ान से खोला जाता है। रोजे की हालत में झूठ बोलने से, बुराई करने से, गाली देने से, बुरे विचारों से रोजा मकरूह हो जाता है यानी रोजे का शबाब खत्म हो जाता है। रमजान में हर इबादत का फल 70 गुना बढ़ जाता है और हर बुराई का गुनाह भी 70 गुना ज्यादा हो जाता है। इसलिए इस महीने में बुरे कर्मों से बचना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा दुआ करनी चाहिए।

रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua)
शहरी के दौरान सच्चे मन से रोजा रखने की नियत करना जरूरी होता है। नियत के बाद मोमिन रोजदार हो जाता है और इफ्तार के समय भी दुआ पढ़कर ही रोजा खोलना चाहिए।
हिंदी में रोजा रखने की दुआ (Roza Rakhne Ki Dua In Hindi)
व बिसौमि ग़दिन नवैतु मिन शाह्रि रमज़ान
इसका अर्थ है "मैं अल्लाह के लिए रमज़ान के रोजे की नीयत करता/करती हूं।"
इंग्लिश में रोज़ा रखने की दुआ ( Roza Rakhne Ki Dua in English)
Wa Bisawmi ghaddan nawaiytu min shahri ramadan
रोज़ा खोलने की दुआ ( Roza Kholne Ki Dua)
पूरे दिन रोजे की हालत में रहकर इबादत करने के बाद इफ्तार के समय रोजेदार अपने रब से दुआएं करता है। रोजा खोलने से पहले इस दुआ को पढ़ने से सवाब मिलता है और खाने में बरकत भी होती है। इफ्तार के दौरान, खासतौर पर खजूर खाने से पहले यह दुआ पढ़ी जाती है -
हिंदी में रोज़ा खोलने की दुआ ( Roza Kholne ki Dua Hindi me)
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु,व-बिका आमन्तु,व-अलयका तवक्कालतू,व अला रिज़किका अफतरतू,
इसका अर्थ है "या अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तुझ पर भरोसा किया और तेरी दी हुई रोजी से रोज़ा खोला।"
इंग्लिश में रोज़ा खोलने की दुआ ( Roza Kholne ki Dua in English)
Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa alayka tawakkaltu wa ala rizq-ika-aftartu
रोजे की नमाज का तरीका (Roza ki Namaz ka Tarika)
रमजान में नमाज का खास महत्व होता है। पांच वक्त की नमाज़ के साथ एक खास नमाज़ भी पढ़ी जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं। यह नमाज ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाती है। तरावीह की नमाज़ पढ़ने से पहले नियत करना जरूरी होता है। नियत दिल में की जाती है, लेकिन उसे जुबान से भी कहा जा सकता है।
पुरुषों के लिए नियत
नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के लिए, वक्त इशा का, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ। अल्लाहु अकबर।
महिलाओं के लिए नियत
नियत करती हूं मैं दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के लिए, वक्त इशा का, मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ। अल्लाहु अकबर।
तरावीह की नमाज पढ़ने का सही तरीका
तरावीह की नमाज़ ईशा की फर्ज नमाज़ के बाद पढ़ी जाती है।
हर दो रकात के बाद सलाम फेरा जाता है।
चार रकात के बाद थोड़ा ठहर कर दुआ पढ़ी जाती है।
अगर मस्जिद में पढ़ रहे हैं तो इमाम के पीछे नमाज़ अदा की जाती है। घर पर भी तरावीह पढ़ी जा सकती है, चाहे अकेले या परिवार के साथ। मस्जिदों में रमज़ान के दौरान पूरा कुरआन सुनाया जाता है।



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