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हरतालिका तीज का व्रत करने वाली हर महिला को पता होने चाहिए ये नियम, स्वीकार्य नहीं है एक भी गलती
महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का दिन किसी उत्सव से कम नहीं होता है। वो पूरे साल इस दिन का इंतजार करती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन यह पर्व पड़ता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं। वो इस दिन अपने वैवाहिक जीवन को बुरे प्रभाव से बचाने और खुशहाली बनाये रखने की कामना करती हैं। हरतालिका तीज का व्रत करवाचौथ के व्रत से भी कठिन माना जाता है। हरतालिका तीज का व्रत करने वाली औरतों को कई तरह के नियमों का पालन करना पड़ता है। जानते हैं ऐसे कौन कौन से कार्य हैं जो हरतालिका तीज के दिन व्रती को अवश्य करने होते हैं।

एक या दो नहीं आठ प्रहर की जाती है पूजा
हरतालिका तीज के मौके पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणपति भगवान की पूजा करने का विधान है। इस दिन बालू रेत और काली मिट्टी से उनकी प्रतिमा अपने हाथों से तैयार करें। सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल से सुबह पारण के समय तक हर प्रहर में उनकी पूजा करें।

भजन-आरती का दौर चलता है पूरी रात
हरतालिका तीज का व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए करती हैं। वो व्रत की ये रात भजन-कीर्तन और लोकगीत गाकर बिताती हैं।

रात में सोने की होती है मनाही
हरतालिका तीज का व्रत करने वाली महिलाओं का रातभर जागना अनिवार्य होता है। इस अवधि में आठों प्रहर पूजा भी करनी होती है। इसके साथ ये भी मान्यता है कि इस रात जो महिला सो जाती है उसका अगला जन्म मगरमच्छ योनि में होता है।

महिलाएं करती हैं निर्जला व्रत
हरतालिका तीज का व्रत बहुत कठिन होता है। इस दिन महिलाओं को काफी कड़ा व्रत करना पड़ता है। इस दिन व्रत शुरू होने के साथ ही उन्हें अन्न-जल ग्रहण करने की मनाही होती है। वो अगले दिन सुबह पूजा के बाद ही जल के साथ अपना व्रत खोलती हैं।

जीवनभर रखना होता है ये व्रत
हरतालिका तीज के साथ एक मान्यता भी जुड़ी हुई है जिसके अनुसार एक बार इस व्रत को शुरू करने वाली महिला को जीवनभर इसका पालन करना होता है।

अति आवश्यक है कथा श्रवण करना
हरतालिका तीज का व्रत कथा सुनने के साथ ही पूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत करने वाली हर महिला को व्रत कथा अवश्य पढ़नी या सुननी चाहिए।

व्रत तोड़ना है पाप के समान
हरतालिका तीज में महिला जिस भी तरह का भोजन ग्रहण करके व्रत तोड़ लेती है तो उसका अगला जन्म अन्न की प्रकृति के आधार पर उस योनि में होता है।



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