Latest Updates
-
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम -
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन झाड़ू लगाना शुभ या अशुभ? बसौड़ा पर भूलकर भी न करें ये गलतियां -
Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है शीतला अष्टमी? जानिए सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, घर में आएगी सुख-समृद्धि -
Sheetala Ashtami 2026 Wishes: मां शीतला का आशीर्वाद बना रहे...इन संदेशों के साथ अपनों को दें बसौड़ा की बधाई -
कौन हैं संजू सैमसन की पत्नी चारुलता रमेश? टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद क्रिकेटर ने लिखा भावुक पोस्ट -
रणदीप हुड्डा बने पापा, लिन लैशराम ने बेटी को दिया जन्म, इंस्टाग्राम पर शेयर की क्यूट फोटो -
Kalashtami 2026: 11 या 12 मार्च, कब है कालाष्टमी का व्रत? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
गर्मियों में वजन घटाने के लिए पिएं ये 5 ड्रिंक्स, कुछ ही दिनों में लटकती तोंद हो जाएगी अंदर -
Mangalwar Vrat: पहली बार रखने जा रहे हैं मंगलवार का व्रत तो जान लें ये जरूरी नियम और पूजा विधि
इस तारीख को है ईद मिलाद उन-नबी, पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन से लें सीख
ईद मिलाद उन-नबी को ईद-ए-मिलाद या बारावफात के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 12 रबी अल अव्वल की तारीख को पड़ने वाला यह त्योहार मुस्लिम समुदाय के लिए काफी महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था और इसी तारीख को उनका देहांत हुआ था। पैगंबर हजरत मोहम्मद को इस्लाम धर्म का संस्थापक माना जाता है। इस दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद के संदेशों को याद किया जाता है और विशेष नमाजें अदा की जाती हैं।

ईद मिलाद उन-नबी 2020
साल 2020 में बारावफात या मीलाद उन नबी का पर्व 29 अक्टूबर, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।

पैगंबर हजरत मोहम्मद कौन थे?
आपको बता दें कि पैगंबर मोहम्मद का पूरा नाम पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम था। उन्हें इस्लाम का सबसे महान नबी बताया गया है। वे आखिरी पैगंबर थे। माना जाता है कि मक्का शहर में जन्मे हजरत मोहम्मद को वहां हीरा नाम की गुफा में ज्ञान प्राप्त हुआ था। आगे चलकर इन्होंने पवित्र किताब कुरआन की शिक्षाओं का उपदेश दिया। इनके पिता का नाम मोहम्मद इब्न अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब और वालिदा का नाम बीबी अमिना था। 25 साल की उम्र में उन्होंने खदीजा नाम की विधवा से शादी की।

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाने की वजह
इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग मिलाद उन-नबी के दिन हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी मनाते हैं। देर रात तक लोग अकीदत में डूबे रहते हैं। प्रार्थना करते हैं और कई जगह जुलूस भी निकाले जाते हैं। शिया और सुन्नी मुसलमान अपने अपने तरीकों से हजरत मोहम्मद की याद में इस दिन को व्यतीत करते हैं।

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन क्या करें
यह दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। लोग इस दिन अपने घरों को सजाते हैं। इस दिन मस्जिदों की भी सजावट की जाती है। गरीबों और जरूरतमंदों को दान दिया जाता है। इस दिन मस्जिद में नमाज अदा की जाती है और कुरआन पढ़ा जाता है। जो लोग मस्जिद नहीं जा पाते हैं वो घर पर ही नमाज अता कर लेते हैं। इस दिन लोग अपना ज्यादा से ज्यादा समय इबादत में बिताकर अल्लाह की रहमत पाते हैं।



Click it and Unblock the Notifications











