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Chaitra Navratrti 2023 Bhog List: दिन के अनुसार माता को चढ़ाएं भोग, देखें नौ दिन की पूरी लिस्ट
इस वर्ष 22 मार्च से चैत्र नवरात्रि का नौ दिवसीय धार्मिक महोत्सव शुरू होने वाला है। चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिन्दू विक्रम संवत 2080 भी शुरू हो जाएगा। हिन्दू धर्म में शारदीय और चैत्र नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व है। नवरात्रि के नौ दिन माता के नौ अलग अलग रूपों की पूरी श्रद्धा से अराधना की जाती है।

चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गुड़ी पड़वा का त्योहार भी मनाया जाता है, जो हिन्दू नववर्ष का प्रतीक है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही नवरात्र की शुभ शुरुआत हो जाती है। कई भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत का पालन करते हैं। नवरात्रि के नौ अलग अलग दिन माता के अलग अलग रूपों की पूजा होती है, और हर देवी की पसंद के अनुसार ही उन्हें भोग लगाया जाता है। चलिए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिन के अनुसार भोग की जानकारियां:

पहला दिन - माता शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं?
नवरात्र का प्रथम दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। मान्यता अनुसार माता शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं और उनका पसंदीदा रंग सफ़ेद है। पहले दिन देवी के भोग में गाय के घी या दूध को प्रयोग में लाना चाहिए। सीधे घी या दूध का चढ़ावा या इनसे बने मिष्ठान का भोग लगाया जाता है। इससे मां के आशीर्वाद के साथ आरोग्य की प्राप्ति होती है। अनार का फल देवी का पसंदीदा है।

दूसरा दिन - माता ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का दिन होता है। इस दिन माता को शक्कर, चीनी या मिश्री, पंचामृत या सफ़ेद मिठाई का भोग लगाया जाता है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की अराधना से दीर्घायु की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी के भोग में सेब को शामिल किया जा सकता है।

तीसरा दिन - माता चंद्रघटा को क्या भोग लगाएं?
नवरात्र का तीसरा दिन माता चंद्रघटा को समर्पित होता है और उनकी अराधना से व्यक्ति सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाता है। इस दिन मां को दूध व खोवे से बनी मिठाई व खीर का भोग लगाएं। माता का पसंदीदा फल केला और सेब है, इन्हें आप भोग में शामिल कर सकते हैं।

चौथा दिन - माता कुष्मांडा को क्या भोग लगाएं?
चतुर्थी का दिन मां कुष्मांडा का दिन होता है। इस दिन माता को मालपुए का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही माता को नाशपति का फल पसंद है, जो उनके भोग में शामिल किया जा सकता है। इस दिन भोग को परिवार के सभी सदस्यों में बांटना चाहिए, इससे बुद्धि का विकास होता है।

पांचवा दिन - देवी स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के पांचवें दिन दुर्गा के स्कंदमाता रूप का पूजन होता है। इस दिन मां को केले का भोग लगाया जाता है। केले का कोई व्यंजन भी बनाकर भोग में चढ़ाया जा सकता है। इस भोग और माता की अराधना से शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है और करियर में सफलता प्राप्त होती है।

छठा दिन - माता कात्यायनी को क्या भोग लगाएं?
छठें दिन मां कात्यायनी की पूजा का दिन होता है। मां कात्यायनी को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की देवी माना जाता है। इस दिन मां को लौकी, मीठा पान, शहद या अमरुद का भोग लगाया जाता है। इस दिन मां की अर्चना करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है।

सातवां दिन - माता कालरात्रि को क्या भोग लगाएं?
सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाती है। माता कालरात्रि शत्रुओं का नाश करने वाली देवी मानी जाती हैं। इस दिन मां को गुड़ और मेवे से बना भोग लगाना चाहिए। मां इस दिन भक्तों के कष्टों को दूर करती हैं।

आठवां दिन - देवी महागौरी को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी माता की पूजा अर्चना होती है। इस दिन मां को नारियल या नारियल से बने व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। देवी की अराधना और भोग लगाने से घर में सुख समृद्धि और धन में वृद्धि होती है।

नौवां दिन - देवी सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि का आखिरी और नौवां दिन देवी सिद्धिदात्री को समर्पित दिन होता है। इस दिन माता को हलवा और चने का भोग लगाया जाता है। इस भोग को कन्याओं के पूजन के बाद उन्हें खिलाया जाना चाहिए। मान्यता अनुसार इस दिन तिल का भोग लगाने से अनहोनी की आशंका खत्म हो जाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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