Latest Updates
-
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, दरवाजे से लौट जाएंगी मां लक्ष्मी -
डायबिटीज में चीकू खाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट -
Aaj Ka Rashifal 16 April 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा तुला और कुंभ का भाग्य, जानें अपना भविष्यफल -
Akshaya Tritiya पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व और पौराणिक कथा -
Parshuram Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: परशुराम जयंती पर इन संस्कृत श्लोकों व संदेशों से दें अपनों को बधाई -
कौन हैं जनाई भोंसले? जानें आशा भोसले की पोती और क्रिकेटर मोहम्मद सिराज का क्या है नाता? -
Amarnath Yatra Registration 2026: शुरू हुआ रजिस्ट्रेशन, घर बैठे कैसे करें आवेदन, क्या हैं जरूरी डॉक्यूमेट्स -
Akshaya Tritiya पर जन्म लेने वाले बच्चे होते हैं बेहद खास, क्या आप भी प्लान कर रहे हैं इस दिन डिलीवरी -
उत्तराखंड में 14 साल की लड़की ने दिया बच्चे को जन्म, जानें मां बनने के लिए क्या है सही उम्र -
गर्मियों में भूलकर भी न खाएं ये 5 फल, फायदे की जगह पहुंचा सकते हैं शरीर को भारी नुकसान
Sawan Somvar Vrat Katha: सावन सोमवार व्रत में जरूर पढ़ें ये कथा और शिव आरती, होंगी सारी इच्छा पूरी
Sawan Somvar Vrat Katha: सावन के पावन महीने की शुरुआत 11 जुलाई 2025 से हो गई है। 14 जुलाई यनी आज सावन का पहला सोमवार है। सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस पूरे माह में विशेषकर सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा और व्रत करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सावन के सोमवार को विधिपूर्वक व्रत करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अविवाहित कन्याओं के लिए यह व्रत उत्तम वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है, वहीं विवाहित स्त्रियों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
पुरुषों के लिए यह व्रत समृद्धि, संतान-सुख और परिवार में शांति लाता है। आइए जानते हैं सावन सोमवार व्रत की संपूर्ण कथा और पूजा की विधि व आरती।
सावन सोमवार व्रत पूजा विधि (Sawan Somwar Vrat Pooja Vidhi)
प्रातः काल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, भस्म, सफेद फूल, अक्षत, और चंदन चढ़ाएं।
दीपक और धूप जलाकर ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
शिव चालीसा और आरती का पाठ करें।
व्रत करने वाले व्यक्ति को दिनभर उपवास रखना चाहिए, फलाहार या जल पर निर्भर रह सकते हैं।
संध्या के समय फिर से भगवान शिव की आरती करें और व्रत कथा सुनें।
अगले दिन प्रातः व्रत का पारण करें।

सावन सोमवार व्रत कथा
बहुत प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक ब्राह्मण परिवार निवास करता था। पति-पत्नी दोनों अत्यंत शिवभक्त थे, परंतु संतान नहीं होने के कारण वे अत्यंत दुखी थे। उन्होंने अनेक व्रत-उपवास किए, किंतु संतान की प्राप्ति नहीं हुई। एक दिन ब्राह्मण और उसकी पत्नी एक संत के पास पहुँचे और अपने दुख का कारण बताया। संत ने कहा, तुम श्रावण मास के सोमवार को भगवान शिव का व्रत रखो, नियमपूर्वक पूजा-अर्चना करो और व्रत कथा सुनो। भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होंगे और तुम्हें संतान की प्राप्ति होगी।
ब्राह्मण दंपत्ति ने संत की बात मानी और अगले श्रावण मास में पूरे नियम से सोमवार का व्रत किया। वे प्रातःकाल उठकर स्नान कर मंदिर जाते, बेलपत्र, जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते, फिर दिन भर उपवास रखते और शाम को कथा सुनते। श्रद्धा और भक्ति से किए गए इस व्रत से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर वरदान दिया तुम्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होगी, जो धर्मपरायण और यशस्वी होगा।
कुछ महीनों बाद ब्राह्मण दंपत्ति के घर एक सुंदर पुत्र ने जन्म लिया। परिवार में खुशियाँ लौट आईं। इस घटना के बाद से श्रावण सोमवार व्रत की परंपरा चल पड़ी।

सावन सोमवार की एक और व्रत कथा
एक समय की बात है, एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ जीवनयापन कर रहा था। दोनों बहुत धार्मिक थे और प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करते थे। लेकिन गरीबी इतनी थी कि भोजन के भी लाले पड़ते। एक दिन ब्राह्मण ने अपनी पत्नी से कहा, मैं तीर्थ यात्रा पर जा रहा हूँ, शायद वहां कोई रास्ता निकल आए। ब्राह्मण घुमते-घुमते एक नगर पहुँचा, जहां उसने भगवान शिव का भव्य मंदिर देखा। वहीं वह मंदिर की साफ-सफाई करने लगा। भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और एक रात स्वप्न में उसे दर्शन देकर बोले, "तू प्रति सोमवार व्रत कर और सावन के महीने में विशेष पूजा कर। तेरा जीवन सुखमय हो जाएगा।"
ब्राह्मण ने वैसा ही किया। उसने पूरे सावन भर सोमवार का व्रत रखा, शिवजी की पूजा की और कथा सुनाई। शीघ्र ही उसकी आर्थिक स्थिति सुधर गई और वह समृद्ध हो गया। जब वह अपने गांव लौटा तो लोगों ने उससे उसकी समृद्धि का कारण पूछा। ब्राह्मण ने सभी को सावन सोमवार व्रत का महत्व बताया। तब से लोग इस व्रत को श्रद्धा से करने लगे और हर साल सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करके अपना जीवन सफल बनाते हैं।

ॐ जय शिव ओंकारा - शिव आरती
ॐ जय शिव ओंकारा
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुर्भुज धरते,
त्रिगुण स्वरूप दिखाते।
जनम-मरण मोचन,
भक्तों को सुख देते॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाल वनमाला शोभित,
गले में सर्प विभूषण।
रत्नजटित मुकुट सिर शोभे,
ललाट पर चंद्र विभूषण॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर्पूरगौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे,
भवं भवानी सहितं नमामि॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
भस्म अंग पर रमायो,
त्रिनयन धारी।
नंदी गणेशा साथे,
पार्वती प्यारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अन्न दान जो कोई करे,
श्रद्धा भाव से भरे।
शिवलोक प्राप्त करे,
दुख कष्ट सब हरे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
जो जन ध्यान लगाए,
शिव नाम सदा गाए।
संकट से वह छुटे,
शिव धाम को पाए॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥



Click it and Unblock the Notifications











