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Ramadan 2026: रोजा न रखने की किसे है अनुमति? अल्लाह ने दी है इन लोगों को बड़ी रियायत
Ramadan 2026 Who Can Skip Roza: रमजान-उल-मुबारक (Ramadan 2026) का पाक महीना शुरू होने वाला है। इस महीने में सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक खुदा की इबादत में भूखा-प्यासा रहा जाता है। हालांकि, रोजा रखना अनिवार्य है, लेकिन अल्लाह ने अपने बंदों पर उनकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डाला है। शरीयत के मुताबिक, दीन-ए-इस्लाम ने कुछ विशेष वर्गों को रोजा न रखने की 'विशेष रियायत' दी है। यह छूट इसलिए दी गई है ताकि इबादत किसी की जान या सेहत के लिए खतरा न बन जाए।
अगर आप भी इस संशय में हैं कि क्या आप या आपके परिवार का कोई सदस्य रोजा छोड़ने का हकदार है, तो आइए जानते हैं किन लोगों को रमजान में रोजा न रखने की अनुमति है और इसके बदले उन्हें क्या करना होता है।

1. गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति
यदि कोई व्यक्ति किसी ऐसी बीमारी से जूझ रहा है जिसमें लंबे समय तक भूखा रहना उसकी जान जोखिम में डाल सकता है या बीमारी को और बढ़ा सकता है, तो उसे रोजा न रखने की छूट है।
नियम: बीमारी ठीक होने के बाद इन रोजों की 'कजा' (बाद में रखना) करनी होती है। अगर बीमारी लाइलाज है, तो 'फिदिया' देना होता है।
2. मुसाफिर या यात्रा करने वाले
इस्लाम में सफर करने वाले व्यक्ति जो मुसाफिर हों को रोजा न रखने की अनुमति दी गई है। पुराने समय में सफर कठिन होते थे, इसलिए यह रियायत दी गई थी जो आज भी लागू है।
नियम: सफर के दौरान छोड़े गए रोजों को रमजान के बाद किसी भी समय पूरा करना अनिवार्य है।
3. बुजुर्ग और अशक्त लोग
वे बुजुर्ग जो उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां शारीरिक रूप से रोजा रखने की शक्ति नहीं बची है, उन्हें रोजा न रखने की पूरी छूट है।
नियम: ऐसे बुजुर्गों को हर रोजे के बदले किसी गरीब या जरूरतमंद को दो वक्त का खाना खिलाना होता है, जिसे 'फिदिया' कहा जाता है।
4. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
अगर किसी महिला को लगता है कि रोजा रखने से उसकी सेहत या उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है, या स्तनपान कराने वाली मां को दूध की कमी होने का डर हो, तो वह रोजा छोड़ सकती है।
नियम: इन महिलाओं को बाद में छोड़े गए रोजों की कजा (बदले में रोजा रखना) करनी होगी।
5. मासिक धर्म के दौरान महिलाएं
मासिक धर्म (Periods) या प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव के दौरान महिलाओं के लिए रोजा रखना वर्जित है। इस अवस्था में रोजा रखना सही नहीं माना जाता।
नियम: रमजान खत्म होने के बाद, साल के किसी भी महीने में इन छूटे हुए रोजों की गिनती पूरी करना फर्ज है।
6. मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति
शरीयत के मुताबिक, रोजा केवल उन लोगों पर फर्ज है जो मानसिक रूप से स्वस्थ और होशोहवास में हों। मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति पर रोजे की पाबंदी नहीं है।
क्या होता है 'फिदिया' और 'कजा'? (Quick Guide)
कजा (Qaza): रमजान के बाद छोड़े गए रोजों के बदले एक-एक रोजा रखना।
फिदिया (Fidya): यदि कोई व्यक्ति भविष्य में कभी रोजा रखने की स्थिति में नहीं आ सकता (जैसे बहुत ज्यादा बुढ़ापा या लाइलाज बीमारी), तो वह हर रोजे के बदले एक जरूरतमंद को पेट भर खाना खिलाता है।



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