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Sheetala Ashtami Ke Din Jhadu Lagana: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ?
Sheetala Ashtami Ke Din Jhadu Lagana: हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी तिथि को बहुत ख़ास माना गया है। इस दिन माता पार्वती की ही स्वरूप शीतला मैया की पूजा करने का विधान है। शीतला अष्टमी पर्व दूसरे नामों से जैसे बसौड़ा या बसियौरा से भी जाना जाता है। शीतला माता के नाम से ही स्पष्ट होता है कि ये किसी भी समस्या से राहत देने में मदद करती हैं।
यह पर्व खासतौर से उत्तर भारत में प्रचलित है। शीतला माता की पूजा वैसे सप्तमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाती है और अष्टमी तिथि के दिन पूरे विधि विधान से पूजन के पश्चात् उन्हें भोग चढ़ाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में शीतला माता की पूजा की जाती है, वहां परिवार के सदस्य हर तरह के रोग से मुक्त रहते हैं और घर में सुख शांति बनी रहती है। शीतला माता की पूजा से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने और कई काम को करने की मनाही भी है। आइये इसी सिलसिले में जानते हैं कि शीतला अष्टमी पर झाड़ू लगाना सही है या गलत।

शीतला अष्टमी 2024 की पूजा का समय (Sheetala Ashtami 2024 Date)
चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 01 अप्रैल को रात 09 बजकर 09 मिनट से होगा और इसके अगले दिन 02 अप्रैल को रात 08 बजकर 08 मिनट पर इसका समापन होगा। उदयातिथि के अनुसार शीतला अष्टमी का पर्व 02 अप्रैल को मनाया जाएगा। जो लोग शीतला सप्तमी मनाते हैं, वे 1 अप्रैल के दिन शीतला सप्तमी पूजन करेंगे।
शीतला अष्टमी मंगलवार, अप्रैल 2, 2024 को
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त - 06:10 ए एम से 06:40 पी एम
अवधि - 12 घण्टे 30 मिनट्स
शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना सही या गलत? (Sheetala Ashtami Par Jhadu Lagana)
जानकारों की मानें तो शीतला अष्टमी के पावन दिन पर झाड़ू लगाने की सख्त मनाही है। शीतला अष्टमी के दिन घर की सफाई करने से मना किया जाता है। इस दिन झाड़ू और पोंछा नहीं लगाया जाता है। घर में झाड़ू के इस्तेमाल को शीतला माता का अपमान समझा जाता है। इस नियम के पीछे ठोस कारण की जानकारी तो नहीं है लेकिन यह माना जाता है कि शीतला माता की तस्वीर में एक हाथ में झाड़ू नजर आता है। इसलिए इस दिन झाड़ू लगाने से इसका अपमान हो जाता है।
शीतला अष्टमी पर इन कामों की भी है मनाही (Sheetala Ashtami Ke Din Kya Nahi Karna Chahiye)
* माता शीतला की पूजा करते समय दीया, धूप या अगरबत्ती नहीं जलाई जाती।
* माँ को आटे से बने घी के ठंडे दिये यानि बिना जले दिये को ही अर्पित किया जाता है।
* शीतला अष्टमी के दिन घर में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता।
* शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता।
* इस दिन ठंडा और बासी भोजन खाते हैं।
* शीतला अष्टमी के दिन नए कपड़े या काले कपड़े न पहनें।
* सप्तमी और अष्टमी पर सिर नहीं धोना चाहिए।
* इस दिन चक्की या चरखा नहीं चलाना चाहिए।
* शीतला अष्टमी के दिन सिलाई नहीं करना चाहिए और न ही सुई में धागा पिरोते हैं।
* इस दिन गरम भोजन ना ही खाया जाता हैं और ना ही देवी शीतला माता को समर्पित किया जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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