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Shab-e-Qadr Ki Dua: शब-ए-कद्र की रात कौन सी दुआ पढ़ी जाती है, जानें नमाज का तरीका
Shab-e-Qadr Laylatul Qadr Ki Dua: रमज़ान का पूरा महीना ही पाक और मुबारक होता है। हर मुसलमान के लिए ये वक्त दुआओं व बरकत का होता है। इस दौरान मुस्लिम पांचों वक्त की नमाजें अता करते हैं, तरावीह पढ़ते हैं, रोजे रखते हैं और ज्यादा से ज्यादा अल्लाह की इबादत करते हैं। रमज़ान महीने में आने वाली शब-ए-कद्र की रात की भी ख़ास महत्ता बताई गयी है।
रमज़ान की सबसे ख़ास रात होती है शब-ए-कद्र की रात। ऐसा कहा जाता है कि शब ए कद्र में ही अल्लाह तआला ने नबी ए पाक पर कुरआन मजीद नाजिल (उतारा) किया था। यही वजह है कि इस्लाम में इस रात को इबादत की रात माना जाता है। इस एक रात में की गयी इबादत का कई हजार गुना सवाब मिलता है।

शब-ए-कद्र क्या है? (Shab-e-Qadr Kya Hai?)
रमजान के महीने के तीसरे और आखिरी अशरे में शब-ए-कद्र की रात आती है। ऐसी मान्यता है कि इसी मुकद्दस रात को अल्लाह तआला ने आखिरी रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम के ऊपर कुरआने-पाक नाजिल फरमाया था। इस रात सभी मुसलमान सारी रात जागते हैं और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। ये साल की सबसे क्रांति रातों में से एक है। इस रात को हजारों महीनों की दुआओं के जितना सवाब मिलता है। गणना के अनुसार इस रात में इबादत का सवाब 83 साल और 4 महीने की इबादत के बराबर होता है।
भारत में शब-ए-कद्र 2024 कब है? (Shab-e-Qadr 2024 Date in India)
रमजान के महीने में आखिरी दस रातों की विषम संख्या वाली रातों में से कोई एक शब-ए-कद्र यानी लैलतुल कदर यानी शब ए कद्र की रात होती है। साल 2024 में रमजान 12 से शुरु हुए हैं तो 21वीं रात 31 मार्च 2024 को हुई। ऐसे में भारत में शबे कद्र की रात 31 मार्च, 2 अप्रैल, 4 अप्रैल, 6 अप्रैल, और 8 अप्रैल को होगी। यानी रमजान माह की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं, 29वीं रातों को शब ए कद्र की रात माना जाता है। वैसे भारत में 27वीं रात पर ज्यादा जोर दिया जाता है। इस लिहाज से इस साल भारत में 6 अप्रैल 2024 को शबे कदर की रात होगी।
शबे कद्र में क्या करते हैं? (Shab-e-Qadr Ke Din Kya Kare?)
रमजान माह की शब-ए-कद्र की रात सबसे सलामती व ताकतवर रात मानी जाती है। इस रात रोजा रखने वाले लोग जाने अनजाने में हुए अपने तमाम गुनाहों से तौबा करते है। रोजेदार पूरी रात जागते हैं और अपना ज्यादा से ज्यादा समय अल्लाह की इबादत में बिताते हैं। अल्लाह की इबादत के साथ वो दुआ, कुरान की तिलावट आदि पर भी विचार करते हैं। इस रात खास नमाजें अता की जाती हैं। वहीं कब्रिस्तान में जाकर मरहूम के लिए दुआ ए मगफिरत की जाती है।
शब ए कद्र की नमाज़ का तरीका (Shab E Qadr Ki Namaz Ka Tarika)
शब ए कद्र के दिन नफील नमाज अदा कर सकते हैं। इसका तरीका सामान्य नमाज़ की तरह ही होता है। बस नियत करते वक्त आपको नफील नमाज़ कहना है। हालांकि, बहुत से उम्रदराज और कई अकीदतमंद अपने गुनाहों की माफी की दुआ भी मांगते हैं और वो दो नफील नमाज़ अदा करते हैं।
वैसे तो सब लोगों के इबादत करने का तरीका अलग होता है। मगर इस रात कुरान शरीफ की तिलावत, नफ्ल नमाज़ (सालातुलतस्बीह, तहज्जुद की नमाज़) को जरूर पढ़ना चाहिए।
शब-ए- कद्र की दुआ (Shab-e-Qadr ki Dua)
अल्लाहुम्मा इंनका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफवा फ'अफु अन्नी
Allahumma innaka afuwwun tuhibbul afwa fa'Afu anni
तर्जुमा: "ए अल्लाह तू माफ करने वाला है और बेशक तू माफ करना पसंद करता है..हमारे तमाम गुनाह तो माफ फरमा।"
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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