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Rishi Panchami Vrat: ऋृषि पंचमी व्रत में क्या खाएं, क्या नहीं खाएं? जानें इस उपवास का महत्व और पौराणिक कथा
Rishi Panchami Vrat Me kya khana Chahiye: ऋषि पंचमी व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पंचमी तिथि को किया जाता है। हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है क्योंकि यह व्रत स्त्रियों द्वारा मासिक धर्म के समय हुई भूल-चूक को शुद्ध करने और पापों के प्रायश्चित के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से ऋषियों की कृपा प्राप्त होती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
एक और मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति होती है। जो लोग इस व्रत को रखते हैं उन्हें विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए और खानपान का भी खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं कि ऋृषि पंचमी के दिन क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए और इसकी पूजा विधि से लेकर पौराणिक कथा तक सब कुछ जानते हैं।

ऋषि पंचमी व्रत की पौराणिक कथा
पुराने समय की बात है। विदर्भ देश में एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी धर्मपरायण थी। दंपत्ति की एक पुत्री थी। विवाह के बाद वह कन्या अपने पति के साथ रहने लगी। परंतु अज्ञानवश उसने मासिक धर्म (रजस्वला अवस्था) में शुद्धाचार और नियमों का पालन नहीं किया। इस कारण मृत्यु के पश्चात वह कन्या अपवित्र जन्म में चली गई और वह कीट (कीड़ा) बन गई। उसका पति दुखी होकर तप करने लगा। तभी महर्षि वसिष्ठ ने ब्राह्मण को बताया कि यह दोष उसकी पत्नी द्वारा मासिक धर्म के नियमों का पालन न करने के कारण हुआ है। ऋषियों ने कहा कि इस दोष का निवारण केवल ऋषि पंचमी व्रत से ही संभव है।
महर्षि की आज्ञा से ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने श्रद्धा के साथ ऋषि पंचमी व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उनकी पुत्री को उस पाप से मुक्ति मिली और उसे दिव्य स्वरूप प्राप्त हुआ। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि स्त्रियाँ इस व्रत को करती हैं ताकि अनजाने में हुई भूल-चूक का प्रायश्चित हो सके। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी पाप नष्ट होते हैं, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
ऋषि पंचमी व्रत का महत्व
ऋषि पंचमी व्रत का महत्व बहुत अधिक होता है। ये व्रत खासतौर पर महिलाओं के लिए होता है। माना जाता है कि ये व्रत महिलाओं की शुद्धि के लिए रखा जाता है। इस व्रत को करने से ऋषियों की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है तभी इसे पापमोचन और मोक्ष की प्राप्ति का व्रत कहा जाता है। इसके अलावा इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति और उनके उज्जवल भविष्य के भी योग बनते हैं।

ऋषि पंचमी व्रत की पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर-पूजा स्थान शुद्ध करें।
हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प करें।
लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सप्तऋषि की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
दीपक जलाए और धूप, पुष्प, चावल, अक्षत अर्पित करें।
सप्तऋषियों के नाम लेकर उन्हें प्रणाम करें।
सप्तऋषि मंत्र का जाप करें - "ऋषीणां पूजनं कुर्वे पापं मे नश्यतु ध्रुवम्।"
व्रत कथा का पाठ/श्रवण करें।
सात्विक आहार या फलाहार ग्रहण करें, तामसिक वस्तुएँ वर्जित हैं।
शाम को पुनः दीपक जलाकर आरती करें।
ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न-वस्त्र दान देकर व्रत पूर्ण करें।
ऋषि पंचमी व्रत में क्या खाएं?
फल, दूध, दही, घी
कंद-मूल (जैसे शकरकंद, अरबी)
समा के चावल (vrat ke chawal)
सेंधा नमक से बने व्यंजन
ऋषि पंचमी व्रत में क्या न खाएं?
अनाज, दाल, चना
प्याज-लहसुन
मसाले और समुद्री नमक
मांसाहार व नशे की चीजें



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