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इस मंदिर में है शिव के पांच सिर वाली दुर्लभ मुक्ति, बाढ़ में भी अडिग रही 'छोटी काशी'
हिमाचल प्रदेश में हुई भारी बारिश और बाढ़ के हालात ने देशभर में सुर्खियां बटोरीं। यहां के स्थानीय लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मगर इस बीच एक ऐसी चीज थी जिसने सबको हैरान किया।
भगवान शिव को समर्पित मंडी का पंचवक्त्र मंदिर सदियों पुराना है। जून की शुरुआत में लगातार बारिश के बाद ब्यास में आई बाढ़ में भी यह मंदिर चमत्कारिक रूप से बच गया है और बरकरार रहा।

यह देश के संरक्षित स्मारकों में से एक है जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अंतर्गत आता है और इसे राष्ट्रीय स्थल घोषित किया जा चुका है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंदिर परिसर में 15 फुट का मलबा जमा था, जिसमें भगवान शिव की पांच फुट की मूर्ति दबी हुई थी। हालांकि, मंदिर के ढांचे को कोई नुकसान नहीं हुआ और इसका वीडियो देखने वाला हर इंसान हैरान है।
श्रावण का महीना शुरू हो चुका है। यह 300 वर्ष से अधिक पुराना शिव मंदिर अपार धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है। आइए जानते हैं मंडी में भगवान शिव के पंचवक्त्र मंदिर से जुडी दिलचस्प बातें।
मंडी कहलाता है छोटा काशी
पंचक्त्र मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी में सुकेती और ब्यास नदी के संगम पर स्थित है। इस मंदिर में पूरे भारत से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। यह भगवान शिव के विशेष मंदिरों में से एक है।
मंडी को 'छोटी काशी' या 'हिमाचल की काशी' के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के प्राचीन शहरों में से एक है। आपको बता दें कि इस शहर में 81 मंदिर हैं।
यहां हैं भगवान के पांच मुख वाली मूर्ति
इस मंदिर की वास्तुकला बहुत शानदार है और इसे देखने वाला हर शख्स इससे प्रभावित हो जाता है। मंडी के इस लोकप्रिय मंदिर का नाम यहां रखी शिव की पांच मुख वाली मूर्ति के कारण पड़ा है। इस मूर्ति को सामने से देखने पर केवल तीन ही मुख दिखाई पड़ते हैं।

यह पंच मुख भगवान शिव की विभिन्न विशेषताओं को दर्शाते हैं - अघोर, ईशान, तत्पुरुष, वामदेव और रुद्र। अघोर विनाशकारी प्रकृति का प्रतीक है, ईशान का अर्थ है महादेव की सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान प्रकृति, तत् पुरुष उनके अहंकार का प्रतीक है, वामदेव महिला पहलू को दर्शाता है और रुद्र उनके रचनात्मक और विनाशकारी पहलुओं को दर्शाता है। पंचवक्त्र की मूर्ति को भगवान शिव की इन सभी प्रकृतियों के मिलन के रूप में परिभाषित किया गया है।
सावन 2023: पंचवक्त्र मंदिर की यात्रा का सर्वोत्तम समय, दर्शन का समय और कैसे पहुँचें:
हालांकि पंचवक्त्र मंदिर की उत्पत्ति अज्ञात है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, मंदिर का जीर्णोद्धार सिध सेन के शासनकाल (1684-1727) में किया गया था क्योंकि यह बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था और 18वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण किया गया था।
इस मंदिर में दर्शन का समय सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक है। अगर आप अक्टूबर से मार्च के बीच मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं तो आप बेहतरीन मौसम का आनंद ले पाएंगे। फरवरी महीने में तापमान 22 डिग्री सेल्सियस (उच्चतम) से 10 डिग्री सेल्सियस (न्यूनतम) के आसपास रहता है। गर्मियों में यह 35 डिग्री सेल्सियस (उच्चतम) और 21 डिग्री सेल्सियस (न्यूनतम) रहता है।
आप स्थानीय साधन कैब या बस किराए पर लेकर पंचवक्त्र मंदिर तक पहुंच सकते हैं और यह मंडी बस स्टेशन से सिर्फ 1 किमी दूर है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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