Latest Updates
-
CJP के बाद किसने शुरू की E20 जनता पार्टी? सोशल मीडिया पर जुड़े लाखों फॉलोअर्स, जानें क्या है मांग -
कौन हैं Indian Idol 16 की विनर ज्योतिर्मयी नायक? कैंसर मरीजों को देती थीं थेरेपी, अब है ये सपना -
Bank Holidays August 2026: अगस्त में 14 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
APJ Abdul Kalam Death Anniversary: सपनों को पूरा करने का हौसला देते हैं डॉ. कलाम के ये 10 प्रेरणादायक विचार -
Jaya Parvati Vrat Katha: जया पार्वती व्रत में जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, मिलेगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद -
Jaya Parvati Vrat 2026: जया पार्वती व्रत आज से शुरू, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और महत्व -
National Parents Day 2026 Wishes: आपकी उंगली पकड़कर चलना सीखा...पेरेंट्स डे पर माता-पिता को भेजें ये खास संदेश -
Kargil Vijay Diwas 2026 Wishes: तिरंगे की शान...कारगिल विजय दिवस के मौके पर अपनों को भेजें ये शुभकामना संदेश -
छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, जानें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के बारे में सबकुछ -
CJP प्रोटेस्ट में शामिल होने के बाद शबाना आजमी को हुआ स्वाइन फ्लू, जानें इस बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय
Pradosh Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है सावन का आखिरी प्रदोष व्रत, जिसे पढ़ने से शिवजी होंगे प्रसन्न
Pradosh Vrat Katha: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए बेहद खास माना जाता है, और इसी पावन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत इस बार 6 अगस्त 2025, बुधवार को रखा जाएगा। यह व्रत हर माह शुक्ल व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है, लेकिन सावन मास का प्रदोष व्रत और भी खास हो जाता है क्योंकि इस पूरे महीने को शिव पूजा का महीना माना गया है।
जो भी श्रद्धालु इस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत और पूजा करता है, उसे भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह व्रत खासतौर पर सुख-समृद्धि, लंबी उम्र और पापों से मुक्ति के लिए रखा जाता है। इस दिन कथा का भी विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं उस कथा के बारे में जिसे पढ़ने से प्रदोष व्रत का मिलेगा पुण्य और इस व्रत का महत्व व पूजा विधि।

प्रदोष व्रत का महत्व (Importance of Pradosh Vrat)
यह व्रत त्रयोदशी तिथि को शाम के समय सूर्यास्त के बाद पूजा करके किया जाता है। प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। यह व्रत दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने और संतान प्राप्ति के लिए भी फलदायी माना गया है। सावन के प्रदोष व्रत में शिव पार्वती की संयुक्त पूजा करने से दोगुना फल मिलता है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Puja Vidhi)
व्रती को सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
शाम को फिर से स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भस्म, चंदन व भोग अर्पित करें।
धूप-दीप जलाकर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
शिव पुराण या प्रदोष व्रत कथा सुनें/पढ़ें।
आरती करें और अंत में शिव जी से अपने मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें।

प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा (Pradosh Vrat Katha)
प्राचीन काल की बात है, एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह अत्यंत निर्धन था और भोजन के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहता था। एक दिन वह घर छोड़कर वन की ओर चला गया। वहां उसने कुछ ऋषियों को तप करते देखा। उनमें से एक ऋषि ने उसे देखकर पूछा, "तुम यहां क्यों आए हो?" ब्राह्मण ने कहा, "मैं बहुत दुखी हूं, मुझे जीवन में कोई सुख नहीं मिला। कृपया कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे मेरे जीवन के सारे दुख समाप्त हो जाएं।" ऋषि ने कहा, "यदि तुम भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना चाहते हो, तो प्रदोष व्रत करो। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को शाम के समय रखा जाता है। इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं।" ब्राह्मण ने वैसा ही किया। उसने लगातार कई माह तक प्रदोष व्रत किया और एक दिन उसे भगवान शिव के दर्शन हुए। शिव जी ने प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया कि उसके सारे दुख समाप्त हो जाएंगे। कुछ समय बाद वह ब्राह्मण एक समृद्ध नगर में गया, वहां के राजा ने उसे अपने राज्य का मंत्री बना लिया। उसके जीवन में सुख, संपत्ति और मान-सम्मान की वर्षा होने लगी। उसने अपने परिश्रम और ईश्वर भक्ति से एक आदर्श जीवन प्राप्त किया।



Click it and Unblock the Notifications