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कोरोना वायरस के कारण बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने में हुई देरी, ये तिथि है फाइनल
इस वर्ष बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि पहले 30 अप्रैल रखी गयी थी, मगर कोरोना वायरस के कहर का प्रभाव धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा। हिंदू धर्म के मानने वाले श्रद्धालुओं के लिए बद्रीनाथ धाम खासा महत्व रखता है। अब इसके कपाट 15 मई की सुबह 4.30 बजे खोलने का फैसला किया गया है।

ऋषिकेश से आये फूलों से इसका द्वार सजाया गया है। कपाट खुलने से जुड़ी सभी तैयारियां लगभग पूरी की जा चुकी हैं। गौरतलब है कि इस काम में लगे लोगों ने सेहत से जुड़े सभी मानकों का ख्याल रखा है। जानते हैं इस बार कोरोना वायरस के कारण बद्रीनाथ के कपाट खुलने की पूरी प्रक्रिया किस तरह प्रभावित हुई है।

क्वारेंटाइन में रहे रावल
बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की अनुमति केवल रावल के पास होती है। देशभर में लॉकडाउन की स्थिति रहने के कारण रावल ईश्वर प्रसाद नंबूदरी को केरल से उत्तराखंड पहुंचने में तीन दिन का समय लगा। इतना ही नहीं, इस यात्रा के बाद उन्हें क्वारेंटाइन में रखा गया।

कपाट खोलने और बंद करने की तीन तिथियां
आम लोगों को शायद ही इस बात की जानकारी हो कि बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने और बंद करने के लिए तीन तिथियां तय की जाती हैं। इस क्षेत्र में मौसम हमेशा अनुकूल नहीं रहता है इसलिए एहतियात के तौर पर इस कार्य के लिए दिन चुने जाते हैं। धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल के मुताबिक उनके जीवन काल में ऐसा पहली दफा हुआ है जब कपाट खुलने की तारीख में बदलाव हुआ हो।

बद्रीनाथ में हैं केरल के पुजारी
आदि गुरु शंकराचार्य पूरे भारत को एकसूत्र में पिरोना चाहते थे इसलिए उन्होंने ऐसी व्यवस्था का इंतजाम किया जिसके तहत देश के चारों धामों में विशेष पुजारी हैं। बद्रीनाथ धाम में केरल के नंबूदरी पुजारी पूजा करते हैं। इन पुजारी को ही रावल कहा जाता है। वहीं रामेश्वरम में उत्तर भारत के पुजारी इंतजाम देखते हैं। इसी तरह जगन्नाथ पूरी और द्वारिकाधाम में भी इसी तरह की व्यवस्था की गई है।

कोरोना के कारण इस चीज की खलेगी कमी
बद्रीनाथ धाम के कपाट पूरे विधि विधान के साथ खुलेंगे। पहली बार ऐसा होगा कि भगवान दर्शन देने के लिए तैयार रहेंगे, मगर इस साल भक्त चाहकर भी अपने प्रभु का दीदार नहीं कर सकेंगे। धाम का कपाट खुलने से जुड़ी जितनी परंपरा है उन सभी का पालन किया जाएगा। 15 मई, शुक्रवार की सुबह साढ़े चार बजे गणेशजी की पूजा के बाद कपाट खोले जाएंगे। इसके पश्चात् बद्रीनाथ के साथ आयुर्वेद के देवता धनवंतरि की भी विशेष पूजा होगी। इस बार देश और दुनिया से कोरोना के प्रभाव को खत्म करने के लिए खास प्रार्थना की जाएगी।



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