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27 जुलाई: चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं बरतें ये सावधानियां

सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण 27 जुलाई, 2018 को पड़ रहा है। ये ग्रहण चार घंटे तक चलेगा। 27 जुलाई की रात को 11 बजकर 54 मिनट पर ग्रहण काल की शुरुआत होगी और 28 जुलाई को सुबह 3 बजकर 55 मिनट पर ये खत्म होगा।
किसी भी शुभ कार्य के लिए ग्रहण काल अशुभ माना जाता है। यहां तक कि सूतक काल से ही अशुभ समय आरंभ हो जाता है। सूतक काल ग्रहण के शुरु होने से नौ घंटे पहले और सूर्य ग्रहण से 22 घंटे पहले का समय होता है। कुछ चीज़ों के लिए इस समय को अत्यंत अशुभ माना जाता है।

27 जुलाई को सूतक काल 2 बजे शुरु होगा और अगले दिन सूर्योदय तक रहेगा। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को अपना खास ध्यान रखना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में बरतें ये सावधानियां:
ग्रहण के दौरान बाहर ना निकलें
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए। इससे भ्रूण पर सीधा असर पड़ता है और शिशु के शरीर पर लाल रंग के निशान पड़ सकते हैं। कोशिश करें इस दौरान आप घर पर ही समय बिताएं।
ग्रहण काल में नुकीली वस्तुओं का प्रयोग
गर्भवती महिलाओं को चाकू, सुई और कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। यहां तक कि ना केवल गर्भवती महिला बल्कि उसके पति को भी इन सब चीज़ों से दूर रहना चाहिए। इन चीज़ों के प्रयोग से शिशु के शारीरिक अंग प्रभावित हो सकते हैं। इनका उपयोग जीवन में नकारात्मकता को आकर्षित करता है।
ग्रहण काल के दौरान भोजन ना करें
ग्रहण काल में खाना ना पकाएं और ना ही खाएं। ऐसा करने से ग्रहण की हानिकारक किरणें खाने पर पड़ती हैं जिनका गलत असर शिशु पर पड़ सकता है। अगर सूतक काल में भोजन करना ही है तो उसमें तुलसी की पत्तियां डालकर खाएं। इससे ग्रहण के बाद भी भोजन सुरक्षित रहता है। लेकिन ध्यान रहें की तुलसी की पत्तियां आप ग्रहण लगने से पहले ही तोड़ लें।
ग्रहण के बाद स्नान
ऐसा माना जाता है कि गर्भवती स्त्री को ग्रहण के पश्चात स्नान करना चाहिए वरना शिशु को त्वचा रोग हो सकते हैं।
ग्रहण काल में ना सोएं
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल के दौरान सोना नहीं चाहिए। ऐसा करने से भी शिशु पर गलत असर पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि सोते समय नकारात्मक ऊर्जाएं ज़्यादा जल्दी असर करती हैं।



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