Diwali 2021: इस साल दिवाली पूजन के लिए ये है सबसे उत्तम समय, माता लक्ष्मी के इन मंत्रों का जरुर करें जाप

दिवाली की तैयारियां हर घर में लगभग शुरू हो चुकी है। एक तरह साफ-सफाई का अभियान शुरू है तो दूसरी तरफ शॉपिंग कोविड-19 के मामलों में कमी आने के बाद से बाजारों में भी रौनक धीरे धीरे लौट रही है। दीपावली पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह रहता है। साल में एक बार आने वाले इस पर्व की धूम कई दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। पंचांग के अनुसार दिवाली का उत्सव कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। जानते हैं साल 2021 में दिवाली का उत्सव किस दिन पड़ रहा है और लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ समय कौन सा रहेगा।

दिवाली 2021 तिथि

दिवाली 2021 तिथि

कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारंभ: 04 नवंबर को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से

कार्तिक अमावस्या तिथि समापन: 05 नवंबर को रात 02 बजकर 44 मिनट तक।

इस साल दिवाली का पर्व 4 नवंबर को मनाया जाएगा। इसके पश्चात् 5 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। इस साल भैया दूज का त्योहार 6 नवंबर को पड़ेगा

दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त

दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त

दिवाली के दिन गणपति भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। दिवाली के दिन पूरी श्रद्धा के साथ जो जातक उनका स्मरण करता है उन्हें सुख-समृद्धि, धन-संपदा और यश का आशीर्वाद मिलता है। इस साल दिवाली की पूजा का सबसे शुभ समय 04 नवंबर को शाम 06.10 बजे से लेकर रात्रि 08.06 बजे तक बताया जा रहा है। पूजन की यह अवधि 1 घंटे 55 मिनट की है। वहीं रात में 11.38 बजे से 12.30 बजे तक महानिशीथ काल में मां काली के पूजन का शुभ समय है।

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जाप

यदि जीवन में पैसों से जुड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं या उधार के चंगुल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं तो दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा जरुर करें। धन की देवी जिस जातक पर प्रसन्न हो जाती हैं उसे पैसों से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। इस दिवाली आप भी माता लक्ष्मी की पूजा अवश्य करें और उनका आशीर्वाद पाने के लिए इन मंत्रों का जाप भी करें।

ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।

पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।

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