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Shani Jyanti 2023: कैसे हुआ था शनिदेव का जन्म, मुत्यु के देवता यम से है खास रिश्ता, ऐसा है शनिदेव का परिवार
नौ ग्रहों के राजा शनिदेव को लेकर कई लोगों को कौतूहल रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव कलयुग में न्याय के देवता हैं। शनिदेव से जुड़े कई कथाओं और किंवदंतियों का पुराणों में वर्णन हैं।
मुत्यु के देवता यमराज शनिदेव के रिश्ते से भाई लगते हैं। जी हां शनि जयंती के मौके पर जानते हैं कि न्यायधीश कहे जाने वाले शनि देव का परिवार कौन है? और इसे जानने की जिज्ञासा सभी को रहती है।

ये है परिवार
हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे प्रसिद्ध और भयभीत देवताओं में से एक हमेशा शनि रहा है। यमाग्रज, छायात्मज, नीलकाय, क्रुर कुशांग, कपिलाक्ष, अकैसुबन, असितसौरी सौरा, पंगु, मांडू, क्रुरद्रिस, असिता और सप्तर्षि उनके अन्य नाम हैं। शनि को 33 देवताओं में से एक भगवान सूर्य का पुत्र माना गया है। उनकी माता का नाम छाया है। शनिदेव के भाई बहन वैवस्वत मनु, यमराज, और यमुना और भद्रा है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भी व्यक्ति शनिदेव की पत्नियों का नाम जप करता है उस पर भी शनिदेव अपनी कृपा बरसाते हैं। शनिदेव की 8 पत्नियां ध्वजिनी, धामिनी, कलहप्रिया, कंकाली, तुरंगी, कंटकी, महिषी और अजा है।

कैसे हुआ था शनिदेव का जन्म
एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शनिदेव का जन्म ऋषि कश्यप के अभिभावकत्व यज्ञ से हुआ माना जाता है। लेकिन स्कंदपुराण के काशीखंड अनुसार शनि भगवान के पिता सूर्य और माता का नाम छाया है। उनकी माता को संवर्णा भी कहते हैं लेकिन इसके पीछे एक कहानी है। राजा दक्ष की कन्या संज्ञा का विवाह सूर्यदेवता के साथ हुआ। संज्ञा और सूर्यदेव के गर्भ से यमराज, यमुना और वैवस्वत नामक संतानों ने जन्म लिया। संज्ञा सूर्यदेव के तेज से परेशान रहती थी तो वह सूर्य देव के तेज को कम करने का सोचने लगी।
इसके लिए संज्ञा ने एक तरकीब निकाली जिससे सूर्य देव को मालूम भी न चले और उनकी तपस्या भी हो जाएं। इसके लिए उन्होंने अपने तप से छाया नाम की संवर्णा को पैदा किया। सूर्यदेव और अपने बच्चों की जिम्मेदारी संवर्णा को देकर वो अपने पिता के घर चली गईं। जब संज्ञा ने अपनी परेशानी अपने पिता को बताई तो वो बहुत गुस्सा हुए और संज्ञा को डांटकर वापस भेज दिया। किन्तु अपने पति के घर वापस न आकर वो जंगल में चली गई। जंगल में जाकर घोड़ी का रूप धारण कर लिया और तपस्या करने लगी।
इन सब बातों का सूर्य देव को आभास भी नहीं हुआ। सूर्य देव के साथ रहने वाली संवर्णा का छाया रूप होने के कारण सूर्यदेव के तप से उसे कोई परेशानी नहीं हुई और कुछ समय बाद संवर्णा और सूर्यदेव के मिलन से शनिदेव, मनु और भद्रा नाम की तीन संतानों ने जन्म लिया। इस तरह शनि देव का जन्म हुआ।



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